Old Testament
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रूत 4:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और सलमोन से बोआज, और बोआज से ओबेद,
रूत 4:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 4:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 1:5 (HINIRV) »
सलमोन और राहाब से बोआज उत्पन्न हुआ, और बोआज और रूत से ओबेद उत्पन्न हुआ, और ओबेद से यिशै उत्पन्न हुआ।

लूका 3:32 (HINIRV) »
और वह यिशै का, और वह ओबेद का, और वह बोआज का, और वह सलमोन का, और वह नहशोन का, (रूत 4:20-22)

रूत 4:21 का पठन-संदेश: संदर्भ में एक संक्षिप्त विवेचन
रोते-चिपटते वर्षों के बाद यह वाक्यांश एक परिवार-निर्माण और दयालु बंधुत्व की कहानी की समापन-सीमा की ओर संकेत करता है। रुत 4 अध्याय नबोती-प्रसंग में पहुँचे हुए दत्तक-व्यक्तित्वों की पंरपरा को उद्घाटित करता है— केंटली में परिश्रम, निष्ठा और नातेदारों के बीच का आपसी सम्मान। इस पद में सलमोन के पुत्र बोआज के साथ यह क्रमित श्रृंखला दिखाई देती है: बोआज से ओबेद तक के राजनैतिक और पारिवारिक पंक्ति का विवरण आगे बढ़ता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दयालुता और सचेत उत्थान से परिवार स्थिर होता है।
मुख्य अर्थ और संदेश
यह वाक्यांश दूत-चक्र में एक देहात-जोड़े के जुड़े रहने की पुष्टि करता है—Salmon (Salmon?) को यहाँ संभवतः “सलमोन से बोआज” के रूप में समझना चाहिए, जो कि रुत के दत्तक-पूर्वज और उसके परिवार का संबंध दर्शाता है। बारीकी से देखें, तो यह पंक्ति यह बताती है कि रूत के प्रति वफादारी और नबी-वंश की भीतरी पंक्ति किस प्रकार आगे बढ़ती है—क्योंकि बोआज ओबेद तक की पूर्वकथा एक नये परिवार की स्थापना का क्रम है। यह प्रसंग धर्म-परिवार के भीतर उत्तराधिकार और सामाजिक-आचरण की पुष्टि करता है: कर्तव्यपूर्वक सेवा, सच्ची निष्ठा और अनुशासन से समाज में स्थिरता बनती है।
तीन प्रमुख विषय
संदर्भ-चित्र और क्रॉस-रेफरेंसे
1) रूत 1:16-17 — यह बताता है कि रूत ने निष्ठा से न केवल मूर्ति-रूढ़ रीति बल्कि परिवार के लिए योगदान की commitment दिखाई। इसका संबंध इस अध्याय के उद्देश्य से है कि कैसे व्यक्ति अपने परिचितों के लिए जीवन-उपहार देता है।
2) Rut 2:1-3 — रूत के सामाजिक-उन्नति के पीछे की दिशा और बोआज जैसे पात्रों के साथ उनका सहयोग दिखाता है कि कैसे दयालुता और मेहनत एक वंश-रेखा की नींव बनाते हैं।
3) Rut 4:13-17 — रूत के परिवार के साथ जुड़ाव और नयी पीढ़ी का जन्म—यह अनुभाग इस दृष्टि को पुष्ट करता है कि ईश्वर की योजना मनुष्य के सहयोग से आगे बढ़ती है।
व्यावहारिक चिंतन
इस वंश-वृक्षीय भाग से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि अपने नाते-रिश्तेदारों के प्रति निष्ठा, जिम्मेदारी और मदद का हाथ बार-बार जीवन के मार्ग प्रशस्त करता है। छोटी-छोटी सेवाओं में भी ईश्वर के उद्देश्य की पूर्ति की जा सकती है; जैसे कि बोआज जैसे पात्र सामाजिक-धर्म के अनुरूप आगे बढ़ते हैं, वही हमें भी अपने परिवेश में न्याय और दया के साथ कदम बढ़ाने को कहते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
रूत 4:21 में वंशावलि के क्रम की पुष्टि भली-भांति होती है: सलमोन से बोआज और बोआज से ओबेद तक—यह गाथा यह दिखाती है कि ईश्वर अपनी योजना में मानव रिश्तों को एक कुशल और पवित्र मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं, जहाँ वफादारी, मेहनत और अनुकम्पा से नया परिवार और नया जीवन बनता है।