Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



हिंदी बाइबल टीका: 1 शमूएल 4:8 (हिंदी IRV/HINIRV अनुवाद संदर्भ)
सीधे अर्थ की संक्षिप्त व्याख्या: इस पद में इस्राइलियों की गड़गड़ाहट भरी पुकार है कि वे कहाँ बचेंगे, क्योंकि उन्होंने कर्मों से प्रेरित होकर अपने प्रमुख देवताओं को महत्त्व दिया और उनसे सहायता चाही? यहाँ वे अपने सैनिक-समर के संकट के बीच यह मान रहे हैं कि मिथ्या देवताओं के हाथ से भी रक्षा की उम्मीद है, जो पहले मिस्र के विपत्तियों के समय दिखाई नहीं दे सकीं।
पश्चिम के संदर्भ-प्रारम्भ (पृष्ठभूमि का सार)
यह अध्याय 4 के घटनाक्रम का हिस्सा है, जहां फिलिस्तीनीय सेना के विरुद्ध इस्राइलियों की हार के पश्चात वे अपने "महाप्रतापी देवताओं"—जो वेअपने धन-सम्पन्न मूर्तिपूजा से संबद्ध समझते थे—से मदद माँगते हैं। युद्ध-पराक्रम के क्षणों में उन्होंने अपनी आस्तीन के साथ यह प्रतिज्ञा की कि देवताओं के साथ अस्थिर आश्रय लेना है, परन्तु परिणामस्वरूप प्रतिक्रिया वही रही जो मूर्तिपूजा के महत्वाकांक्षी विचारों के कारण हुई: भय, निराशा और अधुरे परिणाम।
व्याख्यात्मक बिंदु
यानी-उद्धरण और थीमैटिक सूत्र
1 शमूएल 4:8 में यह सामान्य भावना है कि लोग ऐसे देवताओं से सहायता चाहते हैं जो स्वयं भी स्वरूप-निर्विकल्प दिखते हैं, परन्तु इस्लामिक-हिंदी संदर्भ में यह स्पष्ट है कि परमेश्वर के साथ हैवान-रूपी पूजाओं से मिली मदद अस्थायी होती है।
अन्य तुलनात्मक पाठ
मूल पाठ से जुड़ी क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप व्याख्या)
संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway
कठिन परिस्थितियों में कुशलता से निर्णय लेने के लिए हमें परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना चाहिए, न कि अपने कल्पित ताकतवर देवताओं या उपायों पर। सत्य यह है कि सुरक्षा और विजय परमेश्वर के संचालन में है, चाहे प्रत्यक्ष दृश्य-लड़ाई कितनी भी कठिन क्यों न लगे।
प्यारे पाठ्य से सीख
यह पाठ हमें स्मरण दिलाता है कि विपत्ति के समय भी परमेश्वर की योजना के बाहर स्थायित्व नहीं मिलता। अगर हम अपने जीवन के हर कदम पर परमेश्वर की इच्छा को पहले रखें, तो भय के क्षणों में भी शांति मिलती है।