उत्पत्ति 25:33 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

याकूब ने कहा, “मुझसे अभी शपथ खा,” अतः उसने उससे शपथ खाई, और अपना पहलौठे का अधिकार याकूब के हाथ बेच डाला।

पिछला पद
« उत्पत्ति 25:32

उत्पत्ति 25:33 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 25:33 का मौलिक दृष्यमान सेटिंग और उसका अर्थ

यह पद उन घटनाओं के क्रम में आता है जहाँ याकूब ने केश और पत्थर के अधिकार के लिए इज़ाक से अपनी दादी के दायित्वों से अलग होकर अपनी बहन-भायन के साथ भागीदारी की योजना बनायी। यहाँ याकूब और इसहाक के पुत्र एसान का भाग्य-संबंधी पल है—याकूब ने शपथ के साथ पहलौठे के अधिकार को प्राप्त कर लिया। भूमिका यह है कि जड़-सम्बन्धी जन्म-परंपरा और परिवार की सत्ता किस प्रकार धन-दौलत और भाग्य के साथ जुड़ जाती है।

पठनानुसार टेक्स्ट से निष्कर्ष: परमेश्वर की ईमानदारी और मानवीय निर्णय

कथा इस बात पर प्रकाश डालती है कि परमेश्वर का नीयत कभी मानव की कूट-नीतियों से बनती-चाल में नहीं रुकती। यद्यपि याकूब की चतुराई और इसस्राइल-सम्बन्धी उत्तराधिकार की चाह उसे शपथ-भंग की ओर ले गई, फिर भी परमेश्वर ने भविष्य में अपने ध्येय को पूरा किया—याकूब के माध्यम से इस्राइल के वंश का गठन। यह परिदृश्य यह संकेत देता है कि परमेश्वर अपने उद्देश्य के अनुसार घटनाओं को बनाता है, भले ही मानव की रणनीतियाँ उसे सम्मिलित करें या गलत पड़ें।

महत्वपूर्ण शब्द-विवेचन

  • —परंपरागत पंरपरा में पहला जन्म और उससे जुड़ा दायित्व है; यह परिवार की विरासत,_MAN का आशीर्वाद_ और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़ा होता है।
  • —कभी-कभी करार की महत्ता और सामाजिक-धार्मिक संकल्प का प्रतीक; यहाँ यह दिखाता है कि याकूब ने अपने हित के लिए अपने भाई से शपथ के सहारे लाभ उठाया।

क्रॉस-रेफरेंसेज (संदर्भ-पत्र)

- रोम 9:11-12 — परमेश्वर के चयन के बारे में: चीजें मानव सोच से परे कैसे निर्धारित होती हैं, जब जन्म-पूर्व हुक्म दिया गया हो।

- निर्गमन 22:29 — पहलौठे के अधिकार और उसका सामाजिक-आर्थिक महत्त्व किस प्रकार समुदाय में मान्य होता था.

- गलातियों 4:28 — आह्वान करें कि विश्वास के द्वारा हम पुत्र हो जाते हैं, न कि जन्म के आधार पर ही निर्धारित।

आज के लिए अनुप्रयोग

हम देखते हैं कि ईश्वर के कार्य कभी भी मानवीय चाल-चलन के अनुसार नहीं रुकते। एक ओर, हमारी योजनाओं में चतुराई आवश्यक होती है, पर दूसरी ओर हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि परमेश्वर के उद्देश्य सर्वोपरि हैं। सत्य यही है कि विश्वासयोग्य जीवन में ईमानदारी और मनुष्य-हित के लिए उच्च आशीर्वाद बनते हैं—यहाँ याकूब के कारण इस्राइल का वंश बढ़ा, परंतु यह भी एक चेतावनी है कि अधिकार और लाभ के पीछे भागना स्वयं-निर्मित परिणाम दे सकता है। इसलिए हमारे लिए शिक्षा है कि परमेश्वर की योजना पर विश्वास रखें, पर अपने आचरण को शांत और समर्पित रखें।

कड़े निष्कर्ष के रूप में: यह पाठ एक मिश्रित सबक देता है—परमेश्वर अपने वचन के अनुसार आगे बढ़ते हैं, परन्तु मानव की चालें भी उसी योजना का हिस्सा बन जाती हैं।

नोट: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के किसी वाक्यों से सीधे छोटे उद्धरण उपलब्ध होने पर उन्हीं से उद्धृत के संकेत दिए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 25:33 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

इब्रानियों 12:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
इब्रानियों 12:16 (HINIRV) »
ऐसा न हो, कि कोई जन व्यभिचारी, या एसाव के समान अधर्मी हो, जिसने एक बार के भोजन के बदले अपने पहलौठे होने का पद बेच डाला। (कुलु. 3:5, उत्प. 25:31-34)

इब्रानियों 6:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
इब्रानियों 6:16 (HINIRV) »
मनुष्य तो अपने से किसी बड़े की शपथ खाया करते हैं और उनके हर एक विवाद का फैसला शपथ से पक्का होता है। (निर्ग. 22:11)

उत्पत्ति 27:36 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 27:36 (HINIRV) »
उसने कहा, “क्या उसका नाम याकूब यथार्थ नहीं रखा गया? उसने मुझे दो बार अड़ंगा मारा, मेरा पहलौठे का अधिकार तो उसने ले ही लिया था; और अब देख, उसने मेरा आशीर्वाद भी ले लिया है।” फिर उसने कहा, “क्या तूने मेरे लिये भी कोई आशीर्वाद नहीं सोच रखा है?”

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें