उत्पत्ति 24:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसने कहा, “हे यहोवा की ओर से धन्य पुरुष भीतर आ तू क्यों बाहर खड़ा है? मैंने घर को, और ऊँटों के लिये भी स्थान तैयार किया है।”

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उत्पत्ति 24:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 24:31 पर टिप्पणी

इस पद में पुराने अयूबाद के पिता उर के वंशज इब्राहीम के दत्तक पुत्र इश्मायेल के बाद का एक दृश्य है, जहाँ वराक का पुत्र लाबन से मिलने पर पादरी अब्रहाम के सेवक अब्राहम की विशिष्टता और आतिथ्य का संदर्भ सामने आता है। इस दृश्य में यहूदी-पितृक परंपरा के भीतर दत्तक पुत्र की जगह और घर-स्थापना का प्रतीकात्मक महत्व भी उभरता है।

मुख्य अभिप्राय

यह वाका दिखाती है कि कैसे एक हितैषी परमेश्वर के उद्देश्य से आ रहा है, और कैसे अग्रज-प्रवर्तक के घर ने अपने घर और स्थलों की तैयारी कर ली है ताकि आने वाले मेहमान के सम्मान में आयोजन संभव हो सके। यह शर्त सन्देश देता है कि मित्रता और आतिथ्य परमेश्वर के मार्ग के साथ-साथ परिवार और गृह-स्थापना के प्रतीक हैं।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • आतिथ्य और स्वागत: व्यक्ति के प्रयास से नहीं, बल्कि घर की तैयारी और व्यवस्थित व्यवस्था से यह स्पष्ट होता है कि आतिथ्य एक पवित्र कर्तव्य है जो परिवार की समृद्धि और विश्वास की स्थिरता को संकेत देता है।
  • परिवार की सुरक्षा और स्थिरता: अगस्त्य और ऊँटों के लिए स्थान बनाकर, वह परिवार के आर्थिक-चौकसी और यात्राओं के लिए तैयारी दिखाता है—यह धरोहर और आस्था का संयुक्त संकेत है।
  • धर्म और योजना: यहोवा की ओर से blessing का संकेत है, कि जीवन की राहों में योजना बनाकर आगे बढ़ना चाहिए—न केवल पुत्र-पुष्टि, बल्कि घर-बसाहट का भी समन्वय।

संबद्ध पदों से सम्बद्ध संदर्भ

•Genesis 18:1-8 – अब्राहम का आतिथ्य और मेहमान-स्वागत का आदर्श व्यवहार।

•잠출/शास्रक संदर्भ नहीं।

•हन्नाह 2:20-21 के समान आतिथ्य और परिवार-निर्माण के विचार, आतिथ्य के पुण्य को दर्शाते हैं।

व्यावहारिक विचार

नीति यह कि जब परमेश्वर के लोग अपने घर को खुला रखते हैं और जरूरतमंदों के लिए जगह बनाते हैं, तब स्वयं उनके घर और विश्वास में समृद्धि बढ़ती है। यह vers-आख्यान हमें सिखाता है कि जीवन के यात्राओं में शारीरिक व्यवस्था के साथ आध्यात्मिक स्वागत भी अहम है: मित्रों और भाइयों के लिए जगह बनाकर ईश्वरीय आशीर्वाद का प्रवेश आसान होता है।

क्रॉस-रेफरेंसेज और उनके अर्थ

• मरकुस 12:31 – एक दूसरे के प्रेम का सार्थकता: आतिथ्य और परिवार की सेवा एक ही मूल से जुड़ी है।

• इब्रानियों 13:2 – अजीब मेहमानों के लिए आतिथ्य को ईश्वर की दृष्टि से देखते हैं, क्योंकि उसने संभवतः हमारे बीच देवदूत भी भेजे।

• याकूब 2:15-16 – यदि किसी के पास वस्त्र और भोजन है, फिर भी साथी की आवश्यकता में सहायता करें—यह घर-स्थापना और विश्वास के साथ नातेदारी है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

उत्पत्ति 24:31 में दिखाया गया है कि आतिथ्य, घर-स्थापना और परिवार के लिए पर्याप्त व्यवस्था करना एक साथ चलते हैं। यह असल में परमेश्वर के आशीर्वाद के लिए मार्ग प्रशस्त करता है—जहाँ प्रेम और सेवा दोनों एकत्र होते हैं। यह पद हमारे जीवन को यह स्मरण दिलाता है कि घर एक संरचना नहीं, बल्कि विश्वास, स्वागत और समर्पण की संस्थानी जगह है।

नोट: इस पृष्ठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण केवल आवश्यकतानुसार उपलब्धता के अनुसार सम्मिलित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 24:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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कि जैसे हमने तुझे नहीं छुआ, वरन् तेरे साथ केवल भलाई ही की है, और तुझको कुशल क्षेम से विदा किया, उसके अनुसार तू भी हम से कोई बुराई न करेगा।”

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रूत 3:10 (HINIRV) »
उसने कहा, “हे बेटी, यहोवा की ओर से तुझ पर आशीष हो; क्योंकि तूने अपनी पिछली प्रीति* पहली से अधिक दिखाई, क्योंकि तू, क्या धनी, क्या कंगाल, किसी जवान के पीछे नहीं लगी।

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यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, उसकी ओर से तुम आशीष पाए हो।

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