Old Testament
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रूत 4:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब वह उस छुड़ानेवाले कुटुम्बी से कहने लगा, “नाओमी जो मोआब देश से लौट आई है वह हमारे भाई एलीमेलेक की एक टुकड़ा भूमि बेचना चाहती है।
रूत 4:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रूत 4:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 112:5 (HINIRV) »
जो व्यक्ति अनुग्रह करता और उधार देता है, और ईमानदारी के साथ अपने काम करता है, उसका कल्याण होता है।

नीतिवचन 13:10 (HINIRV) »
अहंकार से केवल झगड़े होते हैं, परन्तु जो लोग सम्मति मानते हैं, उनके पास बुद्धि रहती है।
रूत 4:3 का संदर्भ और उसके निकटतम अर्थ
पाठ के तत्काल क्रम में मीशेलत: नाओमी मोआब देश से लौट आई है और वह अपने पूर्वजों की जमीन, याकूब के परिवार की धारणा से जुड़ी परंपराओं के भीतर एक दायित्व और आशा के साथ उसकी स्थिति को देखते हैं। यहाँ छुड़ानेवाले के कुटुम्बी से कहा गया है कि वह नाओमी की टुकड़ा भूमि को खरीदना चाहता है—यानी रिश्वत नहीं, बल्कि कानूनी और सामाजिक व्यवस्था के भीतर एक समझौता, ताकि नाओमी और उसकी बहनों के परिवार की सुरक्षा बनी रहे।
ताकि ईश्वर ने क्या दिखाया?
यह वाक्य न सिर्फ एक आर्थिक विनिमय की बात है, बल्कि यह यह दर्शाता है कि ईश्वर की सूझ-बूझ किस प्रकार से समाज के कमजोर वर्ग के लिए व्यवस्था बनाती है। नाओमी के लौटने के साथ उसके परिवार की सुरक्षा और विरासत बनना भी परमेश्वर की योजना का एक भाग दिखती है। जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह ऐसे नियमों के भीतर होता है जो गरीब, विधवा और वृद्धों के हित के लिए संरक्षित हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य सुसंगत passages (संक्षेप में)
— ऋ२:८–१२ में बैक-अप व्यवस्था के रूप में गोड़ा-गोद लेने और खाते-पीते नियमों की चर्चा मिलती है, जो यह दिखाती है कि समुदाय के भीतर सुरक्षा और न्याय कैसे संरक्षित होते हैं।
— रु 2:20 में नाओमी की संदर्भ-स्थिति और बोहज़ के कारण परिवार की सुरक्षा का पथ और भी स्पष्ट होता है।
— Rut 3:12–13 में रिश्तेदारी का नयापन और क्रिया-प्रणाली की गहराई दिखती है, जो यह संकेत देती है कि परमेश्वर की योजना हमेशा एक समुदाय के भीतर न्यायपूर्ण क्रम बनाती है।
आज की toepassing
इस पाठ से सिख मिलता है कि कठिन परिस्थितियों में भी समुदाय-निष्ठा, सुरक्षा और व्यावहारिक कानून आवश्यक होते हैं। गरीब या अकेले पड़े लोगों के लिए सुरक्षित भूमि-बंध और सामाजिक दायित्व निभाने से समाज मजबूत बनता है—यही वर्तमान में भी हमारी मानवीय और नैतिक जिम्मेदारी है।
महत्वपूर्ण उद्धरण ( public-domain टिप्पणीकारों से)
यह भाग đạo-परंपरा से जु़ड़ा है, जहाँ मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचार मूल बातें में समाहित किए गए हैं। नीचे केवल संक्षिप्त संकेत हैं; पूरा उद्धरण साइट पर उपलब्ध नहीं है:
• मैथ्यू हेनरी: “घूमती परिस्थितियाँ भी परमेश्वर के क्रम के भीतर हैं, ताकि हर पिता-समूह और घर-बार में न्याय हो।”
• एल्बर्ट बार्न्स: “कानूनी व्यवस्था का उद्देश्य है कि कमजोरों को सुरक्षा मिले, और यह कहानी इसी व्यवस्था के भीतर एक चरण दिखाती है।”
• एडम क्लार्क: “बाज़ार और भूमि की खरीद-फरोख्त भी समाज के नैतिक ढांचे का भाग है, जहाँ धर्म-पथ के अनुसार प्रत्येक सदस्य का दायित्व निभाया जाता है।”
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
• रोम 8:28 — परमेश्वर की योजना में सभी घटनाओं का उद्देश्य विश्वासियों के लिए भला है।
• लेवी 25 — ज़मीन का पुट-परिवर्तन और कृषक-उद्धार के नियमों के पीछे का उद्देश्य।
• रु 2:20 — नाओमी और रिश्तेदारों के बीच सुरक्षा और आशा की परंपरा का संकेत।