Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीरूत 4:14 बाइबल पद की व्याख्या
रूत 4:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब स्त्रियों ने नाओमी से कहा, “यहोवा धन्य है, जिस ने तुझे आज छुड़ानेवाले कुटुम्बी के बिना नहीं छोड़ा; इस्राएल में इसका बड़ा नाम हो।
रूत 4:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रूत 4:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

लूका 1:58 (HINIRV) »
उसके पड़ोसियों और कुटुम्बियों ने यह सुन कर, कि प्रभु ने उस पर बड़ी दया की है, उसके साथ आनन्दित हुए।

भजन संहिता 34:1 (HINIRV) »
दाऊद का भजन जब वह अबीमेलेक के सामने बौरहा बना, और अबीमेलेक ने उसे निकाल दिया, और वह चला गया मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूँगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।

2 थिस्सलुनीकियों 1:3 (HINIRV) »
हे भाइयों, तुम्हारे विषय में हमें हर समय परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, और यह उचित भी है इसलिए कि तुम्हारा विश्वास बहुत बढ़ता जाता है, और आपस में तुम सब में प्रेम बहुत ही बढ़ता जाता है।
रात 4:14 – नाओमी और राहु के लिए नया नाम
रूत 4:14 में शेष इतिहास एक आश्वस्ति के साथ पुनः उभरता है: नाओमी के जीवन में एक नई आशा आई। इस समय वह जिस कष्टपूर्णắng यात्रा से गुज़री थीं, उसकी मरम्मत होकर एक परिवार बना और एक नया जीवन उनकी गोद में आया। स्त्रियाँ नाओमी से कहती हैं कि यह यहोवा का कार्य है; उसने तुझको उद्धार के लिए एक कुटुम्बी दिया है और इस्राएल में उसका बड़ा नाम होगा।
केंद्रीय अर्थ
यह उद्धरण नाओमी के दुख के बाद उद्धार की मीठी पुष्टि है। परिश्रम, त्याग और विश्वास के बाद परमेश्वर ने उसे आनंद और सुरक्षा का नया स्रोत दिया। नाओमी के जीवन में जहाँ कुटुम्ब और स्थिरता लाने वाला दामाद या नैतिक समर्थन कठिन था, वहीं रूत और बओज़ की कुटुंबीयता ने दयालुता, ममता और सहयोग का नया मार्ग खोला। इस वाक्यांश में परमेश्वर के वचनों और उनके पालन की महत्ता स्पष्ट है—दुनिया की समस्याओं के बीच भी ईश्वरीय योजनाएं प्रगट होती हैं और वंश, घर, और समुदाय को पुनः स्थापित करती हैं।
मुख्य विचारधाराएं
अनुरूप प्रचलित अनुभाग– अन्य पाठ से सम्बन्ध
- प्रेरणा और उद्धार के बारे में मैत्थ्यू, हेनरी और क्लार्क की टिप्पणियाँ इस पाठ के संदर्भ में प्रभावी होते हैं: वे दर्शाते हैं कि कैसे ईश्वर का लाभ और सुरक्षा चिर-स्थायी परिवार, समुदाय, और नस्लीय रेखाओं से परे फैला होता है।
– पूर्वकथन संदर्भ: हो सकता है कि नाओमी के पुनःस्थापन में खरे हुए विश्वास से प्रभावित होकर, यहोवा के वादों के पूरा होने का संकेत मिलता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षिप्त स्पर्श
1) रुचिर उद्धरण: यह वह समय है जब परिवार का पुनःस्थापन होता है; कृपा से बनी सुरक्षा और आशा एकत्र होकर नया घर बनाते हैं।
2) एक अन्य संदर्भ: पुराने वचन में परिवार के भागीदारी और रक्षा के मार्ग दिखते हैं—यह कहानी दिखाती है कि दयालुता कैसे पवित्र विधान के अनुसार सामाजिक पुनर्गठन का आधार बनती है।
3) तीसरा संदर्भ: दया और वंश परंपरा का महत्व—जहाँ मोड़ पर भी ईश्वर के उद्देश्य एक स्थिर पहचान देते हैं।
व्यावहारिक विचार
1) कठिन समय में विश्वास बनाए रखें; अक्सर ईश्वर हमारी अस्थिरताओं के बीच भी सुरक्षा और नई आशा देते हैं।
2) समुदाय-निर्माण और सहायता का महत्व: परिवार और समाज मिलकर असफलताओं को पार करते हैं।
संक्षिप्त समापन
यह वचन नाओमी के लिए एक नई शुरुआत की घोषणा है—यहोवा ने उसकी तकलीफों को घुलाकर एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की कड़ी थाम दी। राहा की तरह यह भी बतलाता है कि ईश्वर के नियंत्रण में हर घड़ी परिवर्तन संभव है, और हमारा परम लक्ष्य संतोष और सामुदायिक जीवन में उन्नति है।
मैथ्यू हेनरी: उद्धार-परिदृश्य में परमेश्वर की कृपा के प्रवाह की ओर संकेत।
एल्बर्ट बार्न्स: परिवार-निर्माण और समुदाय के पुनर्निर्माण पर टिप्पणी।
एडम क्लार्क: दुःख के बीच आशा का संदेश और कुटुम्ब के महत्व पर विचार।