उत्पत्ति 14:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और धन्य है परमप्रधान परमेश्‍वर, जिसने तेरे द्रोहियों को तेरे वश में कर दिया है।” तब अब्राम ने उसको सब का दशमांश दिया।

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उत्पत्ति 14:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

Reader-friendly Overview

उत्पत्ति 14:20 में आब्राहम की विशाल प्रेरणा है कि परमप्रधान परमेश्वर की सुरक्षा और आशीष ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जब अब्राम ने रावणियों के विरुद्ध युद्ध जीत लिया, तो वह देवता के प्रकट प्रेम और प्रभुत्व को अनुभव करता है। यह पद हमें दिखाता है कि परमेश्वर का उद्धारक और आशीष देना किस प्रकार विश्वसनीय और प्रत्यक्ष है, और दशमांश देने की प्रथा से यह प्रकट होता है कि परमेश्वर का आशीर्वाद और धन्यवाद व्यक्त करने के तरीके कैसे निर्धारित होते हैं।

Verse in Context

इस दृश्य में अब्राम अपने भाइयों और सहयोगियों के साथ शत्रुता पर विजय पाकर लौटता है। परमप्रधान परमेश्वर ने उसे और उसकी सेना को सुरक्षित रखा, फिर अब्राम उन विजय के फलस्वरूप परमेश्वर का धन्यवाद और आशीर्वाद देता है। यह दृढ़ विश्वास और कृतज्ञता का मिश्रण है: जब लोग प्रभु की रक्षा पर भरोसा करते हैं, तब वे दशमांश, या पहली फलों जैसी समृद्धियों के रूप में आशीष प्राप्त करते हैं।

Main Spiritual Lesson

इस उपदेश का मूल पाठ यह है: परमेश्वर की सत्ता और कृपा के सामने हमारा मानवीय स्वार्थ नहीं ठहरता; हम जो कुछ भी पाते हैं, उसे उसे लौटाने की इच्छा और कृतज्ञता के साथ देना चाहिए। दशमांश देना एक दृढ़ विश्वास की निशानी है कि सभी वस्तुएँ परमेश्वर की दी हुई हैं और उसकी कृति का हिस्सा हैं। यह एक आस्था-कार्य है जो जीवन के हर क्षेत्र को परमेश्वर के बराबर कर देता है—हमारी वस्तुएँ, हमारे समय, और हमारे दिल।

Cross-References (3) with brief notes

  • प्रभु के आशीष के response: धार्मिक कृतज्ञता और दशमांश—2 क्रांतियों 9:7 के अनुरूप, जहां हर किसी ने मन से देना चाहिए, न कि उदारता से तंग आकर।
  • यही दशमांश का उद्देश्य: मत्ती 23:23 की याद दिलाता है कि धार्मिक कर्मों के साथ न्याय, misericordia और विश्वास भी आवश्यक हैं; कृतज्ञता का फलक बढ़ाते हैं।
  • धन का सम्मान और भगवान के लिए: व्यवस्थावय 14:22-23 में दशमांश के साथ उत्साहजनक आत्म-समर्पण और निर्भरता दिखती है, जो उपकारों को परमेश्वर के समक्ष समर्पित करती है।

Practical Application

— अपने जीवन में दी गई हर वस्तु के लिए प्रभु की कृतज्ञता जताएं और उसे सही तरीके से व्यवस्थित करें।

— दशमांश के बारे में सोचते समय धार्मिक दिखावा नहीं, बल्कि हृदय से दी जाने वाली खुशी और समर्पण की श्रद्धा चाहिये।

— धन-सम्पत्ति के साथ नैतिक उत्तरदायित्व निभाएं; यह देवदत्त गुणों को संरक्षित और बढ़ाता है।

Short, integrated summary

उत्पत्ति 14:20 हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर की रक्षा और आशीष पर विश्वास करने वालों के लिए कृतज्ञता कैसे प्रकट की जाए। अब्राम ने विजय के उपरांत परमेश्वर को धन्य कहा और परमेश्वर के उदार आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में दशमांश अर्पित किया—यह आध्यात्मिक सत्य है कि सब कुछ परमेश्वर की देन है और उसका धन्यवाद एक जीवन-चर्या बन जाना चाहिए।

कठोर अनुशासन के साथ यह भी याद रखिए कि दशमांश केवल धन का हिस्सा नहीं है; यह विश्वास, समर्पण और न्याय के साथ हर अपनी वस्तु को परमेश्वर के सबसे बड़े उद्देश्य के लिए समर्पित करने की ओर एक कदम है।

कथित क्रिया से प्रेरित: परमेश्वर की रक्षा में वाहक बनें, धन्यवाद में बढ़ें, और हर प्रारब्ध में उसकी महिमा बढ़ाते रहें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 14:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और यह पत्थर, जिसका मैंने खम्भा खड़ा किया है, परमेश्‍वर का भवन ठहरेगा: और जो कुछ तू मुझे दे उसका दशमांश मैं अवश्य ही तुझे दिया करूँगा।”

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मैं सप्ताह में दो बार उपवास करता हूँ; मैं अपनी सब कमाई का दसवाँ अंश भी देता हूँ।’

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सारे दशमांश भण्डार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजनवस्तु रहे; और सेनाओं का यहोवा यह कहता है, कि ऐसा करके मुझे परखो कि मैं आकाश के झरोखे तुम्हारे लिये खोलकर तुम्हारे ऊपर अपरम्पार आशीष की वर्षा करता हूँ कि नहीं।

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