Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीरूत 4:20 बाइबल पद की व्याख्या
रूत 4:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और अम्मीनादाब से नहशोन, और नहशोन से सलमोन,
रूत 4:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 4:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 1:4 (HINIRV) »
एराम से अम्मीनादाब उत्पन्न हुआ, और अम्मीनादाब से नहशोन, और नहशोन से सलमोन उत्पन्न हुआ। (रूत 4:19-20)

लूका 3:32 (HINIRV) »
और वह यिशै का, और वह ओबेद का, और वह बोआज का, और वह सलमोन का, और वह नहशोन का, (रूत 4:20-22)

रूत 4:20 पर चर्चा: लिंक, नातेदारी और ईमान की पुष्टि
यह छोटा सा वचन बताता है कि रूत के परिवार-परिवार में जो नए सम्बन्ध बनते हैं, वे सिर्फ सामाजिक-परिवारिक नहीं रहते, वे परमेश्वर की योजना के भाग बनते हैं। यह वचन प्रकट करता है कि दयालुता, विश्वास और वंश-वेल्या के प्रणालियों के बीच कैसे एक धागा चलता है, जो भविष्य के उद्धार के कारण बनता है। यह हमें याद दिलाता है किetin जीवन के छोटे-छोटे क्रम भी ईश्वर के स्थिर उद्देश्य के हिस्से होते हैं।
प्रसंग का मूल माहौल
रूत के संदर्भ में यह वचन नहशोन से सलमोन तक की पहचानों को सूचीबद्ध करता है—जो गैलेक्टिक परिवार-कूट के भीतर एक ऐतिहासिक चरण को दर्शाते हैं। इस क्रम के माध्यम से पाठक देखता है कि दया, उत्तराधिकार और विवाह-बंधन कैसे राष्ट्र-निर्माण की दिशा निर्धारित करते हैं। बलिष्ठ परिश्रम और धर्म-निष्ठा के साथ, रूत की कहानी यह संकेत देती है कि यह विन्यास सिर्फ लोगों के नामों का संयोजन नहीं, बल्कि परमेश्वर के उद्धार-योजना के भीतर एक दियोन-लिंक है।
मुख्य संदेश
इस पद से स्पष्ट होता है कि दत्त-योग्यता और साहस के साथ यात्रा करने पर भी दिव्य योजना सक्रिय रहती है। नहशोन और सलमोन के नाम पाठक को यह सोचने के लिए प्रेरित करते हैं कि कैसे वंश और दया का क्रम परमेश्वर की कर्तव्य-योजना से जुड़ा रहता है। यह वंशज-चक्र दर्शाता है कि प्रभु के वचन और प्रतिज्ञाओं के अनुसार ही जीवन का क्रम चलता है—चाहे वह सामाजिक पहचान हो या परिवारिक उत्तराधिकार।
उद्धरण-आधार और साहित्यिक संवाद
इस पाठ में सीधे उद्धरण से निकालकर देखें तो हल्के-फुल्के नामों के क्रम से यह प्रकट होता है कि एक-एक व्यक्ति का नाम इतिहास के पन्नों में जुड़ता है और आगे के घटनाक्रमों के लिए मार्ग बनता है। साथ ही, पुराने परी-परिवार और दयालुता की पंक्तियाँ मिलकर सितम्बर के अंधेरे में आशा का प्रकाश बनाती हैं।
मुख्य विषय-वस्तु से सम्बद्ध क्रॉस-रेफरेंस
अगर आप ऊँचे स्तर की कठिनाई के साथ क्रॉस-रेफरेंस देखना चाहें, तो विचार करें कि इन संदर्भों के माध्यम से जीवन के क्रम और वादा-यात्रा कैसे जुड़ते हैं, परंतु किसी भी उद्धरण के पूर्ण पाठ की पुनरावृत्ति न करें।
व्यावहारिक-धार्मिक अनुपात
यह हल्का-सा वचन हमें यह सिखाता है कि ईश्वर की योजनाओं में भागीदारी के लिए हमारी विश्वसनीयता और कर्तव्य-निष्ठा कितनी आवश्यक है। सामाजिक रीतियों के बीच भी आस्था के पथ पर चलना, दया के इतिहास को आगे बढ़ाता है और भविष्य की रीति-रिवाजों को संजीदा बनाता है।
आत्मिक चर्चा
हम प्रत्येक दिन के कार्यक्रमों में ईश्वर के वादों को कैसे बनाये रखें? यह पाठ हमें यह आश्वासन देता है कि छोटे-छोटे नाम और रिश्ते भी एक बड़े उद्धार-योजना के अंग होते हैं। अपने जीवन में दया, विश्वास और उत्तरदायित्व के संतुलन को बनाए रखना सीखें; क्योंकि परमेश्वर वही है जो क्रमबद्धता और अनुग्रह दोनों से चलता है।
आवश्यक उद्धरण और पारंपरिक तत्त्वों के संदर्भ से संयुक्त विश्लेषण में, यह स्पष्ट है कि प्रकरण में नातेदारी का क्रम और दया-यात्रा एक साथ बढ़ते हैं, जो भविष्य के कर्तव्यों और आदर्श-वचन को मजबूत करते हैं।