Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



1 शमूएल 4:15 — तत्कालीन परिदृश्य और विशिष्ट चित्रण
यह पद यह बताता है कि ऐली अठानवे वर्ष के थे और उनकी दृष्टि धुंधली पड़ गई थी, साथ ही उन्हें कुछ भी सूझ नहीं रहा था। यह पाठ भविष्यसूचक तौर पर यह संकेत करता है कि योनी-केसरियों के समय परमेश्वर के उद्धार के कार्य में नेतृत्वकर्ता का प्रभाव घट रहा था और जनसामान्य संकट के समय आध्यात्मिक नेतृत्व कमजोर पड़ गया था।
पद से उद्धारक-आत्मा और विश्वास के बारे में स्पष्ट संकेत
ऐली की वृद्धावस्था और दृष्टि का क्षीण होना एक प्रतीक है: जैसे मानव डेरावट के समय भी अपने कर्तव्य और धर्म-प्रधान मार्गदर्शन को खो देता है, ठीक उसी प्रकार यह दर्शाता है कि परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में नेतृत्व में कमी आ गई थी। यह न केवल व्यक्तिगत दुर्बलता है, बल्कि समुदाय के लिए भी चेतावनी है कि नैतिक और धार्मिक उत्कर्ष का नियमित पालन न रहने से प्रेरणा और मार्गदर्शन भी खो सकता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery का स्पष्टीकरण
अन्य सम्बद्ध पाठ
– हिब्रू या यूनानी के पुराने commentators के अनुसार, यह दृश्य नेतृत्व के क्षय की कठोर चेतावनी है, जिससे भविष्य में परमेश्वर के विरुद्ध विरोधा-भाव का उभार संभव था।
समूह-आस्था पर उपलब्ध अन्य उद्धरण (cross-references) और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण
आज के पाठ के लिए अनुप्रयोग
1 शमूएल 4:15 हमें याद दिलाता है कि बाहर के संकट चाहे कितने भी बड़े हों, तब भी आंतरिक नेतृत्व और आध्यात्मिक दृष्टि ऊँची रखी जानी चाहिए। यदि हमारे समुदाय के नेता आलस्य या आत्म-स्वार्थ से प्रेरित हों, तो भ्रष्टाचार और भय की स्थितियाँ उभरती हैं। इस तापमान पर व्यक्ति और समुदाय को चाहिए कि वे परमेश्वर के मार्गदर्शन की खोज करें, आत्म-निरीक्षण करें, और समुदायिक धारणाओं को पुनः सक्षम बनाने के लिए प्रार्थना और सम्मिलन के साथ कदम उठाएं। नए कदमों में कर्तव्यनिष्ठा, सत्य-उत्पादन, और ईमानदारी को केंद्र में रखें।
संक्षेपित समन्वय
यह पाठ बताता है कि नेतृत्व और दृष्टि क्षीण होते ही समाज में निराशा, अनिश्चितता और संकट का अवसर बढ़ता है। सुसंगत विश्वास और आज्ञापालन से पुनः मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।