Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 16:1 निर्गमन 16:2 निर्गमन 16:3 निर्गमन 16:4 निर्गमन 16:5 निर्गमन 16:6 निर्गमन 16:7 निर्गमन 16:8 निर्गमन 16:9 निर्गमन 16:10 निर्गमन 16:11 निर्गमन 16:12 निर्गमन 16:13 निर्गमन 16:14 निर्गमन 16:15 निर्गमन 16:16 निर्गमन 16:17 निर्गमन 16:18 निर्गमन 16:19 निर्गमन 16:20 निर्गमन 16:21 निर्गमन 16:22 निर्गमन 16:23 निर्गमन 16:24 निर्गमन 16:25 निर्गमन 16:26 निर्गमन 16:27 निर्गमन 16:28 निर्गमन 16:29 निर्गमन 16:30 निर्गमन 16:31 निर्गमन 16:32 निर्गमन 16:33 निर्गमन 16:34 निर्गमन 16:35 निर्गमन 16:36



निर्गमन 16:19 — तत्काल संदर्भ और विचार
इस वचन में मूसा ने Israelites को निर्देश दिया कि “कोई इसमें से कुछ सवेरे तक न रख छोड़े।” यह निरंतर आश्वस्त करता है कि परमेश्वर की व्यवस्था में दैनिक-आहार का एक नियत क्रम है, और आकाश से मिलने वाली रोटी के वितरण में भण्डारण के बजाय प्रतिदिन भरोसा रखना चाहिए। इस संदर्भ में ईश्वर ने उनके अनुभव को परीक्षण और विश्वास के अवसर के रूप में प्रस्तुत किया।
ईश्वर के चरित्र और विश्वास का संदेश
यह निर्देशन दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए विश्वास-आधारित जीवन बनाना चाहते हैं, जहाँ कल की चिंता बजाय आज के दैनंदिन भरोसे के साथ जीना सिखाया जाए। जब लोग भण्डार जमा लेते हैं, तो यह दिखाता है कि वे भविष्य की चिंता में ईश्वर की चिता को भूल जाते हैं। परन्तु भक्तों को today-by-day faith पर टिकना सिखाया गया है।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery का स्पष्टीकरण
“सवेरे तक न रख छोड़ना”—यह तात्पर्य देता है कि परमेश्वर की दया हर दिन नए रूप में मिलती है। यह घड़ी-समय पर मिलने वाले अधिकार का संकेत है, और लाचारपन पर नहीं, बल्कि निर्भरता और आज के दिन के लिए विशिष्ट आशीर्वाद के अनुरूप है।
संबंधित आयतें
संवादात्मक प्रवाह में ऊपर के संदर्भ दिखाते हैं कि कैसे प्रभु की आपूर्ति और आज की जरूरत के बीच संतुलन आवश्यक है, ताकि विश्वास मजबूत रहे और नम्रता बनी रहे।
पूर्ववर्ती टिप्पणीकों के संयोजन से निष्कर्ष
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सरल कथनों से प्रेरित विचार इस पंक्ति में साझा करता है कि परमेश्वर दिन-प्रतिदिन प्रत्यक्ष आशीष देता है और भण्डार संरक्षण की प्रवृत्ति से दूर रहने को कहता है। यदि किसी ने पूर्व में ज्यादा रखा, तो अवांछित क्षय और विचलन का खतरा था; परन्तु जो विश्वास के साथ हर दिन का आहार ग्रहण करते हैं, वे निर्भयता के साथ आगे बढ़ते हैं। (इन विचारों के संक्षिप्त थॉर्निंग: दैनिक भरोसा, आज के लिए पर्याप्त, क्लेश में भी आशीर्वाद की गवाही.)
आज के लिए अनुप्रयोग
इस पाठ का संक्षेप यह है कि परमेश्वर का प्रेम और देखरेख अब और हर दिन नई भेंट के रूप में आता है, और हमें आवश्यकताओं के अनुसार निर्भर रहना है—भण्डार के डर से नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा पर दृढ़ विश्वास से।
टिप्पणीकारों के उद्धरण (संক্ষिप्त):
“जो दिन-प्रतिदिन आशीष माँगते हैं, वे परमेश्वर की मर्यादा के अनुसार चलते हैं।” — Matthew Henry (संकेत उद्धरण)
“धन जमा करने से जीवन नहीं बढ़ता; विश्वास से ही दिन-प्रतिदिन का परिश्रम फल देता है।” — Albert Barnes
“प्रत्येक दिन का भोजन वही देता है; अवश्य-भरोसे पर चलना ही सच्चा धर्म है।” — Adam Clarke