Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 14:1 प्रेरितों के काम 14:2 प्रेरितों के काम 14:3 प्रेरितों के काम 14:4 प्रेरितों के काम 14:5 प्रेरितों के काम 14:6 प्रेरितों के काम 14:7 प्रेरितों के काम 14:8 प्रेरितों के काम 14:9 प्रेरितों के काम 14:10 प्रेरितों के काम 14:11 प्रेरितों के काम 14:12 प्रेरितों के काम 14:13 प्रेरितों के काम 14:14 प्रेरितों के काम 14:15 प्रेरितों के काम 14:16 प्रेरितों के काम 14:17 प्रेरितों के काम 14:18 प्रेरितों के काम 14:19 प्रेरितों के काम 14:20 प्रेरितों के काम 14:21 प्रेरितों के काम 14:22 प्रेरितों के काम 14:23 प्रेरितों के काम 14:24 प्रेरितों के काम 14:25 प्रेरितों के काम 14:26 प्रेरितों के काम 14:27 प्रेरितों के काम 14:28



पाठ का संक्षेप: प्रेरितों के काम 14:5 - एक चुनौतिपूर्ण स्थिति
यह पदोलन प्रेरितों के जीवन के कठिन दौर को दर्शाता है, जब बप्तिस्मा और क्रूस की राह पर ईश्वरीय मिशन भी अनेक बाधाओं से घिर गया था। पवित्र प्रचारक नीतियों से नहीं डरते, परन्तु वे विरोध और शत्रुताओं के बावजूद सच्चाई की ओर बढ़ते रहे। प्रेरितों के दौर में राष्ट्र-जाति के आधार पर उभरते विवाद उनके संदेश की आत्मा को परखते हैं, पर उनके कारावास, पत्थराव या अपमान का उद्देश्य मात्र भय पैदा करना नहीं, बल्कि ईश्वर के कार्य को रोकना है।
पद का पाठ (14:5) — संदर्भ सहित
पद का भाव यह दर्शाता है कि अन्यजाति और यहूदी—दोनों पक्षों ने बिना किसी आत्मबल के प्रेरितों के विरुद्ध एकजुट होकर उनके सरदारों के साथ मिलकर हमला किया और उन्हें पत्थर मारने के लिये दौड़ाया। यह दृश्य एक तीव्र दुष्प्रवृत्ति का प्रतीक है, जहाँ लोग अपने विरोध को ईश्वर के कार्य के विरुद्ध एक-organized कार्रवाई के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस घटना से स्पष्ट होता है कि जब भी ईश्वर का कार्य बुराई के खिलाफ बढ़ता है, तो शास्त्र-प्रभावी लोग विरोध में उठते हैं। परन्तु सच्चे प्रेम और विश्वास के साथ मिशन आगे बढ़ता है, क्योंकि ईश्वर अपने चयनित लोगों को सुरक्षा देता है और उनकी आस्था को परखता नहीं, बल्कि उन्हें दृढ़ बनाता है। प्रेरितों की हिम्मत इन बातों में परिलक्षित होती है: वे अपने दुष्कर्म के बावजूद यहूदियों और अन्यजाति के बीच एकता नहीं टूटने देते और प्रभु के संदेश को बिना डरे फैलाते रहते हैं।
विश्वास-संबंधी तुलना
1) मत्ती 23:37 में येसु भी यह दर्शाते हैं कि मनुष्य के राष्ट्र-व्यवहार की सीमाओं से ऊपर होकर प्रभु का प्रेम सभी के लिये खुला है, और यही प्रेरितों के लिए प्रेरणा बनती है।
2) 2 कुरिन्थी 11:26 में प्रेरित पौलुस ने अपनी विपत्ति की सूची दी, जो दिखाती है कि ईश्वर के कार्य के लिए विषम परिस्थाओं के बीच भी धैर्य और विश्वास कितना आवश्यक है।
3) 高频ां 4:8-9 में विश्वासियों को याद दिलाया गया है कि प्रतिकूल परिस्थितियाँ भी परमेश्वर के साक्ष्य को उजागर करती हैं, जब वे उसकी सहायता और प्रेरणा पर टिके रहते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षिप्त स्पष्ट संदर्भ)
ईश्वर के चर्च के सामने आने वाले विरोध के बारे में संदर्भ प्रमुख हैं: मत्ती 23:37 (येसु की चिंता), 2 कुरिन्थी 11:26 (कठिनाइयों में धैर्य), और फेरू 4:8-9 (आस्थाओं की दृढ़ता)। इन दृष्ठांतों के साथ प्रेरितों के मिशन का समन्वय यह दिखाता है कि संकट भी प्रकाश को और विकसित करता है जब आत्मा की गति से चलना पड़े।
संक्षेप निष्कर्ष
प्रेरितों के काम 14:5 हमें सिखाता है कि ईश्वर के कार्य के सामने विरोध आना स्वाभाविक है, परन्तु धर्म-सत्य के लिए किए गए प्रयासों में दृढ़ विश्वास और प्रेम के साथ चलना चाहिए। कठिन परिस्थितियाँ कभी भी मिशन को समाप्त नहीं कर सकतीं; वे उसे परिक्षण देकर और अधिक प्रेरणा दे सकती हैं ताकि संसार में प्रभु की महिमा बढ़े।
पूर्व-जनक उद्धरण (संदर्भित विचार)
यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पूर्ण उद्धरण नहीं बल्कि संक्षिप्त, आवश्यक प्रवचनों के संदर्भ दिए जा रहे हैं। अगर चाहिए हो, तो मैं उनके विशिष्ट वाक्यों को संक्षेप में उद्धृत कर सकता हूँ:
कृपया ध्यान दें: यदि आप चाहें तो मैं इन commentators के सीधे संक्षिप्त विचारों को हिंदी में पार नहीं कर सकता, परन्तु उनके मुख्य बिंदु पर आधारित प्रेरणात्मक सार दे सकता हूँ।