2 राजाओं 22:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“यह पुस्तक जो मिली है, उसकी बातों के विषय तुम जाकर मेरी और प्रजा की और सब यहूदियों की ओर से यहोवा से पूछो, क्योंकि यहोवा की बड़ी ही जलजलाहट हम पर इस कारण भड़की है, कि हमारे पुरखाओं ने इस पुस्तक की बातें न मानी कि जो कुछ हमारे लिये लिखा है, उसके अनुसार करते।”

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2 राजाओं 22:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 राजाों 22:13 पर टिप्पणी – संदर्भ और अर्थ

यह पदन् वह पल दर्शाता है जब राजा जफ्ता के समय की दूरी में य़हूदा राज्य एक गहरी खोज और जागरूकता के मोड़ पर पहुँचता है। समाचार यह है कि जो पुस्तक मिली है, उसकी बातों के अनुसार हमें परमेश्वर से पूछना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर की जलजलाहट हम पर भड़की है क्योंकि हमारे पूर्वजों ने यह पुस्तक नहीं मानी। प्रेरित संदर्भ यह दिखाते हैं कि नीति-नियमों के अभाव या अनदेखी से एक समाज व्याकुल हो सकता है, और उस समय के राजा-प्रधान ने एक स्पष्ट कदम उठाकर लोकहित के लिए परमेश्वर से मार्गदर्शन माँगा।

मुख्य अर्थ

पुष्टि और जवाबदेही की मांग: यह verse यह संकेत करता है कि जहाँ इतिहास नहीं जानता, वहाँ चेतना और पाप का ज्ञान आवश्यक है। जब एक खोयी हुई या भुलायी गयी पुस्तक मिली, तो उसे लेकर समुदाय यह समझ ले कि परमेश्वर से पूछना और हृदय से आचरण करना अनिवार्य है। यह घटना यह दर्शाती है कि तब की राज व्यवस्था अपने कट्टर नियमों और कृत्यों के साथ पुनः सत्यापित करती है कि किन बंधनों का पालन नहीं किया गया और क्यों परमेश्वर की दृष्टि में समाज खरा नहीं माना गया।

कुदरती और नैतिक विषय

  • पुनः मूल्यांकन और जागरूकता: यह खोज यह दिखाती है कि धार्मिक जीवन केवल बाहरी आचरण नहीं, बल्कि आंतरिक अनुस्मरण और परमेश्वर के नियमों के अनुरूप निर्णय है।
  • पश्चात्ताप और मार्गदर्शन: जब समुदाय सचेत होता है, तब आत्मा से मार्गदर्शन माँगना, और प्रशासनिक निर्णयों को परमेश्वर की इच्छा के अनुसार ढालना उपस्थित होता है।
  • ऐतिहासिक शिक्षा: पुरखाओं के कार्यों के कारण जो नुकसान हुआ, उसका स्मरण कर के वर्तमान पीढ़ी सावधानी से आगे बढ़ती है।

संलग्न विचारधारा (Cross-reference)

1) दाऊद की नीति-निर्णयों के संदर्भ में पश्चात्ताप और शिकायत: यह प्रकरण दिखाता है कि परमेश्वर के नियमों से विरुद्ध चलने पर समाज में उथल-पुथल होती है, और लोक-स्तर पर पुकार उठती है कि परमेश्वर की इच्छा पूछी जाए।

2) पुरातन ग्रंथों की खोज और नवीनीकरण: पुराने लेखों की पुनः प्राप्ति से नीति-निर्णयों में स्पष्टता आती है, और समुदाय परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार चलने का संकल्प लेता है।

3) न्याय और दया का संतुलन: नीतियों की पुनः जाँच में न्याय की दिशा सुनिश्चित होती है, परन्तु दया के साथ भी परमेश्वर की महिमा दिखाई देती है।

आदि बातें – एक व्यवहारिक विवेक

इस verse के अनुसार, जब पवित्र ग्रंथों से मार्गदर्शन मिलना संभव हो, तब उत्साहित होकर उस मार्ग पर चलना चाहिए। यह केवल कानूनी पालन नहीं, बल्कि परमेश्वर के समपूर्ति-चिन्तन की ओर एक नयी चेतना है। प्रजा के लिए यह भी सीख है कि धार्मिक जिम्मेदारी के साथ राज-नीति और सामाजिक निर्णयों में परमेश्वर की इच्छा को प्रमुख माना जाए।

संक्षिप्त निष्कर्ष

जो पुस्तक मिली है, वह स्मरण कराती है कि परमेश्वर की मुख दिखाई जाने पर हमें उसी दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। पूछना, देखना और परिणामस्वरूप आचरण करना—यही सही राज्य-जीवन का मार्ग है और यही उस वक्त के लिए भी मार्गदर्शक बना।

टिप्पणी का संक्षेप

यहाँ प्रमुख विचार वही हैं: पुनर्संयोजन, न्याय-निर्णय में सत्यापन, और परमेश्वर से मार्गदर्शन।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 राजाओं 22:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और यह भी देखकर कि इसकी सब भूमि गन्धक और लोन से भर गई है, और यहाँ तक जल गई है कि इसमें न कुछ बोया जाता, और न कुछ जम सकता, और न घास उगती है, वरन् सदोम और गमोरा, अदमा और सबोयीम के समान हो गया है जिन्हें यहोवा ने अपने कोप और जलजलाहट में उलट दिया था;

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उस समय मेरा कोप इन पर भड़केगा, और मैं भी इन्हें त्याग कर इनसे अपना मुँह छिपा लूँगा, और ये आहार हो जाएँगे; और बहुत सी विपत्तियाँ और क्लेश इन पर आ पड़ेंगे, यहाँ तक कि ये उस समय कहेंगे, 'क्या ये विपत्तियाँ हम पर इस कारण तो नहीं आ पड़ीं, क्योंकि हमारा परमेश्‍वर हमारे मध्य में नहीं रहा?'

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तू उनको दण्डवत् न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्‍वर यहोवा जलन रखने वाला परमेश्‍वर हूँ, और जो मुझसे बैर रखते हैं, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूँ,

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