Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 12:1 1 शमूएल 12:2 1 शमूएल 12:3 1 शमूएल 12:4 1 शमूएल 12:5 1 शमूएल 12:6 1 शमूएल 12:7 1 शमूएल 12:8 1 शमूएल 12:9 1 शमूएल 12:10 1 शमूएल 12:11 1 शमूएल 12:12 1 शमूएल 12:13 1 शमूएल 12:14 1 शमूएल 12:15 1 शमूएल 12:16 1 शमूएल 12:17 1 शमूएल 12:18 1 शमूएल 12:19 1 शमूएल 12:20 1 शमूएल 12:21 1 शमूएल 12:22 1 शमूएल 12:23 1 शमूएल 12:24 1 शमूएल 12:25



1 शमूएल 12:20—क्यों यह वचन महत्वपूर्ण है
यह वचन बताता है कि परमेश्वर के सामने एक स्थिर विश्वास और ईमानदार कदम कैसे हमारे जीवन की दिशा तय कर सकता है। लोग गलतियों के पश्चात् डर और चिंता में आ जाते हैं, पर शमूएल का ज्ञान-वचन यह है कि परमेश्वर के साथ चलना ही रक्षा और जीवन का मूल है—भले ही हमने कुछ बुरे कर डाला हो। जब हम गलती मानते हैं और वापस उसके चहरो पर चलते हैं, तब परमेश्वर उद्धार और उपहारों की दीप्ति से भरा रहता है। यह संदेश हमारे लिए भी है कि गिरावट के बीच भी परमेश्वर के आगे टिकना, उसे खोजना और उसकी पूर्णता पर भरोसा करना चाहिए।
प्रसंग का संक्षेप
यह पाठ 1 शमूएल के बाद की स्थिति में आता है, जब इस्राएली राजा बनने के उपरांत समूह ने पथभ्रष्टि की ओर रुख किया। शमूएलAddresses the people's fear and anxiety after choosing a king, reminding them that their sin has been committed, yet God remains directing their steps. The exhortation to revert to wholehearted devotion underscores the covenant relationship—dependence on Yahweh, not on outward institutions or human solutions.
मुख्य संदेश
- अपनी गलतियों के बावजूद, हमारे जीवन की दिशा परमेश्वर के पालन और उपासना में ही है।
- भय या अपराध के कारण न डरे, बल्कि अपने पूरे मन से ईश्वर की ओर वापस लौटें।
- बाहरी सुधारों से नहीं, अपितु भीतरी समर्पण से परमेश्वर की कृपा और मार्गदर्शन मिलता है।
आध्यात्मिक विचार
इस वाक्य के पीछे एक ऐसा दृष्टांत है जिसमें परमेश्वर का प्रेम और न्याय दोनों एक साथ चलते हैं। यह बताता है कि परमेश्वर के साथ चलना जोखिमों के बीच भी पथ प्रदर्शित करता है और उद्धार देता है। यह भी संकेत देता है कि सही उपासना वही है जिसमें हमारा संपूर्ण मन, आत्मा और शक्ति परमेश्वर के प्रति समर्पित हो।
अनुवादित पाठ के साथ संकल्प
“डरो मत; तुम ने यह सब बुराई तो की है, परन्तु अब यहोवा के पीछे चलने से फिर मत मुड़ना; परन्तु अपने सम्पूर्ण मन से उसकी उपासना करना;”
क्रॉस-रेफरेंसेस
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि सत्यापित आचरण, परमेश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और वर्तमान परिस्थिति में भी सही दिशा—यही जीवन की वास्तविक उद्धारक क्षमता है।
पूर्वसर्ग और सारांश
हिंदी बाइबल के पाठों में यह संदेश बार-बार आता है कि दोष स्वीकार कर पुनः उसकी ओर अग्रसर होना ही ईश्वर के राज्य का मार्ग है। शमूएल की प्रेरणा से यहूदियों को एक स्पष्ट विकल्प मिला: भय से मुक्त होकर परमेश्वर की उपासना को अपने जीवन का केंद्र बनाए रखें।
आत्म-आलोचना और व्यक्तिगत चिंतन
क्या आप भी अपने जीवन में ऐसे क्षण पाते हैं जब गलती के बाद अचानक असमंजस हो जाता है? इस वचन के अनुसार, अपने पूरे मन से परमेश्वर की ओर लौटना और उसे पूजा-उत्साह में मान देना ही सच्चे परिवर्तन की कुंजी है।
नोट: मारकंडेय समुदाय के ल्याएं हुए अलग-अलग टिप्पणीकारों के सार से यह स्वर संगठित हुआ है—मैथ्यू हेन्जी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचारों के संकलन की सुरक्षा सहित।