Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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उत्पत्ति 38:8— immediate setting
तब यहूदा ने ओनान से कहा, “अपनी भौजाई के पास जाओ, और उसके साथ देवर का धर्म पूरा करके अपने भाई के लिये सन्तान उत्पन्न कर।” यह दृश्य यहूदा-वंश में एक विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा है, जिसे भाषा में “छोड़े हुए दायित्व” के रूप में भी समझना चाहिए। ओनान को यह निर्देश दिया गया कि वह अपने भौजाई की संगति में जाए ताकि उनके परिवार को उत्तराधिकारी मिलें; परन्तु वह अपने कर्तव्य को ढीला करने के लिए अपने हितार्थ तर्क करता है, जिससे धर्म-व्यवस्था और भाई-बंधुत्व की संवेदना पर प्रश्न उठते हैं।
यह टेक्स्ट परमेश्वर और आस्तिकता के बारे में क्या बताता है
यहाँ संरचना दो भावनाओं को सामने रखती है: एक, परमेश्वर का विवाह-विधान और बहन-भतीजे की आशा के प्रति उसकी देखभाल; दूजा, मानव स्वार्थ के कारण नैतिक दुविधा। यहूदा की सलाह यह दर्शाती है कि समाज-नीतियाँ कभी-कभी व्यक्तिगत आराम से ऊपर रहती हैं, ताकि परिवार में जीवन-श्रृंखला बनी रहे। किंतु ओनान की प्रतिक्रिया, जिसे लेखक न केवल निज जीवन के बारे में बल्कि ईश्वर की दृष्टि से भी मूल्यांकन योग्य दिखाता है, उसे दिखाती है कि निष्क्रियता और आत्म-स्वार्थ विज्ञान सम्मानपूर्वक नहीं मानी जा सकती।
important शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
संबंधित पवित्र ग्रंथ
यह कथा मूल रूप से इस प्रकार के विचारों के साथ जुड़ी है:
आज के जीवन में सुरक्षा और आवेदन
इस पाठ से आज के विश्वासियों के लिए एक संदेश निकलता है: कर्तव्य और ईश्वर-आस्था में संतुलन आवश्यक है। परिवार के लिए जिम्मेदारी निभाने में selfish लाभ प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए; परन्तु यह याद रखना चाहिए कि मानव-निर्णय भी ईश्वर के उद्देश्य के साथ जुड़ा होना चाहिए। विश्वासियों को यह विचार करना चाहिए कि उनके व्यवहार से उत्तराधिकारी-रेखा और समुदाय की बंधुत्व प्रभावित होते हैं।
पक्का-हवाला क्रॉस-रेफ़रेंस
1) प्रेरित-दृष्टि: यहूदा-ओनान कथा में देह-धर्म और सामाजिक कर्तव्य का मिश्रण है; यह सीख देता है कि परमेश्वर केवल सामाजिक अनुशासन नहीं देखता, बल्कि हृदय की श्रद्धा भी देखता है।
2) अन्य स्थान: विवाह-दायित्वों के मूल्य को स्पष्ट करता है कि कैसे परिवार की पंक्ति बनती है—यद्यपि यह विशिष्ट व्यवस्था पुराने नियम की विशिष्ट स्थिति है।
3) विश्वास-जीवन में नैतिकता: व्यक्तिगत स्वार्थ बनाम परमेश्वर-आशीष के बीच चयन की आवश्यकता।
नोट: नीचे उद्धृत शब्द-सम्पादन Henry, Barnes या Clarke के विशिष्ट उद्धरण उपलब्ध होने पर ही सटीक वाक्यांश दिए जाते हैं: