Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 13:1 प्रेरितों के काम 13:2 प्रेरितों के काम 13:3 प्रेरितों के काम 13:4 प्रेरितों के काम 13:5 प्रेरितों के काम 13:6 प्रेरितों के काम 13:7 प्रेरितों के काम 13:8 प्रेरितों के काम 13:9 प्रेरितों के काम 13:10 प्रेरितों के काम 13:11 प्रेरितों के काम 13:12 प्रेरितों के काम 13:13 प्रेरितों के काम 13:14 प्रेरितों के काम 13:15 प्रेरितों के काम 13:16 प्रेरितों के काम 13:17 प्रेरितों के काम 13:18 प्रेरितों के काम 13:19 प्रेरितों के काम 13:20 प्रेरितों के काम 13:21 प्रेरितों के काम 13:22 प्रेरितों के काम 13:23 प्रेरितों के काम 13:24 प्रेरितों के काम 13:25 प्रेरितों के काम 13:26 प्रेरितों के काम 13:27 प्रेरितों के काम 13:28 प्रेरितों के काम 13:29 प्रेरितों के काम 13:30 प्रेरितों के काम 13:31 प्रेरितों के काम 13:32 प्रेरितों के काम 13:33 प्रेरितों के काम 13:34 प्रेरितों के काम 13:35 प्रेरितों के काम 13:36 प्रेरितों के काम 13:37 प्रेरितों के काम 13:38 प्रेरितों के काम 13:39 प्रेरितों के काम 13:40 प्रेरितों के काम 13:41 प्रेरितों के काम 13:42 प्रेरितों के काम 13:43 प्रेरितों के काम 13:44 प्रेरितों के काम 13:45 प्रेरितों के काम 13:46 प्रेरितों के काम 13:47 प्रेरितों के काम 13:48 प्रेरितों के काम 13:49 प्रेरितों के काम 13:50 प्रेरितों के काम 13:51 प्रेरितों के काम 13:52



प्रेरितों के काम 13:36 — दाऊद के समय की सेवा और मृत्यु का पाठ
मुख्य निष्कर्ष: पतरस और प्रेरितों के समूह के संदर्भ में दाऊद की मृत्यु और सर्वस्व से समाप्ति हमें यह सिखाते हैं कि परमेश्वर के cynllun में जीवित प्रतिनिधित्व उसकी योजना के अनुसार समय-समय पर परिवर्तनशील है; नयी प्रतिज्ञा में यीशु मसीह की ζωή और मृत्यु हमारे लिए परमेश्वर की सतत वचनबद्धता का मूर्त प्रमाण है।
साहित्यिक संदर्भ और पाठ की रचना
कथन में दाऊद की मृत्यु का उल्लेख प्रेरितों के काम 13:36 के संदर्भ में किया गया है ताकि यह दर्शाया जा सके कि पुराने क्रम के नेताओं की मृत्यु के बाद भी परमेश्वर की योजना पहले से तय थी। यह उद्धृत वाक्य नायिका के रूप में दाऊद के उत्तराधिकार और उनकी स्मृति को स्थिर बनाता है, और साथ ही बतलाता है कि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार समय पर एक नवीन मार्ग खुलता है—यानी यीशु मसीह का उद्धारकार्य। यह तुलना हमें यह भी सिखाती है कि पुरानी व्यवस्था में जो दायित्व निभाए गए, वे नई व्यवस्था में पूरा होने के संकेत हैं।
धर्मशास्त्रीय महत्व
इस पद में दाऊद का नाम यह दर्शाने के लिए लिया गया है कि वह परमेश्वर की इच्छा के अनुसार अपनी मंजिल पर पहुँचा। साथ ही, यह बताता है कि केवल दाऊद की मृत्यु ही नहीं, बल्कि उस पूर्वज-वंश की गिरावट भी एक मसीही आशा की नींव रखती है—यही आशा यीशु में नया जीवन बनकर प्रकट होती है। प्रेरितों के भाषण में यह तुलना नई प्रतिज्ञा के विश्वासी समुदाय के लिए एक प्रेरणा है कि वे भी मृत्यु-परांत की आशंका के बावजूद विश्वास-यात्रा में दृढ़ रहें, क्योंकि परमेश्वर की योजना इन सभी समयों को एक रूप में मिलाती है।
पवित्रशास्त्र की अन्य मान्य संरचनाओं से संबंध
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि पुराने समय में हुए घटनाक्रम भी नई चक्रवात में एक दिशा बनाते हैं; परमेश्वर की योजना समय के प्रवाह पर टिके रहते हुए आगे बढ़ती है।
निर्णायक प्रश्न और चिंतन के बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप में शब्द)
- नीतियाँ और इतिहास के संदर्भ: न्याय. 2:10; 1 राजा 2:10. ये दोनों उक्ति दर्शाती हैं कि पुराने नेताओं के समय के त्रुटिपूर्ण अवतारण भी परमेश्वर के बड़े उद्देश्य के अंतर्गत आते हैं।
- एक दोहराव की दिशा: मसीह की आयु में परिवर्तन—यानी पुराने व्यवस्था के नायकों के अंत के बाद नया उद्धारक प्रकट होता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पवित्र पाठ हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की योजना समय के साथ गतिशील होती है, परन्तु उसकी सुरक्षा और प्रतिज्ञा अटल रहती है। दाऊद के जीवन के अंत के साथ भी यह संकेत देता है कि नया उद्धारक—येशु मसीह—आकर पुरानी उदासी-युग की थकान को दूर करेगा। हमारी समीक्षा में यह संकेत मिलता है कि विश्वास के पथ पर आगे बढ़ना है, जबकि पुरानी स्मृतियाँ और इतिहास एक नई आकाशगामी प्रतिज्ञा के लिए मंच बनाते हैं।
नोट: नीचे के पंक्तिबद्ध उद्धरण केवल संदर्भ हेतु हैं; पूर्ण पद-टेक्स्ट यहाँ नहीं दिया गया है।
अनुदेशन: “केवल परमेश्वर की इच्छा के अनुसार समय-समय पर आगे बढ़ना ही सत्य है, क्योंकि वही अटल नीतियों का सम्यक संरक्षक है।” — एक समनुभवजन्य सार