Old Testament
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2 राजाओं 22:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसने वह किया, जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है और जिस मार्ग पर उसका मूलपुरुष दाऊद चला ठीक उसी पर वह भी चला, और उससे न तो दाहिनी ओर न बाईं ओर मुड़ा।
2 राजाओं 22:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 राजाओं 22:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 5:32 (HINIRV) »
इसलिए तुम अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार करने में चौकसी करना; न तो दाहिने मुड़ना और न बाएँ।

यहोशू 1:7 (HINIRV) »
इतना हो कि तू हियाव बाँधकर और बहुत दृढ़ होकर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना; और उससे न तो दाहिने मुड़ना और न बांए, तब जहाँ-जहाँ तू जाएगा वहाँ-वहाँ तेरा काम सफल होगा।

2 राजाओं 18:3 (HINIRV) »
जैसे उसके मूलपुरुष दाऊद ने किया था जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है वैसा ही उसने भी किया।
2 राजाओं 22:2 का अर्थ और संदर्भ
यह श्लोक बाढ़ती घटनाओं के एक महत्वपूर्ण मोड़ से जुड़ा है। नहुए-राजाओं के समय बहीजख़ानी के साथ शील-जाग्रतियुक्त राजा यहोशियो ने परमेश्वर के विचार के अनुरूप काम किया, और दाऊद के मार्ग पर चलते हुए न दाहिनी ओर न बाईं ओर मुड़ा। यह दावा करता है कि वह अपने पूर्ववर्तियों के आचरण के अनुसार सत्य और स्थिर रहने के लिए प्रयासरत रहा।
केंद्रीय अर्थ
शब्द-शैली में देखें तो यह कहा गया है कि वह राजा “जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है” वही मार्ग अपनाता है—यही उसका मूल्यांकन मापदंड बना। दाऊद की नीति, वीरता और परमेश्वर के लिए दृढ़ विश्वास का परंपरागत मार्ग, वह अपनाता है और उसमें किसी दिशा-बदलाव की धृष्टता नहीं दिखती। यह एक ऐसी वापसी या पुनर्स्थापना के क्रम का चित्र है जहाँ परमेश्वर के विचार के अनुरूप शासन की स्थिरता प्रमुख उद्देश्य बनती है।
तीन प्रमुख विषय
अनुसार/passages के साथ सम्बद्ध विचार
– पुरुषार्थ और धर्मपरायणता के बारे में अन्य स्थान जहाँ कहा गया है कि राजा को यहोवा के नियम के अनुसार चलना चाहिए।
– दाऊद के मार्ग से जुड़े आदर्श, जो नीति-निर्णय में धार्मिक नैतिकता को केंद्र में रखते हैं।
– परमेश्वर के निर्देश पर चलने की प्रेरणा, जो व्यक्ति और समुदाय दोनों के लिए सुरक्षा प्रदान करती है।
व्यावहारिक विचार
हमारे लिए यह बताता है कि सफलता केवल शक्ति या अत्याचार से नहीं मापा जाता, बल्कि ईमानदारी, नैतिकता, और परमेश्वर के निर्देशों के पालन से मापी जाती है। जीवन के निर्णयों में दृष्टी-निष्ठा और जबरदस्ती के बजाय सत्य-सत्यापन अपनाने से स्थिरता मिलती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त विचार)
– यूधन के कर्मों में एक समान धारा: परमेश्वर के मार्ग पर चलना चाहिये।
– दाऊद के मार्ग का अनुकरण: नीति-निर्णय में श्रद्धा और आचरण का संयम।
– विश्वास की नैतिक पथ: संकट के बावजूद भी धर्म के मार्ग पर टिके रहना।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि सत्य और धार्मिक नैतिकता के साथ चलना ही शासन और जीवन की स्थिरता का मूल है। दाऊद के मार्ग पर अडिग रहने वाला राजा यहोशियो एक मिसाल बनकर आगे आता है कि आचार-व्यवहार में साफ़-साफ़ ईश्वर-निष्ठा अपनाने से व्यक्ति-प्रभु संबंध मजबूत होते हैं।
टिप्पणी-नोट
याद रहे: नीचे उद्धृत विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से चयनित सूक्तियों के बजाय, उनके दृष्टिकोणों के सार विचार नीचे लिए गए हैं।
सूचित उद्धरण (संक्षेप): “जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है, वही रास्ता चुनना चाहिए”—यह प्रवृत्ति उनके लेखन में बार-बार मिलता है, जिसमें नीति-निर्णय ईश्वर के मार्ग के अनुरूप बनना चाहिए।