2 राजाओं 19:33 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जिस मार्ग से वह आया, उसी से वह लौट भी जाएगा, और इस नगर में प्रवेश न करने पाएगा, यहोवा की यही वाणी है।

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2 राजाओं 19:33 पद-दर-पद बाइबल टीका

भावार्थ की सीधी समझ

यह वचन कहता है: जिस मार्ग से आकर वह नरसंहार या आक्रमण कर आया है, उसी मार्ग से वह वापस जाएगा; वह नगर में प्रवेश नहीं करेगा। यहोवा की यही वाणी है।

पृष्ठभूमि

2 राजा 19 में असूर का राजा सन्नाचार या असूरास्त्र उपलब्ध कराने की शक्ति के साथ यरूशलेम के आस-पास दबाव डाल रहा है। परमेश्वर के एक पतरकार ने प्रेरित होकर यह नीति बताई कि दुष्ट आक्रान्ता उसी मार्ग से लौटेगा जिससे उसने आक्रमण किया था; यह यहोवा की संरक्षण-योजना और दयालुता के साथ-साथ न्याय की गारंटी है।

व्याख्या के मुख्य बिंदु

  • यही मार्ग: आक्रमण के रास्ते से ही प्रतिशोध और न्याय का मार्ग तय है; परमेश्वर ने विश्वासयोग्य शहर के लिए सुरक्षा की दीवार बनाए रखी है।
  • कठोर दबाव के बीच भीयरूशलेम की सच्ची रक्षा परमेश्वर की है; वह काठ के गाड़े नहीं, उसकी वचनों के अनुसार क्रिया करता है।
  • प्रत्यक्ष वचन की पुष्टि: यह वचन यहोवा की सक्रियता को दर्शाता है—वह अपने लोगों के साथ है और अन्यायियों के विरुद्ध परिणाम तय करता है।

तथागत (थीमैटिक) प्वाइंट

  1. ईश्वर की संहिता में न्याय का मार्ग सामान्य से भिन्न नहीं होता; वह उसी मार्ग पर लौटने का संकेत देता है जिससे खतरा आया था।
  2. विश्वासयोग्यों के लिए सुरक्षा: परमेश्वर अपने लोगों की रक्षा के लिए मार्ग प्रशस्त करता है ताकि वे निर्गृहत रहे।

अन्य बाइबल संदर्भ और उनसे जुड़ाव

– यशायાહ 30:15-16 (जहाँ आराम और विश्राम के बदले निर्भयता और जुड़ाव की वाणी है): कठिनाई के समय भी परमेश्वर की योजना के अनुसार चलना ही वांछनीय है।

– भक्ति-आशा की दृष्टि से निर्भयता: परमेश्वर के साथ संबंध होने पर ही भय मुक्त जीवन संभव है; यह वचन उसी विश्वास को बढ़ाता है।

– अन्य स्थानों में परमेश्वर की रक्षा के मार्ग: विश्वास में रहने वाले लोग एक सुरक्षित स्थान पाते हैं, जहाँ वह अपनी क्रिया से सहायता करता है।

एक संक्षित व्यावहारिक takeaway

परखते समय हमें यह याद रखना चाहिए कि बुराई के आक्रमण के समय भी परमेश्वर वही मार्ग लौटाने का आदेश देता है जो उसने आक्रमण के समय अपनाया था—एक विश्वासयोग्य व्यक्ति के लिए सुरक्षा और शांति की दिशा वही है जो परमेश्वर की वाणी से निर्धारित होती है।

कथन-उद्धरण (आवश्यक टिप्पणियाँ)

इस पाठ के संदर्भ में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पूर्ण वाक्यों से किसी विशेष उद्धरण का शिष्ट उल्लेख केवल उपलब्ध हो तो किया गया है; यहाँ इन लेखकगण के सीधे शब्द नहीं उद्धृत किए गए, पर उनकी विचारधाराओं से प्रेरित विश्लेषण को संयुक्त रूप से समेटा गया है।

संकेतित क्रॉस-रेफरेंसेस

– यशयाह 37:34-35: परमेश्वर की बात सच होती है; वह मार्ग बनाकर सुरक्षा देता है।

– नमूना संदर्भ: भजन 91:10-11: परमेश्वर के पास सुरक्षा का आश्वासन है जब लोग उसकी सूझ-बूझ के अनुसार चलते हैं।

– यिर्मयाह 7:23: यह दायित्व है कि सुनना और पालन करना, परमेश्वर के अनुरूप जीवन बनाता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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इस कारण कि तू मुझ पर अपना क्रोध भड़काता और तेरे अभिमान की बातें मेरे कानों में पड़ी हैं; मैं तेरी नाक में अपनी नकेल डालकर और तेरे मुँह में अपना लगाम लगाकर, जिस मार्ग से तू आया है, उसी से तुझे लौटा दूँगा।

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तब अश्शूर का राजा सन्हेरीब चल दिया, और लौटकर नीनवे में रहने लगा।

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