Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 7:1 1 कुरिन्थियों 7:2 1 कुरिन्थियों 7:3 1 कुरिन्थियों 7:4 1 कुरिन्थियों 7:5 1 कुरिन्थियों 7:6 1 कुरिन्थियों 7:7 1 कुरिन्थियों 7:8 1 कुरिन्थियों 7:9 1 कुरिन्थियों 7:10 1 कुरिन्थियों 7:11 1 कुरिन्थियों 7:12 1 कुरिन्थियों 7:13 1 कुरिन्थियों 7:14 1 कुरिन्थियों 7:15 1 कुरिन्थियों 7:16 1 कुरिन्थियों 7:17 1 कुरिन्थियों 7:18 1 कुरिन्थियों 7:19 1 कुरिन्थियों 7:20 1 कुरिन्थियों 7:21 1 कुरिन्थियों 7:22 1 कुरिन्थियों 7:23 1 कुरिन्थियों 7:24 1 कुरिन्थियों 7:25 1 कुरिन्थियों 7:26 1 कुरिन्थियों 7:27 1 कुरिन्थियों 7:28 1 कुरिन्थियों 7:29 1 कुरिन्थियों 7:30 1 कुरिन्थियों 7:31 1 कुरिन्थियों 7:32 1 कुरिन्थियों 7:33 1 कुरिन्थियों 7:34 1 कुरिन्थियों 7:35 1 कुरिन्थियों 7:36 1 कुरिन्थियों 7:37 1 कुरिन्थियों 7:38 1 कुरिन्थियों 7:39 1 कुरिन्थियों 7:40



1 कुरिन्थियों 7:39 — तत्कालीन संदर्भ और today के लिए सीख
इस पद में प्रेरित पुरुष-स्त्री के विवाह-बंधन के नियम स्पष्ट होते हैं: पति जीवित रहने तक पत्नी पीछे बंधी रहती है; परन्तु यदि पति का देहांत हो जाए, तो वह किसी भी शुभ विवाह में सम्मिलित हो सकती है—परन्तु यह नया विवाह भी प्रभु के भीतर हो या परमेश्वर के अनुसार हो। यह कथन पवित्र-विवाह के स्थिरता और स्वतंत्रता के बीच संतुलन को उभारता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में जो पाठ बताता है
यह उद्धारकर्ता-प्रमाण देता है कि विवाह संबंध एक स्थिर और धार्मिक धारणाओं के साथ बनते हैं। पति के जीवन तक पत्नी का बंधन मान्य है; मृत्यु के बाद, विश्वास में नया आरम्भ संभव है। यह संदर्भ विवाह के प्रति ईमानदार प्रतिबद्धता और मृत्यु के बाद भी आत्म-निर्णय की स्वतंत्रता की एक साथ पुष्टि करता है—परन्तु नया विवाह करते समय भी प्रभु के मार्ग पर चलना महत्वपूर्ण है।
महत्वपूर्ण शब्द और imagery की स्पष्टता
- बंधी हुई: यहाँ विवाह-रिश्ते की गहन प्रतिबद्धता और सामाजिक-धार्मिक दायित्व दर्शाता है।
- जब पति मर जाए: त्योहार या सामाजिक परिवर्तन की सीमा नहीं, बल्कि पवित्र-संस्थागत परिवर्तन की प्रकृति।
- केवल प्रभु में: नया विवाह करते समय, पति-पत्नी के लिए आध्यात्मिक धुरी यह है कि वे प्रभु के साथ संबंध बनाए रखें।
सम्बन्धित आयतें (cross-references)
इन संदर्भों के साथ समझिए कि विवाह-निर्णय का केंद्र ईश्वरीय निर्देश और विश्वास की यात्रा है, न कि समाज-चलन का mere विकल्प।
चर्चित टिप्पणीकारों के संयोजन से एकीकृत दृष्टिकोण
यह उद्धरण एक साथ मानवीय संवेदनशीलता और आध्यात्मिक दायित्व को सामने लाता है: विवाह या पुनविवाह के निर्णय में विवेक, प्रार्थना, और समुदाय-सम्मति आवश्यक है। पुराने टिप्पणीकारों के विचारों में कुछ सामान्य बिंदु मिलते हैं—जिनमें स्त्री-पुरुष के रिश्ते की पवित्रता, मृत्यु के बाद की स्वतंत्रता, और विश्वास-केन्द्रित जीवन-निर्णय की महत्ता शामिल है।
आज का व्यवहार (Application)
समापन में, यह पंक्ति एक संतुलित मार्ग दिखाती है: विवाह-बंधन जीवन-यात्रा का भाग है, पर मृत्यु के बाद नया आरम्भ संभव है—परन्तु वह भी परमेश्वर के वचन के अनुरूप और प्रभु-जीवन के ठोस केंद्र के साथ।