उत्पत्ति 14:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब वह कदोर्लाओमेर और उसके साथी राजाओं को जीतकर लौटा आता था तब सदोम का राजा शावे नामक तराई में, जो राजा की तराई भी कहलाती है, उससे भेंट करने के लिये आया।

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उत्पत्ति 14:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 14:17 का संदर्भ और संदर्भ-समझ

इस पद का घटनाक्रम उस समय का है जब अब्राम (अब्राहम) के बचे हुए युद्ध-यात्री कदोर्लाओमेर के राजा और 그의 सहयोगी राजाओं पर विजय प्राप्त कर लौटते हैं। प्रकाशित विजयों के साथ יש राजा शावे नामक तराई में गया, जो “राजाओं की तराई” कहलाती है। इस दृश्य में रक्षा-संरक्षा और कर्तव्य-प्रतिष्ठा का संगम दिखता है, जहाँ परमेश्वर के अभय और अविश्वसनीय विश्वास की परिणति रूप नज़र आती है।

ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से जो सीख मिलती है

यह दृष्टांत धार्मिक विश्वास के लिए दो बिंदुओं की पुष्टि करता है: पहली, परमेश्वर के साथ वीरता और धैर्य से काम लेना—भले ही मार्ग कठिन हो, परमप्रभु अपने चयनित अनुयायियों को सुरक्षित रखते हैं; दूसरी, विजय के पश्चात् विनम्रता और दृष्टांत-प्रदर्शनों की महत्ता। शावे के साथ मिलकर राजा-राज्येश्वर के सामने सामने आने के क्षण में अब्राहम का हृदय दिखता है कि वह प्रभु की सहायता से मिली विजय का श्रेय परमेश्वर को देता है, न कि अपने साहस को।

मुख्य शब्दों और imagery कीclarification

- युध्द-विजय: यह पाठ एक युद्ध-यात्रा के भाग के रूप में है, जहाँ परमेश्वर की सहायता से सफलता मिलती है।

- तराई (घाटी) शावे: यह स्थान दर्शाता है कि शांति और करुणा के पलों के बीच भी दृष्टांत-यात्रा संभव है और ईश्वर का मार्ग सत्यापित रहता है।

- आचरण: विजय के बाद सम्मान-संरोध और शांति-वार्ता की ओर संकेत है—यह दिखाता है कि परमेश्वर के दिए गए लाभ अक्सर न्यायपूर्ण और पवित्र प्रयोगों के साथ आते हैं।

अन्य पवित्र ग्रंथ से संबद्ध passages

- पित्र-युद्ध और ईश्वर की सहायता का प्रमुख विचार: indicado (उत्पत्ति 14:11–12; 18–20) पर भी इस प्रकार का चित्रण मिलता है, जहाँ ईश्वर का उद्धारधर्म मानव दुर्बलताओं को पार कर मार्गदर्शित करता है।

- कृतज्ञता और विनम्रता: पवित्र प्रेरणा के अनुसार विजय मिलना यह नहीं कि मानव प्रतिष्ठा बढ़े, बल्कि परमेश्वर के नाम की महिमा के साथ आशीष के प्रयोग का अवसर है (उत्पत्ति 14:22–23 के नज़दीकी प्रसंग देखें)।

- शांति-वार्ता और आशीर्वचन: विजय के पश्चात् भी मानवीय संबंधों में सम्मान और दया-भाव आवश्यक रहते हैं (同, अन्य जगहों में शर्तों के साथ पुनर्मिलन का संकेत मिलता है)।

आज के समय में अनुप्रयोग

  • विश्वास के साथ आगे बढ़ें: कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर की सहायता पर भरोसा बनाए रखें, क्योंकि सफलता उसे पाने की दिशा में मार्गदर्शक है।
  • विजय का सही उपयोग: मिली सफलता का दुरुपयोग नहीं, बल्कि परमेश्वर के नाम की महिमा के लिए प्रयोग करें—आत्म-पूजन से बचें।
  • विनम्रता-भावना बनाए रखें: सफलता मिलने पर भी अपने बड़प्पन का अभिमान नहीं, बल्कि कृतज्ञता और परोपकार की भावना रखें।

मूल पाठ का सार यह है कि परमेश्वर के साथ विश्वास रखने वाले लोग खतरे और कठिनाइयों के बीच भी विजयी होते हैं, और जीत के साथ नम्रता, कृतज्ञता, और शांति-वार्ता की मिसाल पेश करते हैं।

संदर्भ-चिन्ह (cross-references): उत्पत्ति 14:22–23; शिक्षापरक उद्धरणों के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकथनों में संकुल विचार मिलते हैं—ध्यान दें कि यहाँ संक्षेप में केवल निहित विचार दिए जा रहे हैं, पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण नहीं दिए गए हैं।

इन पाठों के भीतर परमेश्वर के भरोसेमंद राज्य की स्थिति, और विश्वास के कर्मों के साथ सिद्ध होने का संदेश स्पष्ट है: विजय और विनम्रता साथ-साथ चलते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 14:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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धनी के तो बहुत मित्र हो जाते हैं, परन्तु कंगाल के मित्र उससे अलग हो जाते हैं।

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यह मलिकिसिदक* शालेम का राजा, और परमप्रधान परमेश्‍वर का याजक, जब अब्राहम राजाओं को मारकर लौटा जाता था, तो इसी ने उससे भेंट करके उसे आशीष दी,

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