Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 19:1 2 राजाओं 19:2 2 राजाओं 19:3 2 राजाओं 19:4 2 राजाओं 19:5 2 राजाओं 19:6 2 राजाओं 19:7 2 राजाओं 19:8 2 राजाओं 19:9 2 राजाओं 19:10 2 राजाओं 19:11 2 राजाओं 19:12 2 राजाओं 19:13 2 राजाओं 19:14 2 राजाओं 19:15 2 राजाओं 19:16 2 राजाओं 19:17 2 राजाओं 19:18 2 राजाओं 19:19 2 राजाओं 19:20 2 राजाओं 19:21 2 राजाओं 19:22 2 राजाओं 19:23 2 राजाओं 19:24 2 राजाओं 19:25 2 राजाओं 19:26 2 राजाओं 19:27 2 राजाओं 19:28 2 राजाओं 19:29 2 राजाओं 19:30 2 राजाओं 19:31 2 राजाओं 19:32 2 राजाओं 19:33 2 राजाओं 19:34 2 राजाओं 19:35 2 राजाओं 19:36 2 राजाओं 19:37



2 राजाओं 19:6 (HINIRV) — संदर्भ और स्पष्टता
यह पद असूर राजा के निन्दा-मूलक शब्दों के खिलाफ यशायाह के साथ यशोफरणी की स्थिति में आता है। सन्निहित संदर्भ में अकश-लड़ाई के बीच यहूदियों के राजा हेजब के सेनापति ने अश्शूर के आक्रमण को रोकने के लिए परमेश्वर की सहायता खोजी। यशायाह नबूमिश्रयाह से आगमन संदेश के रूप में यह कहकर आश्वस्त करते हैं कि यहोवा ने अश्शूर के दुष्कर्मों को देखा है और उसकी निन्दा का उत्तर उसी से मिलेगा। उन शब्दों में परमेश्वर की रक्षा-योजना और विश्वास की स्थिरता पर जोर है, न कि भय के आधार पर निर्णय लेने पर।
मुख्य अर्थ
यह verse कहती है कि प्रभु यह कहता है कि जो वचन तूने सुने, उनके कारण मत डर, बल्कि भरोसा रख। अश्शूर के राजा और उनके सैनिकों की धमकियाँ इकट्ठे परमेश्वर के कार्य-योजनाओं के सामने छोटी पड़ जाती हैं। नबियों के अनुसार परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के लिए लड़ता है और भय-जनित निर्णयों के बजाय साहस और दृढ़ विश्वास की मांग करता है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित आयतें (cross-references) और संक्षिप्त विचार
- भजन 56:3-4: भय आने पर भी परमेश्वर पर भरोसे का आह्वान करता है। - नीतिवचन 3:5-6: तुम्हारे दिल से प्रभु पर भरोसा रखो, अपनी समझ के अनुसार न चलो। - यशायाह 41:10: साझा सुरक्षा का वचन—मैं तुम्हारे साथ हूँ, तुम भटको मत।
ये संदर्भ अस्थायी भय के समय में भी परमेश्वर की सत्ता और मार्गदर्शन की प्रेरणा देते हैं, ताकि विश्वासी अपनेपन से काम लें।
व्यावहारिक विचार
जीवन के संकटों में हमें विशाल तर्कों के पीछे नहीं, परमेश्वर के वचन की पुष्टि पर टिकना चाहिए। भय के समय भी प्रार्थना में बस आस्था बनाये रखना, निर्णयों को आत्म-निर्भरता से नहीं, परमेश्वर की योजना के अनुसार करना। नबीय संदेशों की तरह आज भी हमारे लिए यह प्रेरणा है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ है और उनकी रक्षा कर सकता है, यदि हम भरोसा बनाए रखें।
संक्षिप्त समरी
2 राजाओं 19:6 में यशायाह द्वारा दिए गए संदेश का मूल यही है कि व्यक्त भय नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचनों पर टिके रहें। अश्शूर की धमकी चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, परमेश्वर अपने चेलों के लिए लड़ाई लडता है और ऐसी परिस्थिति में भी विश्वास की राह को केंद्रित रखे जाने की आवश्यकता है।
सूक्ष्म उद्धरण (quote-worthy)
Matthew Henry/Albert Barnes/Adam Clarke से ठीक-ठीक शब्दावली उपलब्ध नहीं है, परंतु उनके विचारों के सामान्य सार नीचे दी गए हैं: “वह तय है कि प्रभु अपने झुके हुए पुत्रों के लिए लड़ता है; भय के बजाय विश्वास की रक्षा करनी चाहिए।” उक्त विचार पूर्व-वचन-व्याख्याओं में परिलक्षित होते हैं कि नीत-हृदय बनाम भय के निर्णयों में परमेश्वर की सुरक्षा सर्वोपरि है।