Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 13:1 प्रेरितों के काम 13:2 प्रेरितों के काम 13:3 प्रेरितों के काम 13:4 प्रेरितों के काम 13:5 प्रेरितों के काम 13:6 प्रेरितों के काम 13:7 प्रेरितों के काम 13:8 प्रेरितों के काम 13:9 प्रेरितों के काम 13:10 प्रेरितों के काम 13:11 प्रेरितों के काम 13:12 प्रेरितों के काम 13:13 प्रेरितों के काम 13:14 प्रेरितों के काम 13:15 प्रेरितों के काम 13:16 प्रेरितों के काम 13:17 प्रेरितों के काम 13:18 प्रेरितों के काम 13:19 प्रेरितों के काम 13:20 प्रेरितों के काम 13:21 प्रेरितों के काम 13:22 प्रेरितों के काम 13:23 प्रेरितों के काम 13:24 प्रेरितों के काम 13:25 प्रेरितों के काम 13:26 प्रेरितों के काम 13:27 प्रेरितों के काम 13:28 प्रेरितों के काम 13:29 प्रेरितों के काम 13:30 प्रेरितों के काम 13:31 प्रेरितों के काम 13:32 प्रेरितों के काम 13:33 प्रेरितों के काम 13:34 प्रेरितों के काम 13:35 प्रेरितों के काम 13:36 प्रेरितों के काम 13:37 प्रेरितों के काम 13:38 प्रेरितों के काम 13:39 प्रेरितों के काम 13:40 प्रेरितों के काम 13:41 प्रेरितों के काम 13:42 प्रेरितों के काम 13:43 प्रेरितों के काम 13:44 प्रेरितों के काम 13:45 प्रेरितों के काम 13:46 प्रेरितों के काम 13:47 प्रेरितों के काम 13:48 प्रेरितों के काम 13:49 प्रेरितों के काम 13:50 प्रेरितों के काम 13:51 प्रेरितों के काम 13:52



प्रेरितों के काम 13:25 – यूहन्ना दूत की भूमिका और उद्धारकर्ता के आगमन की ओर संकेत
मुख्य interpretive बिंदु: यहाँ प्रेरित पौलूस के प्रचार-कार्य के बीच यूहन्ना बैप्टीस्ट के उत्तरदायित्व की पंक्ति स्पष्ट हो उठती है: वह अपने स्थान की साधारणता और क्रिया-धर्म से हटकर यह बताता है कि आने वाला एक महान उद्धारकर्ता है, जो मुझसे बड़ा है। यह पुष्टि करता है कि जॉन के मिशन का उद्देश्य यीशु के प्रथम आगमन के गणनात्मक पूर्वसर्ग के रूप में स्थापित होना है।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
यह पदकुटुम्ब प्रेरितों के आरम्भिक चरण में प्रकट होता है, जहाँ यूहन्ना का साक्षात्कार और उनकी भूमिका को स्पष्ट किया गया है। यूहन्ना का उत्तर, “मैं वह नहीं!”—और फिर “मेरे बाद एक आनेवाला है”—भविष्य के प्रभु के लिए एक आधिकारिक स्वागत-मुखरता है। यह संदर्भ हमें बताता है कि दाऊद के राजवंश के प्रचार के बजाय, उद्धारक के आगमन की तैयारी कैसी सभी प्रचारित घटनाओं के पीछे प्रेरित होती है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
यूहन्ना की यह घोषणा कि वह “वह नहीं” है, अपने आप में एक ठोस विनम्रता का प्रमाण है। यह दर्शाती है कि परमेश्वर के योजना में वास्तविक महिमा किसकी है: मसीह की। इस पाठ में विभिन्न तत्व मिलकर एक केंद्रीय सत्य को पुष्ट करते हैं—नया नियम मसीह के आगमन की गवाही देता है, जो जन्म-भूमिका से आगे बढ़कर उद्धार का मार्ग खोलता है। इसका परिणाम यह है कि विश्वासी अपनी अपेक्षाओं को सही दिशा में केंद्रित रखें।
पवित्र शास्त्रों के साथ संबंध (Cross-References)
संकेत यह है कि जॉन का मौन और सरल कहन, यीशु के आगमन के लिए एक स्पष्ट पथ प्रशस्त करते हैं—जो वीर-शौर्य या सत्ता-प्रदर्शन से नहीं, बल्कि उद्धार के संदेश से पहचाना जाएगा।
स्वीकार्य प्रश्न (Reflection questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यूहन्ना के कथन में एक पवित्र क्षण है: वह स्पष्ट करता है कि उसकी भूमिका सीमित है, पर भगवान की योजना का केंद्र यीशु है। प्रेरितों के कार्य 13:25 उस तैयारी-कार्य का स्मरण कराते हैं जो मसीह के आने का पथ बनाती है। यीशु के आगमन के लिए उत्साह और विश्वास का एक ही मूल-मंत्र है—उसकी महानता और हमारी निर्भरता।
मेरे वचन का संक्षिप्त पुनरावलोकन: यह पद हमें याद दिलाता है कि उद्धारक के आने की घोषणा परमेश्वर की विश्व-योजना का अभिन्न भाग है, और हमारी सामर्थ्य केवल उसकी महिमा बढ़ाने में है, न कि अपनी गर्व-भरी महत्ता में।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Public-domain commentators)
मार्थयू महन के अनुसार, यूहन्ना की यह भूमिका विनम्रता और नम्रता से भरी है; वह यीशु के सृजनात्मक अधिकार को प्रकट करने से पहले अपनी भूमिका की सीमाओं को स्वीकार करता है।
एल्बर्ट बार्न्स ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि नारों की जगह सच्ची कबूल-निष्ठा और प्रत्यक्ष सेवा, ईश्वर के योजनात्मक ऐतिहासिक क्रम में सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।
एडम क्लार्क के अनुसार, यह उद्घोषणा हमें यह दिखाती है कि पुराने नियम के प्रतीक्षा-काल की समाप्ति एक नए विश्वास-युग की शुरुआत है, जहाँ यीशु ही वह है जिससे सभी चीजें जुड़ती हैं।