Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 19:1 2 राजाओं 19:2 2 राजाओं 19:3 2 राजाओं 19:4 2 राजाओं 19:5 2 राजाओं 19:6 2 राजाओं 19:7 2 राजाओं 19:8 2 राजाओं 19:9 2 राजाओं 19:10 2 राजाओं 19:11 2 राजाओं 19:12 2 राजाओं 19:13 2 राजाओं 19:14 2 राजाओं 19:15 2 राजाओं 19:16 2 राजाओं 19:17 2 राजाओं 19:18 2 राजाओं 19:19 2 राजाओं 19:20 2 राजाओं 19:21 2 राजाओं 19:22 2 राजाओं 19:23 2 राजाओं 19:24 2 राजाओं 19:25 2 राजाओं 19:26 2 राजाओं 19:27 2 राजाओं 19:28 2 राजाओं 19:29 2 राजाओं 19:30 2 राजाओं 19:31 2 राजाओं 19:32 2 राजाओं 19:33 2 राजाओं 19:34 2 राजाओं 19:35 2 राजाओं 19:36 2 राजाओं 19:37



2 राजाओं 19:19 का तत्काल संदर्भ और उसका अर्थ
घटना का संदर्भ: यह वचन असुर के हमलावर सान्द्र के आक्रमण के समय का है जब यहोवा के मुकुटधारी पेत्र के राजा अज़ Trib? (सही पाठ में यह संभवतः असुर-आक्रमण के प्रसंग से जुड़ा है) के ऊपरिजन्य संकट में प्रधान राजा यहोवा को याद कर रहा है। पंक्ति कहती है: इसलिए अब हे हमारे परमेश्वर यहोवा तू हमें उसके हाथ से बचा, कि पृथ्वी के राज्य-राज्य के लोग जान लें कि केवल तू ही यहोवा है। इसका मूल भाव यह है कि परमेश्वर ही सत्ता के सभी स्रोत हैं और उन शक्तियों के सामने भी उसकी महिमा ही अटल रहती है। यहोवा के विरुद्ध लौटने की अपेक्षा नहीं, बल्कि उसकी चरित की महिमा के सामने आत्मसमर्पण की मांग है।
ईश्वर या विश्वास के प्रति पाठ से मिलने वाले संदेश
यह वचन दृढ़ आत्म-विश्वास और विनम्र प्रार्थना का उदाहरण देता है कि परमेश्वर के विरुद्ध किसी भी शक्ति की तुलना नहीं की जा सकती। विश्वास की यह अभिव्यक्ति कहती है कि पृथ्वी के राजाओं के सामर्थ्य से अधिक शक्तिशाली वही है जो सब कुछ रचता और काटता है। केवल वही यहोवा है—यानी सच्ची सत्ता और दिव्य सामर्थ्य वही है जिसे पृथ्वी के सभी राजवंश स्वीकार करें।
महत्वपूर्ण शब्दों और रूपकों की स्पष्टता
अनुरूप क्रॉस-रेफरेंसे
- यूं ही इस पाठ में प्रायः यहूदी विश्वास-आयाम पर बल दिया गया है कि हर लड़ाई में परमेश्वर ही वीर है (उत्पत्ति 15:1; यशायाह 41:4). यशायाह 45:5 में कहा गया है कि मैं यहोवा हूँ और कोई अन्य नहीं।
- एक अन्य दृष्टिकोण से यहरूशालम के उद्धार का संकेत देता है कि परमेश्वर की महिमा पृथ्वी-भर में स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि राष्ट्र जानें कि वही एक ईश्वर है (यहोशू 22:22; देवयानी 6:4)।
आज के समय में लागू पूछताछ
वर्तमान समय में जब हम सांसारिक दबावों और असुरक्षा से घिरे रहते हैं, यह वचन स्मरण दिलाता है कि भय या आक्रामकता से नहीं, बल्कि परमेश्वर की महिमा और विश्वास से समस्याओं का समाधान होता है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम कठिन समय में भी परमेश्वर का नाम ऊँचा करें, और मान लें कि केवल वही सत्य है—वह जो हमें संकट में भी शांति देता है और हमारे भीतर आशा जगाता है।
संक्षेप निष्कर्ष
यह वचन परमेश्वर की एकात्मक सत्ता को न सिर्फ दिखाता है, बल्कि विश्वासियों को प्रोत्साहित करता है कि वे संकट के समय में भी उसी एकत्वपूर्ण परमेश्वर की सहायता माँगें। यह उद्धार के स्रोत के रूप में उसकी महिमा को मान्यता देता है और संसार के सभी राज-तंत्रों के बावजूद उसके नाम की प्रबलता को स्वीकार करता है।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के साक्ष्यों से आवश्यक सही-उद्धरणों का संक्षिप्त उपयोग सीमित रहा है; किसी भी समान रूप से उद्धृत पंक्ति के लिए उनके कार्यों से सटीक उद्धरण नीचे दिए गए स्रोत-आधार पर चिन्हित किए गए हैं जिनमें उल्लेखित है कि “पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है”।