Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 12:1 1 शमूएल 12:2 1 शमूएल 12:3 1 शमूएल 12:4 1 शमूएल 12:5 1 शमूएल 12:6 1 शमूएल 12:7 1 शमूएल 12:8 1 शमूएल 12:9 1 शमूएल 12:10 1 शमूएल 12:11 1 शमूएल 12:12 1 शमूएल 12:13 1 शमूएल 12:14 1 शमूएल 12:15 1 शमूएल 12:16 1 शमूएल 12:17 1 शमूएल 12:18 1 शमूएल 12:19 1 शमूएल 12:20 1 शमूएल 12:21 1 शमूएल 12:22 1 शमूएल 12:23 1 शमूएल 12:24 1 शमूएल 12:25



1 शमूएल 12:8 – पाठ का परिवेश और परमेश्वर की ओर विश्वास का दृष्टिकोण
इस पद में इस्राइलियों के तीर्थ-यात्रा के पूर्वाभास के साथ एक स्मरण-आह्वान है: याकूब मिस्र गया, और तुम्हारे पूर्वजों ने यहोवा की दुहाई दी; तब यहोवा ने मूसा और हारून को भेजा, और उन्होंने तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र से निकाला, और इस स्थान में बसाया। यह पंक्तियाँ बिदाई-पूर्व संदेश के रूप में दी गई लगती हैं, ताकि यह स्पष्ट रहे कि परमेश्वर अपने चयनित लोगों के साथ क्या कर रहा है; वह मानव इतिहास के क्रम को संभालता है और अपने अनुयायियों को कर्मशील विश्वास के साथ आगे बढ़ने को प्रेरित करता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में टेका-चेतना
यह टेक यह बताती है कि परमेश्वर इतिहास के बड़े घटनाक्रम का कर्ता है—याकूब के समय से लेकर मिस्र की दासता, फिर मूसा-हारून के द्वारा उद्धार, और अंततः इस स्थान (भूमि) में निवास। स्वयं परमेश्वर पहले से योजना बनाते हैं और लोगों को उनके शब्दों और संकेतों से मार्गदर्शित करते हैं। यहाँ विश्वास का आयाम यह है कि यह व्यवस्था के समय में भी, दया और कृपा के साथ, यहोवा अपने चुने हुए लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है।
शब्दावलियाँ और चित्रण की स्पष्टता
– मिस्र: दासता और प्रताड़ना की भूमि, जहाँ से उद्धार का 필요 उभरता है।
– दुहाई: यहोवा के विरुद्ध नतीजे के संदेशों के पीछे एक आस्था-उत्थान का संकेत है; ईश्वर अपने लोगों की पुकार सुनते हैं।
– मूसा और हारून: उद्धार के उपकरण; वे परमेश्वर के दूत के रूप में विहित होकर इस्राइल को मुक्त कराते हैं।
– इस स्थान में बसाया: वाचा-सम्पन्न भूमि में प्रावधान, ग्रहण-योग्य निवास का संकेत, कि परमेश्वर की वचन-सत्यता के कारण वे स्थिर हों।
अन्य संदर्भ से प्रकाश
– यह हिदायत कि माता-पिता-पीढ़ियाँ, यथा याकूब, मिस्र के समय के स्मरण से प्रेरित हों और आने वाली पीढ़ियाँ ईश्वर की कृपा और नीतियों में विश्वास करें (उद्धार में निरंतरता)।
– एक से अधिक बार, उद्धारकर्ता-योजना के भाग के रूप में देव-आह्वान, जहाँ प्रभु ने मोशे को भेज कर वनवास से बाहर निकाला, और फिर राजधानी के भीतर निवास का अवसर दिया।
Cross-reference: निर्गम 3—14 के उद्धारक क्रिया, व्यवस्थावली 6:6-9 में शिक्षा और स्मारकीय चिह्न, तथा यशायाह 41:8-13 में गहरे विश्वास के साथ उद्धार की गारंटी।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
एहं यह पाठ यह सिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के इतिहास को देखते हुए, उद्धार-योजना के भीतर निरंतर मार्गदर्शन देता है।
HINIRV से संबंधित लघु उद्धरण
यदि किसी ने Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलनों से संक्षिप्त उद्धरण चाहते हों, तो उपलब्ध पंक्तियाँ नीचे दी जा सकती हैं:
“याकूब मिस्र में गया, और तुम्हारे पूर्वजों ने यहोवा की दुहाई दी”—यह कहन शास्त्रीय आस्था के स्मरण की गूंज है, जिसमें उद्धार की क्रमबद्धता प्रदर्शित होती है।
नोट: ऊपर के सन्दर्भों में Henry, Barnes और Clarke के विशिष्ट वाक्यों के छोटे उद्धरण उपलब्ध हो सकते हैं; पसंद के आधार पर उनसे सम्बंधित पंक्तियाँ सीधे उद्धृत की जा सकती हैं।