Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 राजाओं 22:15 बाइबल पद की व्याख्या
2 राजाओं 22:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसने उनसे कहा, “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यह कहता है, कि जिस पुरुष ने तुम को मेरे पास भेजा, उससे यह कहो,
2 राजाओं 22:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 राजाओं 22:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

2 राजाओं 1:16 (HINIRV) »
और उससे कहा, “यहोवा यह कहता है, 'तूने तो एक्रोन के बाल-जबूब देवता से पूछने को दूत भेजे थे तो क्या इस्राएल में कोई परमेश्वर नहीं कि जिससे तू पूछ सके? इस कारण तू जिस पलंग पर पड़ा है, उस पर से कभी न उठेगा, परन्तु मर ही जाएगा।'”

2 राजाओं 1:6 (HINIRV) »
उन्होंने उससे कहा, “एक मनुष्य हम से मिलने को आया, और कहा कि, 'जिस राजा ने तुम को भेजा उसके पास लौटकर कहो, यहोवा यह कहता है, कि क्या इस्राएल में कोई परमेश्वर नहीं जो तू एक्रोन के बाल-जबूब देवता से पूछने को भेजता है? इस कारण जिस पलंग पर तू पड़ा है, उस पर से कभी न उठेगा, परन्तु मर ही जाएगा।'”

यिर्मयाह 23:28 (HINIRV) »
यदि किसी भविष्यद्वक्ता ने स्वप्न देखा हो, तो वह उसे बताए, परन्तु जिस किसी ने मेरा वचन सुना हो तो वह मेरा वचन सच्चाई से सुनाए। यहोवा की यह वाणी है, कहाँ भूसा और कहाँ गेहूँ?
क्यों यह वाक्य महत्त्वपूर्ण है
2 राजाओं 22:15 में यह संदेश प्रेरक है कि परमेश्वर के पदचिह्नों के अनुरूप चलने की बालकृति से ही वास्तविक मार्गदर्शन मिलता है। राजा जोआश ने बहीखाते की किताब से यहूदियों के लिए एक आध्यात्मिक पुनर्जागरण की संभावना देखी, और परमेश्वर ने उनसे कहा कि वह जो संदेश आया है, उसे ठेस न पहुँचे—यानी परमेश्वर की बात को सही तरीके से समझना और मानना आवश्यक है। यह वाक्य यह दर्शाता है कि ईश्वर अपने चुने हुए जनों से संवाद चाहता है और उनकी उपलब्धियों या निर्भरता के बावजूद भी वे उसकी योजनाओं में जुड़ाव रखें।
परिप्रेक्ष्य और मूल संदर्भ
यह पाठ बायबल के एक प्रमुख मोड़ पर आता है जब यहूदा राजा नेहेमीया या अन्य शासक नहीं, बल्कि एक सामान्य व्यक्तित्व के अलावा एक संदेशवाहक से बात की—जो उनसे आया था का मतलब है कि संदेश स्वर्गीय स्रोत से है।original context: यहूदियों के समय में राजा एक विधीय-संरचना के बीच थे, और यह संदेश एक दायित्व की याद दिलाता है—कि जो संदेश परमेश्वर के दूत के माध्यम से पहुँचे, उसे सावधानीपूर्वक ग्रहण किया जाए और उसका पालन किया जाए।
मुख्य संदेश
इस verse का मूल संदेश है कि परमेश्वर अपने लोगों से स्पष्ट और सुसंगत मार्गदर्शन चाहता है। जो कोई उसे भेजे, उसके संदेश को अधूरा न छोड़ें; बल्कि उसे सच मानकर और पूरी तरह पालन कर के आगे बढ़ें। यह भी दिखता है कि ईश्वर अपने साक्ष्यों के साथ जुड़ने के लिए तत्पर है—जहाँ सत्य के साथ ईमानदारी और दयालुता का संयोजन हो, वहाँ परमेश्वर की सहायता मिलती है।
पवित्र ग्रंथ के साथ/themes
संदर्भ-चर्चा (cross-references)
1) इस्रायल-युग में देवता के दूत के संदेश को मानना: यह उल्लेख एक सामान्य संदेशवाहक के उचित मान-समझ के बारे में याद दिलाता है।
2) प्रभु के मार्गदर्शन को मानना: यह कहानी एक प्रशिक्षक की तरह है जो नीति-निर्देश देता है कि अपने जीवन के निर्णयों में प्रत्यक्ष परमेश्वर के निर्देशों को प्राथमिकता दें।
3) आध्यात्मिक उत्तरदायित्व: संदेश मानना और उसका पालन करना व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर आशीर्वाद को निमंत्रण देता है।
प्रेरक विचार
आप अपने जीवन के हर निर्णय में परमेश्वर के सन्देश को पहली प्राथमिकता दें। जब आप प्रार्थना में स्पष्ट निर्देश पाते हैं, तब उसे तड़प कर न छोड़ें, बल्कि विश्वास से अपनाएं और लागू करें। यह verse हमें याद दिलाता है कि ईश्वर अपने लोगों से संवाद बनाकर उनके जीवन को दिशा देते हैं—बस आवश्यक है कि हम सुनें और विश्वासपूर्वक कदम बढ़ाएं।
आखिरी प्रवचन
इस पाठ से एक साधारण, पर गहरी सीख मिलती है: जब परमेश्वर अपने सेवकों के पास आता है, तो उनका उत्तर निस्वार्थ, बहुप्रभु और पूर्ण होना चाहिए। संदेश की शुद्धता और विनम्रता से ग्रहण किए गए निर्देश जीवन का असली मार्ग बनाते हैं।