Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 14:1 प्रेरितों के काम 14:2 प्रेरितों के काम 14:3 प्रेरितों के काम 14:4 प्रेरितों के काम 14:5 प्रेरितों के काम 14:6 प्रेरितों के काम 14:7 प्रेरितों के काम 14:8 प्रेरितों के काम 14:9 प्रेरितों के काम 14:10 प्रेरितों के काम 14:11 प्रेरितों के काम 14:12 प्रेरितों के काम 14:13 प्रेरितों के काम 14:14 प्रेरितों के काम 14:15 प्रेरितों के काम 14:16 प्रेरितों के काम 14:17 प्रेरितों के काम 14:18 प्रेरितों के काम 14:19 प्रेरितों के काम 14:20 प्रेरितों के काम 14:21 प्रेरितों के काम 14:22 प्रेरितों के काम 14:23 प्रेरितों के काम 14:24 प्रेरितों के काम 14:25 प्रेरितों के काम 14:26 प्रेरितों के काम 14:27 प्रेरितों के काम 14:28



प्रेरितों के काम 14:21 – प्रमुख व्याख्या
यह पद पवित्र प्रचार की सफलता और कमज़ोर-से-सीमित शुरुआत से विश्वव्यापी मिशन की दिशा में तत्काल कदम उठाने की प्रेरणा देता है। पथरीले परिवेश में भी शिष्य निर्माण और बहुदलीय नगरों में सुसमाचार का प्रचार किया जाना दिखाता है कि प्रेरितों ने स्थानीय चर्च की रीढ़ बनायीं—चेले बनाकर और समुदाय में लौटकर पुनः प्रेरितों के उद्देश्य को सुदृढ़ किया।
1) साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी context)
इस वाक्य में पवित्र पत्र प्रेरितों के काम के लूस्त्रा, इकुनिया, और अन्ताकिया नगरों में प्रचार-कार्य की निरंतरता स्पष्ट है। यह वेगपूर्ण मिसनरी यात्रा का निष्कर्ष नहीं, बल्कि पुनः स्थापन और दैनंदिन discipleship की चेन है। लौटना, स्थानीय चर्चों के साथ पुनः सहकार्य, और आगे की योजना बनाना—ये तीनों तत्व मिलकर निर्भर-दर्शक समुदाय बनाते हैं।
2) theology – धार्मिक महत्व
यहाँ प्रकटन होता है कि सुसमाचार का प्रभाव केवल एक बार की धक्का नहीं, बल्कि स्थापित, सतत परिवर्तन का आरम्भ है। चेले बनना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति यीशु के अनुयायी बनकर समुदाय में भागीदारी लेते हैं, चर्च की संरचना और प्रेम-कार्य का हिस्सा बनते हैं। यह भी दर्शाता है कि जन-समुदायों के बीच, स्थान-परिवर्तन के बावजूद, प्रेरितों का दृष्टिकोण समान रहता है: संदेश की उद्घोषणा, चेला बनाना, और प्रेरित समुदाय में पुनः प्रवेश।
3) प्रचलित टिप्पणियाँ और स्रोत-समेकन
यहां अपेक्षित पूर्व-उद्धरण से प्रेरित चर्च-टिप्पणियाँ—जिनमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की पंक्तियाँ भीतर-भीतर समाहित होती हैं—उनमें से एक सार यह है कि हर नगर में प्रचार का उदय और पाठक-समुदाय की वृद्धि, परमेश्वर के निर्देश और प्रेरितों के समर्पण की संयुक्त क्रिया है। ध्यान दें: नीचे उद्धरण के रूप में केवल उनके विशिष्ट वाक्यों के छोटे अंश दिए जाते हैं यदि उपलब्ध हों।
4) संदर्भ-आधार (Cross-references) – संक्षेप अर्थ के साथ
संक्षेप में यह तीनों संदर्भ बताते हैं कि प्रेषितों का कार्य समस्त समुदाय के लिए एक सतत शिक्षा और सहभागिता का मार्ग बनाता है।
5) चिंतन के प्रश्न
6) संक्षिप्त निष्कर्ष
14:21 इस बात का प्रमाण है कि प्रचारक यात्रा के साथ-साथ स्थानीय चर्च-निर्माण, सदस्य-शिक्षा, और स्थिर पुनर्मुल्यांकन जरूरी है। प्रेरितों ने लुस्त्रा, इकुनियुम, और अन्ताकिया लौटकर उसी मिशन को आगे बढ़ाते हुए स्पष्ट शिक्षा दी कि सतत चेले बनाना और समुदाय में संतुलित प्रवर्तन ही ईश्वर के उद्देश्य को पूरा कर सकता है।
खास उद्धरण (यदि उपलब्ध):
“...और बहुत से चेले बनाकर, लुस्त्रा और इकुनियुम और अन्ताकिया को लौट आए।”