Old Testament
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रूत 4:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उस छुड़ानेवाले कुटुम्बी ने कहा, “मैं उसको छुड़ा नहीं सकता*, ऐसा न हो कि मेरा निज भाग बिगड़ जाए। इसलिए मेरा छुड़ाने का अधिकार तू ले ले, क्योंकि मैं उसे छुड़ा नहीं सकता।”
रूत 4:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 4:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लैव्यव्यवस्था 25:25 (HINIRV) »
“यदि तेरा कोई भाईबन्धु कंगाल होकर अपनी निज भूमि में से कुछ बेच डाले, तो उसके कुटुम्बियों में से जो सबसे निकट हो वह आकर अपने भाईबन्धु के बेचे हुए भाग को छुड़ा ले।

रूत 3:13 (HINIRV) »
अतः रात भर ठहरी रह, और सवेरे यदि वह तेरे लिये छुड़ानेवाले का काम करना चाहे; तो अच्छा, वही ऐसा करे; परन्तु यदि वह तेरे लिये छुड़ानेवाले का काम करने को प्रसन्न न हो, तो यहोवा के जीवन की शपथ मैं ही वह काम करूँगा। भोर तक लेटी रह।”
रूत 4:6 पर टिप्पणी — संदर्भ से अर्थ
पश्चिमी प्रमुख कथा में रूत के प्रति दामोथ के सामने एक वैधानिक उत्तराधिकारी की परंपरा उभरती है। इस verse में छुड़ानेवाला कहता है कि वह खुद उद्धार नहीं कर सकता क्योंकि उसका हिस्सा खतरे में पड़ सकता है; अतः वह अधिकार दूसरे को सौंपने की संस्तुति करता है ताकि प्रभु के नियम के अनुसार कुटुम्ब और खेत की सुरक्षा बनी रहे। यह दृश्य रूत, नाओमी और बूती-के-तीसरे व्यक्ति भय्यू के बीच एक सामाजिक-परिवारिक कर्तव्य की वास्तविकता को दर्शाता है—यानी किस प्रकार एक रिश्ते और अधिकार एक साथ चलते हैं ताकि विरासत और सुरक्षा बनी रहें।
मुख्य अर्थ
इस verse में एक ऐसे सामाजिक ढांचे की बात है जिसमें उत्तराधिकार और विवाह-बंधन को कानून के अनुसार सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है। छोड़ने या छोड़ दिए जाने की बात नहीं, बल्कि अधिकार का स्थानांतरण ताकि किसी पारिवारिक जिम्मेदारी—जैसे नयी बहू का संरक्षण और कुटुम्ब के निर्वाह—में बाधा न पड़े। उद्धारकर्ता यह कहकर स्पष्ट करता है कि वह अपना भाग नहीं ले सकता; इसलिए वह आग्रह करता है कि जो दूसरा है, वह इस अधिकार को ग्रहण करे ताकि विरासत और सुरक्षा संरक्षित रहें।
मुख्य विषय
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
- रोबी: रूत 3 के अंत और नातनी विवाह (रेडेप्शन-योजना) से सम्बद्ध; यह दिखाता है कि कैसे अधिकार और सुरक्षा नई रोशनी में बदलते हैं।
- रोम 8:28-30: परमेश्वर की योजना के अनुसार, हर चीज कुछ न कुछ अच्छे के लिए काम करती है—कंटेक्स्ट में यह दिखाता है कि किस प्रकार हर कदम ईश्वरीय व्यवस्था के अनुरूप होता है।
- Rut 4:13-17: छूटे नहीं, बल्कि विवाह और परिवार का पूर्ण पुनर्गठन—कुटुम्ब की सुरक्षा और दयालुता के साथ।
पारिवारिक-आचरण का पाठ
इस verse के भीतर एक व्यावहारिक संदेश है: जब हमारे पास अधिकार हों, तब भी हमारा भाग लेने के तरीके को सामाजिक और धार्मिक नियमानुसार ही तय करना चाहिए ताकि कमज़ोरों के लिए सुरक्षा बनी रहे। जो व्यक्ति अधिकार दे रहा है, उसे विनम्रता और विवेक के साथ ऐसा कदम उठाना चाहिए कि भविष्य की हिंसा या अन्याय से बचा जा सके।
संक्षेप सार
रूत 4:6 हमें दिखाता है कि पारिवारिक सुरक्षा और विरासतीय नियम कैसे एक साथ चलते हैं। उद्धारकर्ता का यह कहना कि वह अपने भाग को नहीं ले सकता, और दूसरे के अधिकार के स्थानांतरण की बात, इस सत्य को पुष्ट करती है कि ईश्वरीय योजना में कुटुम्ब की संरचना और सुरक्षा सर्वोपरि है—यह एक सामाजिक-नैतिक संरचना है जो बारीकी से न्याय और दया को संतुलित करती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (एजेंट-ओफ-टेक्निकल)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से यह पाठ एकीकृत रूप से लिया गया है। उनके मौजूदा रचनात्मक सार इस प्रकार समाहित है: उद्धारकर्ता के अधिकार-स्थानांतरण के माध्यम से परिवार की सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था की नींव पोषित होती है; इस प्रकार के निर्णय में निष्ठा और विवेक का संयुक्त प्रयोग आवश्यक है।
प्रत्येक संदर्भ के लिए तात्पर्य यह है कि अधिकार के हस्तांतरण का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि समुदाय की सुरक्षा और ईश्वरीय योजना के अनुरूप जीवन-दर्शन को बनाए रखना है।