Old Testament
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2 राजाओं 22:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उन लोगों ने मुझे त्याग कर पराये देवताओं के लिये धूप जलाया* और अपनी बनाई हुई सब वस्तुओं के द्वारा मुझे क्रोध दिलाया है, इस कारण मेरी जलजलाहट इस स्थान पर भड़केगी और फिर शान्त न होगी।
2 राजाओं 22:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 22:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 21:22 (HINIRV) »
उसने अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा को त्याग दिया, और यहोवा के मार्ग पर न चला।

निर्गमन 32:34 (HINIRV) »
अब तो तू जाकर उन लोगों को उस स्थान में ले चल जिसकी चर्चा मैंने तुझसे की थी; देख मेरा दूत तेरे आगे-आगे चलेगा। परन्तु जिस दिन मैं दण्ड देने लगूँगा उस दिन उनको इस पाप का भी दण्ड दूँगा।”

व्यवस्थाविवरण 32:15 (HINIRV) »
“परन्तु यशूरून मोटा होकर लात मारने लगा; तू मोटा और हष्ट-पुष्ट हो गया, और चर्बी से छा गया है; तब उसने अपने सृजनहार परमेश्वर को तज दिया, और अपने उद्धार चट्टान को तुच्छ जाना।
2 राजाओं 22:17 का महत्व
यह पद्य सवाल उठाता है: परमेश्वर के विरुद्ध बलपूर्वक बुरे मार्गों का अंत क्या होता है? जब यौवन-युग के बाद जब राजा योशिया के सुधार के दौरान मंदिर में खोदा गया धार्मिक अभ्यास और पवित्र विधान सामने आता है, तबCreator की नाराजगी स्पष्ट रूप से उभरती है। यह verse हमें स्मरण कराता है कि परमेश्वर के सारे हुक्म और आराधना उसकी महिमा के लिए हैं, न कि मनुष्य की कट्टरता या सामाजिक परंपराओं के अनुसार ढाली जा सकने वाली। यह कथन परमेश्वर की प्राथमिकीता और राजा की नीतियों के बीच स्पष्ट टकराव को दर्शाता है—कि भक्ति केवल धार्मिक कर्मों से नहीं, बल्कि दिल की दृढ़ता और जीवन के हर क्षेत्र में उसके प्रति निष्ठा से जानी जाती है।
पवित्र संदर्भ का मूल प्रसंग
यह पाठ यरूशलेम के बलपूर्वक समय के अंत को दर्शाता है जब यहूदा के राजा और जनता के द्वारा पहचाने गए देवताओं के लिए उनकी पूजा और मूर्तिपूजा बढ़ती गई। वे धर्म-आचरण के साथ-साथ अपनी-अपनी कलाओं और मनचाहे देवताओं की पूजा करते रहे; परिणामस्वरूप परमेश्वर की रोष उनके शहर और मंदिर पर ठहरती है। इस अध्याय में पवित्र मंदिर में पाई गई किताबों के पढ़े जाने के साथ न्याय और दया के बीच परमेश्वर की सख्ती स्पष्ट होती है, जिसमें उसकी जलजलाहट एक ठोस चेतावनी के रूप में प्रकट होती है।
मुख्य संदेश
इस verse का केन्द्रित संदेश है—“तुमने मुझे त्याग दिया है और लोगों ने दूसरे देवताओं की पूजा कराई है; इसलिए मेरी गुस्सा यहाँ भड़केगा और शांत नहीं होगा।” यह याद दिलाता है कि ईश्वर की प्रतिज्ञा-यात्रा केवल औपचारिक प्रतीकों पर निर्भर नहीं है, बल्कि हृदय की वफादारी, नैतिकता और सामाजिक-आचरण की भी यही कसौटी है। अगर लोग परमेश्वर के इन-टेक्स्ट निर्देशों से दूर चले जाएँ, तो परिणामस्वरूप उसकी न्याय की दृष्टि से कठोरता आ सकती है।
मुख्य themes और विश्लेषण
रोशनी के cross-references (संक्षेप अर्थ के साथ)
1) यशया 1:4-6 — निर्बुद्धि और पाप के कारण संरचना में टूट-फूट, ईश्वर की गहरी पीड़ा का चित्रण; यह बताता है कि कोई भी औपचारिक धार्मिक क्रिया नहीं दे सकती जब दिल से ईश्वर के विरुद्ध गलत मार्ग चलता है।
2) दानिएल 9:7-11 — परमेश्वर की परम-न्याय और दया के द्वार पर रीढ़-हिलाने वाला पाठ: कौन-सा वक्त है जब पाप को मानना और पश्चाताप करना चाहिए।
3) 2 इतिहास 34:25-26 — उसके बाद के सुधार के समय परमेश्वर के अनुसार जीवन की दिशा बदलती है; टकराव के बावजूद आस्था की बड़ी मिसाल मिलती है।
इतिहासिक और व्यक्तिगत devotional अंतर्दृष्टि
यह verse याद दिलाती है कि हमारे व्यक्तिगत जीवन में भी किसी भी प्रकार की धार्मिकता तभी प्रभावी होती है जब हम ईश्वर के सामने स्पष्ट हृदय रहते हैं और नियम-निर्देशों के साथ सचेत रहते हैं। एक सच्चा भक्ति-जीवन वही है जिसमें भगवान की इच्छा सर्वोपरि मानी जाए, चाहे सामाजिक-परंपराएँ कितनी भी प्रचलित क्यों न हों। इस पाठ से प्रेरणा लें कि खुदी-लौ को छोड़कर परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप जीवन जीना पहचाना जाए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 राजाओं 22:17 हमें चेतावनी देता है कि भक्ति का वास्तविक टेस्ट दिल की निष्ठा और कर्मों की निरंतरता है। परमेश्वर की क्रोध तब तक नहीं शांत होता जब तक जनता पश्चाताप न करे और नई राह पर न चले।
प्रश्न-चिन्ह के साथ विचार
क्या अधिकारी और संस्कार आपसी-मन से परमेश्वर के नियम के अनुरूप अनंत रहते हैं? क्या आप की व्यक्तिगत आस्था और दैनिक जीवन में एकरूपता है?
याद रखने योग्य उद्धरण (तस्वीर-टीका से):
यहाँ सीधे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिए गए हैं, किन्तु उनके विचार इस पाठ के अर्थ को स्पष्ट करने में सहायक होते हैं।