Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 19:1 2 राजाओं 19:2 2 राजाओं 19:3 2 राजाओं 19:4 2 राजाओं 19:5 2 राजाओं 19:6 2 राजाओं 19:7 2 राजाओं 19:8 2 राजाओं 19:9 2 राजाओं 19:10 2 राजाओं 19:11 2 राजाओं 19:12 2 राजाओं 19:13 2 राजाओं 19:14 2 राजाओं 19:15 2 राजाओं 19:16 2 राजाओं 19:17 2 राजाओं 19:18 2 राजाओं 19:19 2 राजाओं 19:20 2 राजाओं 19:21 2 राजाओं 19:22 2 राजाओं 19:23 2 राजाओं 19:24 2 राजाओं 19:25 2 राजाओं 19:26 2 राजाओं 19:27 2 राजाओं 19:28 2 राजाओं 19:29 2 राजाओं 19:30 2 राजाओं 19:31 2 राजाओं 19:32 2 राजाओं 19:33 2 राजाओं 19:34 2 राजाओं 19:35 2 राजाओं 19:36 2 राजाओं 19:37



2 राजाओं 19:31 — सिय्योन से बचे हुए लोग
पद के तात्पर्य के अनुसार यह चौकीदार संदर्भ ईश्वरीय उद्धार और सुरक्षा की निशानी है। यरूशलेम और सिय्योन के पर्वतीय क्षेत्र के भीतर जो कुछ भी दमन के कारण हुआ था, वह प्रभु की इच्छा के अनुसार पुनः निर्भर और सुरक्षित रहेंगे। यह उद्धार यहोवा के जलन से किया जाएगा, जो उसकी पवित्रता और वचनों के प्रति निष्ठा का संकेत है।
ईश्वर का चरित्र और विश्वास की सीख
यह पद दिखाता है कि परमेश्वर अपने चुने हुओं के लिये अत्यंत सक्रिय है—वह दया, रक्षकत्व और न्याय के साथ आकर अपने संदिग्ध या दबी हुई प्रजाति को उठाते हैं। जलन यहाँ एक प्रेरक क्रिया के रूप में है: वह अपनी महिमा और सच्चाई के लिए विरोध करने वालों से रक्षा करता है और अपने पुराने वचनों के अनुसार योजनाओं को पूरा करता है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
अन्य संदर्भ들과 उनका संबल
– यशायाह 37–38 अध्याय: राजा आका के समय यरूशलेम के उद्धार के संकेत इस नzea में मिलते हैं कि परमेश्वर अपने निवास-स्थान के भीतर अधिकार रखता है।
– दाऊद की स्तुति (भजन 125): बचे रहने का आश्वासन विश्वासियों की स्थिरता और प्रभु के न्याय पर निर्भरता को प्रतिध्वनित करता है।
– प्रेरितों के कर्म 2:21-22: विश्वास और उद्धार पर ईश्वर की कृपा का सार्वभौमिक संदेश जोड़ता है कि यहोवा का काम सभी के लिए खुला है।
ए today के लिए अनुप्रयोग
उद्धरण (जहाँ उपयुक्त)
Matthew Henry (उद्धृत विचार): “The Lord will preserve his remnant and work in them for his own glory.”
Albert Barnes (संश्लेषण): “The remnant is kept by divine power, not by human strength; faithfulness in adversity becomes the seed of future restoration.”
Adam Clarke (व्याख्या): “The Lord’s zeal is shown in rescuing the remaining, for his holy name’s sake.”
छोटी Cross-reference-समझौते
– यिर्मयाह 31:7-9: उद्धार और नई आशा की घोषणा—अपने लोगों के भीतर पुनः एकत्व।
– रोम 11:5-6: गिलय से बचे हुए—ईश्वर के चुनाव और उसकी कृपा के कारण उद्धार।
– गलतफहमी से बचें: यहाँ उद्धार का अर्थ सामूहिक नहीं बल्कि दैहिक-राज्य के बाहर भी व्यक्तिगत विश्वास के उत्तराधिकारी के रूप में देखना चाहिए।
संक्षेप: यह पद यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक सतत उद्धार-कार्य कर रहा है, जिसमें बचे हुए लोग उनकी जलन और पवित्रता के कारण संरक्षित रहते हैं। यह आज भी विश्वासियों के लिए प्रभु की सुरक्षा और भविष्य के आशा की स्मृति बनकर रहता है।