Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
उत्पत्ति 37:1 उत्पत्ति 37:2 उत्पत्ति 37:3 उत्पत्ति 37:4 उत्पत्ति 37:5 उत्पत्ति 37:6 उत्पत्ति 37:7 उत्पत्ति 37:8 उत्पत्ति 37:9 उत्पत्ति 37:10 उत्पत्ति 37:11 उत्पत्ति 37:12 उत्पत्ति 37:13 उत्पत्ति 37:14 उत्पत्ति 37:15 उत्पत्ति 37:16 उत्पत्ति 37:17 उत्पत्ति 37:18 उत्पत्ति 37:19 उत्पत्ति 37:20 उत्पत्ति 37:21 उत्पत्ति 37:22 उत्पत्ति 37:23 उत्पत्ति 37:24 उत्पत्ति 37:25 उत्पत्ति 37:26 उत्पत्ति 37:27 उत्पत्ति 37:28 उत्पत्ति 37:29 उत्पत्ति 37:30 उत्पत्ति 37:31 उत्पत्ति 37:32 उत्पत्ति 37:33 उत्पत्ति 37:34 उत्पत्ति 37:35 उत्पत्ति 37:36



reader-friendly overview
उत्त्पत्ति 37:36 बतलाता है कि यूसुफ की बेचने की घटनाओं के बाद उसे मिस्र ले जाया गया, जहाँ मिद्यानियों ने उसे फ़िरौन के हाकिम पोतीपर और उनके अंगरक्षकों के हाथ बेच दिया। यह verse, कहानी की विपत्तियों के बीच परमेश्वर के योजना के संकेतों को उद्घाटित करता है। जीवन में अत्यधिक कठिन परिस्थितियाँ आने पर भी परमेश्वर की दृष्टि और उद्देश्य दृढ़ रहते हैं; यह verse इस सत्य को दृढ़ बनाती है कि दुष्कर्म और अवहेलना के क्षण भी परमेश्वर की सृष्टि-योजना के तहत हैं, और विश्वासियों की सुरक्षा उसकी इच्छा के अनुसार होती है।
verse in its chapter
इस अध्याय में यूसुफ की बहनों और भाईयों द्वारा किया गया पिशाच-हृदय कार्य, उनके प्रेम-भरे संबन्धों में फूट और अंततः उनकी जिंदगी के पाठ के रूप सामने आते हैं। 37:36 में यूसुफ की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए, पाठक महसूस करता है कि घटनाओं की एक श्रृंखला कैसे उसे एक विदेशी भूमि की ओर ले जाती है, ताकि वह मिस्र में ईश्वरीय कार्य के लिए उपकरण बन सके।
main spiritual lesson
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा यह है कि परमेश्वर की योजनाओं का मार्ग प्रत्यक्ष रूप से सामने नहीं आता, परन्तु प्रत्येक कठिन घड़ी में भी वह विश्वसनीय रहता है। विश्वासियों को यह स्मरण रहना चाहिए कि बंद दरवाजे भी कभी-कभी ईश्वरीय चयनित मार्ग के संकेत होते हैं; चालाकी या दुष्कर्म के बावजूद परमेश्वर अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाते हैं।
तुलना : निर्णायक बिंदु
- पवित्रशास्त्र के अन्य हिस्सों में भी बचे रहने और एक दुष्ट योजना को परमेश्वर की योजना में समायोजित करने के प्रमाण मिलते हैं (उदा., रोम 8:28).
- यूसुफ की प्रेरणा और विश्वास, खासकर विपत्ति में bhi ईश्वर के साथ स्थिरता दिखाते हैं (उत्पत्ति 39; 50:20).
cross-references (संक्षेप)
संक्षेप में, ये क्रॉस-रेफरेंसेज दिखाती हैं कि विपत्तियों के बीच भी परमेश्वर की दृष्टि सक्रिय है और वह उनकी पूर्व-निर्धारित योजना को पूरा करने के लिए काम कर रहा है।
practical application (व्यावहारिक आवेदन)
summary (सार)
37:36 दिखाता है कि यूसुफ की जिंदगी में एक नए चरण की शुरुआत होती है—मिस्र की भूमि में एक आवश्यक कदम। यह घटना यह याद दिलाती है कि दुष्क्रिया के बावजूद परमेश्वर की योजना अक्षुण्ण है और विश्वासियों को भरोसा रखना चाहिए कि वे अपने सच्चे उद्देश्य के साथ जुड़ते रहते हैं।
उद्धरण (संदर्भ-संकेत): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समानार्थी विचारों के सार यहाँ समाहित हैं; यदि किसी विशिष्ट वाक्य का दायित्व स्पष्ट हो तो उसे सीधे उद्धृत किया गया होगा।