उत्पत्ति 33:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

एसाव ने कहा, “तो अपने साथियों में से मैं कई एक तेरे साथ छोड़ जाऊँ।” उसने कहा, “यह क्यों? इतना ही बहुत है, कि मेरे प्रभु के अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर बनी रहे।”

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उत्पत्ति 33:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 33:15 पर संदर्भगत टिप्पणी (HINIRV)

वर्तमान पाठ में याकूब और Esaú की मिलन के छिन्न-भिन्न पहले सन्निकट क्षण दिखते हैं। याकूब ने अपनी बहुमूल्य सुरक्षा और आशीर्वाद के कारण Esaú को डराया। लेकिन इस पद में Esaú कहता है कि वह अपने साथियों में से कितने एक साथी उसके साथ चलें, ताकि दोनों भाइयों के बीच का शांति-संबंध बना रहे। याकूब उत्तर देता है कि प्रभु के अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर बनी रहे, अर्थात् वह अपनी भलाई और सुरक्षा के लिए परमेश्वर की कृपा पर निर्भर है।

मुख्य अर्थ

इस वाक्य में Esaú उन भाइयों के बीच स्थिरता और विश्वास की चाह जाहिर कर रहा है। वह कह रहा है कि यदि संभव हो, तो मेरा साथ तुम्हारे साथ रहे, ताकि हमारे रिश्ते में स्थायित्व बने। याकूब का उत्तर प्रभु की कृपा पर निर्भर रहने का भाव है—तथ्य यह है कि मानव की योजना कितनी भी चतुर क्यों न हो, परन्तु आशीर्वाद और सुरक्षा का वास्तविक स्रोत परमेश्वर की कृपा है।

मुख्य विषय

  • परमेश्वर की कृपा पर निर्भरता: याकूब को ज्ञात है कि उसका जीवन परमेश्वर की कृपा और सुरक्षा से ही संचालित है; Esaú की पेशकश भी इसी आशय को दर्शाती है कि भाईचारे और सामाजिक सुरक्षा के लिए परमेश्वर के आशीर्वाद का आश्रय ही सर्वोपरि है।
  • सामाजिक और पारिवारिक पुनर्मिलन का महत्व: दो भाइयों के बीच दूरी कम करते हुए एक साथ चलना, विश्वास और शान्ति की दिशा में पहला कदम माना गया है।
  • अनुग्रह का अनुभव बनाम मानवीय योजना: Esaú की इच्छा भले इच्छा है, पर वास्तविक सुरक्षा ईश्वर के अनुग्रह से ही संभव है, यह विचार इस पाठ के पीछे के theological theme को उभारता है।

संबद्ध भाग - संदर्भजनक विचार

- प्रेरक कल्पनाओं में यह दिखता है कि आशीर्वाद और सुरक्षा पर निर्भरता किस प्रकार परिवारिक रिश्तों को पुनर्जीवित कर सकती है।

- अन्य संदर्भ जहाँ आशीर्वाद का महत्त्व और परमेश्वर की कृपा प्रमुख रहती है, वे हब 2:4 और यूहन्ना 1:16 के विषयों से समांते हैं, जो बतलाते हैं कि जीवनिक तुष्टि और आध्यात्मिक लाभ परमेश्वर के कृपामय प्रत्यक्ष से ही आते हैं।

व्यावहारिक विचार

हमारे रोजमर्रा के जीवन में भी यह सच्चाई है कि भौतिक योजना कितनी भी योजनाबद्ध हो, सुरक्षा और स्थायित्व के लिए परमेश्वर की कृपा की आश्रय आवश्यक होता है। रिश्तों में दूरी कम करने के लिए अपनापन और विश्वास अधिक प्रभावी हो सकता है।

संक्षिप्त सार

उत्पत्ति 33:15 में Esaú और याकूब के बीच संबंधों की संवेदनशीलता और आशीर्वाद के लिए परमेश्वर की कृपा पर निर्भरता स्पष्ट है। यह पाठ मानव प्रयासों की सीमाओं को दिखाते हुए बताता है कि शांति और सुरक्षा का वास्तविक आधार परमेश्वर की अनुकम्पा है।

Cross-references

- रोम 8:32 — परमेश्वर की कृपा से प्रेरित सुरक्षा का निवेश

- मत्ती 6:33 — परमेश्वर के राज्य और उसकी righteousness की खोज पहले

- प्रेषित 16:34 — विश्वास के साथआशीर्वाद और शांति

नोट: नीचे उद्धृतMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सटीक शब्द-उद्धरण केवल वही हों जिन्हें उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन Commentary में पाया जा सके—आवश्यकतानुसार संक्षेपित सार-संदीप्तियाँ यहाँ सम्मिलित की गई हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 33:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसने कहा, “हे मेरे प्रभु, तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर बनी रहे, क्योंकि यद्यपि मैं तेरी दासियों में से किसी के भी बराबर नहीं हूँ, तो भी तूने अपनी दासी के मन में पैठनेवाली बातें कहकर मुझे शान्ति दी है।”

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उत्पत्ति 34:11 (HINIRV) »
और शेकेम ने भी दीना के पिता और भाइयों से कहा, “यदि मुझ पर तुम लोगों की अनुग्रह की दृष्टि हो, तो जो कुछ तुम मुझसे कहो, वह मैं दूँगा।

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उत्पत्ति 47:25 (HINIRV) »
उन्होंने कहा, “तूने हमको बचा लिया है; हमारे प्रभु के अनुग्रह की दृष्टि हम पर बनी रहे, और हम फ़िरौन के दास होकर रहेंगे।”

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