Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीरूत 4:22 बाइबल पद की व्याख्या
रूत 4:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और ओबेद से यिशै, और यिशै से दाऊद उत्पन्न हुआ। (मत्ती 1:4-6, लूका 3:31-32)
रूत 4:22 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 4:22 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 16:1 (HINIRV) »
यहोवा ने शमूएल से कहा, “मैंने शाऊल को इस्राएल पर राज्य करने के लिये तुच्छ जाना है, तू कब तक उसके विषय विलाप करता रहेगा? अपने सींग में तेल भर कर चल; मैं तुझको बैतलहमवासी यिशै के पास भेजता हूँ, क्योंकि मैंने उसके पुत्रों में से एक को राजा होने के लिये चुना है*।” (लूका 3:31-32)

यशायाह 11:1 (HINIRV) »
तब यिशै* के ठूँठ में से एक डाली फूट निकलेगी और उसकी जड़ में से एक शाखा निकलकर फलवन्त होगी। (प्रेरि. 13:23, यिर्म. 23:5, प्रका. 22:16)

रotyp: रूत 4:22 पर संकेत— दाऊद तक की वंशावली
मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु: रूत 4:22 का बड़ा संदेश यह है कि बंधुत्व और विश्वासयोग्यता के कारण न केवल रूत की कहानी आगे बढ़ती है, बल्कि यह दाऊद के राजा पद तक की वंशावली बनाती है। इस वंशावली से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों के इतिहास के बीच सामान्य-सी घटनाओं को भी उद्धार-यात्रा से भर देता है; यह यथार्थ बताता है कि कैसे एक मौलिक धागा— रूत की आस्था-परिवर्तन और बोए हुए भरोसे— अंततः दाऊद तक पहुँचता है। साथ ही यह यहूदी मानक में भविष्य के मसीहि-सम्बन्ध की प्रतीक-रेखा भी बनाता है।
कथात्मक पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पंक्ति Rut (रूत) की कहानी के अंत में आती है, जहाँ ओबेद से यिशै और यिशै से दाऊद उत्पन्न होते हैं। यह दाऊद के वंशावली की पुष्टि करती है— न कि केवल एक राजा की व्यक्तिगत कथा, बल्कि ईश्वरीय योजना की रेखा जो भविष्य के उद्धार मसीह तक जाती है। इस संदर्भ में, पुस्तक Rut सामान्यतः एक लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह विश्वास-प्रेरणा और सामाजिक-न्याय के गुणों पर बल देती है: नन्ही चीजें भी ईश्वर के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण बन जाती हैं जब वे विश्वास के साथ चलती हैं।
गर्भित विचार: धर्मशास्त्रीय महत्त्व
रूत 4:22 का क्रमांकित वंशावली यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर प्रत्येक पीढ़ी के लिए योजना बनाते हैं— चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों। दाऊद के पूर्ववर्तियों का उल्लेख यह संकेत देता है कि प्रभु का वाचा-सम्बन्ध एक निर्धारित मार्ग पर चलता है, जिसमें समाज की स्थिरता और न्याय-प्रिय शासन का चित्रण है। यह तथ्य भी इंगित करता है कि प्रभु के उद्देश्य में विदेश-पीड़ित और mundane समाजों की स्थिति भी शामिल है, क्योंकि रूत और नोमी की कथा में सामाजिक-आर्थिक सीमाओं के बीच वंश-बीज बनने का आदर्श है।
अनुसंधान-सम्बन्ध (Cross-references) और छोटी व्याख्या
अध्यात्मिक उद्देश्य और प्रश्न
- विश्वास और दया: रूत की कहानी में दिखती है कि न सिर्फ जन्मजात वंश बल्कि आचरण और विश्वास की विरासत भी महत्त्वपूर्ण है।
- उत्तरदायित्व: समुदाय में एक-दूसरे के साथ रिश्ते और सामाजिक-आर्थिक बाधाओं के बावजूद न्याय-पूर्ण व्यवहार कैसे संभव होता है।
- पूर्णता की आशा: दाऊद तक पहुँचने वाला यह वंश-वृत्त भविष्य में आने वाले उद्धार-कार्य की प्रतीक-रेखा है।
संक्षेप निष्कर्ष
रूत 4:22 दर्शाता है कि परमेश्वर अपनी वाचा को इतिहास की छोटी-छोटी घटनाओं से पुष्ट करते हैं। रूत के चयन से लेकर दाऊद की वंशावली तक, यह कहानी विश्वास के लिए एक दैवीय धागा बुनती है जो आने वाले समय के मसीह-उत्तर को इंगित करती है। यह न केवल एक राजवंश की सूची है, बल्कि ईश्वर की नीति और समुदाय के भीतर न्याय-स्थापना का एक जीवंत प्रमाण है।
उद्धृत साहित्य से संक्षेप अंतर्दृष्टि
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-उद्धरणों को देखते हैं, तो वे आमतौर पर इस प्रकार की “वंशावली के महत्त्व” पर बल देते हैं: यहूदियों के इतिहास में नैतिक-आत्म-निर्माण और विश्वास-आचरण के महत्व को स्थापित करते हैं। उनके विचारों का संयुक्त प्रभाव यह है कि जन्म-से-राजा तक की यात्रा में ईश्वर की चेष्टा और मानव-प्रतिक्रिया एक साथ काम करती है, और यह सन्देश देता है कि दयालुता और निष्ठा से भरे छोटे कदम भी एक बड़े लक्ष्य को पूरक बनाते हैं। (उद्धरण के लिए पंक्तियाँ केवल संदर्भ के तौर पर उद्धृत की जाएँ, पूर्ण टेक्स्ट न दें.)