1 कुरिन्थियों 7:39 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब तक किसी स्त्री का पति जीवित रहता है, तब तक वह उससे बंधी हुई है, परन्तु जब उसका पति मर जाए, तो जिससे चाहे विवाह कर सकती है, परन्तु केवल प्रभु में।

1 कुरिन्थियों 7:39 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 कुरिन्थियों 7:39 — तत्कालीन संदर्भ और today के लिए सीख

इस पद में प्रेरित पुरुष-स्त्री के विवाह-बंधन के नियम स्पष्ट होते हैं: पति जीवित रहने तक पत्नी पीछे बंधी रहती है; परन्तु यदि पति का देहांत हो जाए, तो वह किसी भी शुभ विवाह में सम्मिलित हो सकती है—परन्तु यह नया विवाह भी प्रभु के भीतर हो या परमेश्वर के अनुसार हो। यह कथन पवित्र-विवाह के स्थिरता और स्वतंत्रता के बीच संतुलन को उभारता है।

ईश्वर और विश्वास के बारे में जो पाठ बताता है

यह उद्धारकर्ता-प्रमाण देता है कि विवाह संबंध एक स्थिर और धार्मिक धारणाओं के साथ बनते हैं। पति के जीवन तक पत्नी का बंधन मान्य है; मृत्यु के बाद, विश्वास में नया आरम्भ संभव है। यह संदर्भ विवाह के प्रति ईमानदार प्रतिबद्धता और मृत्यु के बाद भी आत्म-निर्णय की स्वतंत्रता की एक साथ पुष्टि करता है—परन्तु नया विवाह करते समय भी प्रभु के मार्ग पर चलना महत्वपूर्ण है।

महत्वपूर्ण शब्द और imagery की स्पष्टता

- बंधी हुई: यहाँ विवाह-रिश्ते की गहन प्रतिबद्धता और सामाजिक-धार्मिक दायित्व दर्शाता है।
- जब पति मर जाए: त्योहार या सामाजिक परिवर्तन की सीमा नहीं, बल्कि पवित्र-संस्थागत परिवर्तन की प्रकृति।
- केवल प्रभु में: नया विवाह करते समय, पति-पत्नी के लिए आध्यात्मिक धुरी यह है कि वे प्रभु के साथ संबंध बनाए रखें।

सम्बन्धित आयतें (cross-references)

  • रोमियों 7:2–3 — विवाह-बंधनों की कानूनी और आध्यात्मिक धारणा का पुनरावलोकन, पवित्रता और विवाह-प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालना।
  • गलातियों 5:16–25 — आत्मा के फलों के अनुसार जीवन-यापन, जो विवाह के निर्णयों में नैतिक मार्गदर्शन देता है।
  • प्रेरित योहान 14:6 — जीवन के मार्ग-पथ स्वयं यीशु है; नए आरम्भ में शास्त्रीय शुद्धता और प्रभु-उद्धार का स्थान स्पष्ट करते हैं।

इन संदर्भों के साथ समझिए कि विवाह-निर्णय का केंद्र ईश्वरीय निर्देश और विश्वास की यात्रा है, न कि समाज-चलन का mere विकल्प।

चर्चित टिप्पणीकारों के संयोजन से एकीकृत दृष्टिकोण

यह उद्धरण एक साथ मानवीय संवेदनशीलता और आध्यात्मिक दायित्व को सामने लाता है: विवाह या पुनविवाह के निर्णय में विवेक, प्रार्थना, और समुदाय-सम्मति आवश्यक है। पुराने टिप्पणीकारों के विचारों में कुछ सामान्य बिंदु मिलते हैं—जिनमें स्त्री-पुरुष के रिश्ते की पवित्रता, मृत्यु के बाद की स्वतंत्रता, और विश्वास-केन्द्रित जीवन-निर्णय की महत्ता शामिल है।

आज का व्यवहार (Application)

  • विवाह की धारणा: यदि आपका साथी जीवित है, तो विवाह-बंधनों का सम्मान करें और अधीरता या उथल-पुथल में निर्णय न लें।
  • पुनर्विवाह के समय: यदि प्रेमी/प्रेमिका के साथ दु:खद घटना हो चुकी है, तो नया संबंध बनाते समय प्रभु के साथ अपने आस्था-यात्रा को प्राथमिकता दें—यानी पहले विश्वास की नींव मजबूत करें।
  • धार्मिक मार्गदर्शिका: सभी निर्णय prayerful, community-समर्थन और Scriptural दिशा-निर्देश के अनुरूप लें; यथार्थ में प्रभु में ही जीवन का केंद्र बनाएं।

समापन में, यह पंक्ति एक संतुलित मार्ग दिखाती है: विवाह-बंधन जीवन-यात्रा का भाग है, पर मृत्यु के बाद नया आरम्भ संभव है—परन्तु वह भी परमेश्वर के वचन के अनुरूप और प्रभु-जीवन के ठोस केंद्र के साथ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 7:39 समानांतर पद और संबंधित वचन

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