Old Testament
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रूत 4:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर बोआज ने कहा, “जब तू उस भूमि को नाओमी के हाथ से मोल ले, तब उसे रूत मोआबिन के हाथ से भी जो मरे हुए की स्त्री है इस मनसा से मोल लेना पड़ेगा, कि मरे हुए का नाम उसके भाग में स्थिर कर दे।”
रूत 4:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 4:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 25:5 (HINIRV) »
“जब कई भाई संग रहते हों, और उनमें से एक निपुत्र मर जाए, तो उसकी स्त्री का ब्याह परगोत्री से न किया जाए; उसके पति का भाई उसके पास जाकर उसे अपनी पत्नी कर ले, और उससे पति के भाई का धर्म पालन करे। (मत्ती 22: 24)

उत्पत्ति 38:8 (HINIRV) »
तब यहूदा ने ओनान से कहा, “अपनी भौजाई के पास जा, और उसके साथ देवर का धर्म पूरा करके अपने भाई के लिये सन्तान उत्पन्न कर।”

मत्ती 22:24 (HINIRV) »
“हे गुरु, मूसा ने कहा था, कि यदि कोई बिना सन्तान मर जाए, तो उसका भाई उसकी पत्नी को विवाह करके अपने भाई के लिये वंश उत्पन्न करे।
रूत 4:5 क्रमवाचक संदेश और उसका संदर्भ
सीधे शब्दों में स्पष्ट अर्थ यह है कि बोआज ने कहा: यदि तुम भूमि को नाओमी को देकर नाओमी के कानूनी अधिकार के अनुसार रूत को तब्रत (कर्ज़) में दे दो, तो तुम्हें रूत मोआबिन की मरे हुए की स्त्री के रूप में भी मोल लेना पड़ेगा ताकि मरे हुए का नाम उसके हिस्से में स्थिर रहे।
सं contextual पृष्ठभूमि
यह मिस्पिश्र (Boaz) तथा नाओमी के कहने के अनुरोध के संदर्भ में है, जिसमें रूत की सुरक्षा और बेटों के ऊपर उत्तराधिकार के नियम स्पष्ट होते हैं। नाओमी का परिवार संकट में है; रूत के लिए एक नया अधिकार-सम्बन्धी बनाने की प्रक्रिया चालू होती है ताकि परिवार की विरासत सुरक्षित रहे और "कानून के अनुसार नाता" बना रहे।
Interpretive observations
छोटा थीमैटिक सूची
अन्य प्रश्न-उद्धरण (Cross-references)
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि उत्तराधिकार-सम्बन्धी निर्णय समाज में स्थिरता और परिवार की दीर्घकालिक विरासत के लिए आवश्यक थे।
पूर्ववर्ती टीका-आयोगों के संक्षेपित विचार
डब्ल्यू. मैथ्यू हैनरी (Matthew Henry) के अनुसार यहाँ कानून और नैतिकता का संगम है: “कानून के अनुसार मूर्त आवश्यकताओं के साथ दयालुता भी निभनी चाहिए।”
एडम क्लार्क (Adam Clarke) के अनुसार यह अवसर न केवल वित्तीय लेन-देन है, बल्कि मरे हुए के नाम को जागृत रखने की धार्मिक और सामाजिक प्रतिज्ञा है।
एल्मर्ट Barnes के विचारों के अनुसार इस प्रकरण में बोआज का कर्तव्य जातीय नियमानुसार भागीदारी सुनिश्चित करता है, ताकि परिवार की धरोहर बनी रहे।
संरचना-निष्कर्ष
फिर बोआज ने कहा, यह निर्णय न सिर्फ एक आर्थिक लेन-देन है, बल्कि एक धार्मिक-नैतिक दायित्व है—मरे हुए का नाम और भाग स्थिर रखना ताकि परिवार की विरासत जीवित रहे। यह नीतिगत क्रिया प्रेमपूर्ण उत्तरदायित्व की मिसाल है जो समुदाय के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
व्यावहारिक takeaway