Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
उत्पत्ति 39:1 उत्पत्ति 39:2 उत्पत्ति 39:3 उत्पत्ति 39:4 उत्पत्ति 39:5 उत्पत्ति 39:6 उत्पत्ति 39:7 उत्पत्ति 39:8 उत्पत्ति 39:9 उत्पत्ति 39:10 उत्पत्ति 39:11 उत्पत्ति 39:12 उत्पत्ति 39:13 उत्पत्ति 39:14 उत्पत्ति 39:15 उत्पत्ति 39:16 उत्पत्ति 39:17 उत्पत्ति 39:18 उत्पत्ति 39:19 उत्पत्ति 39:20 उत्पत्ति 39:21 उत्पत्ति 39:22 उत्पत्ति 39:23



उत्पत्ति 39:17 पर commentary (HINIRV)
पूर्वक कहानी: परमेश्वर के विश्वस्त दास यूसुफ की कहानी के बीच में याकूब के परिवार के भीतर की वृद्धि होने लगती है, परन्तु उसकी असल परीक्षा उसकी निष्ठा और रक्षा को दिखाती है। इसverse में पुतलियों और झूठे आरोपों के बीच एक ऐसी घटना दिखती है जिसमें परिवार के सदस्य, दास, और मिस्र की सामाजिक व्यवस्था सभी उलझ जाते हैं।
पद का पाठ और परिचय
उसने उससे इस प्रकार की बातें कही, “वह इब्री दास जिसको तू हमारे पास ले आया है, वह मुझसे हँसी करने के लिये मेरे पास आया था;
यह वाक्य उस समय का है जब पोटोफर के घर में जो कुछ घटित होता है, वह यूसुफ के साथ जुड़ता है। पिता के प्रिय पुत्र के प्रति अकृत्रिम विश्वास बनाम घरेलू वातावरण की कठिनाइयों के बीच, दास के तौर पर यूसुफ पर लगाए गए आरोप reflect करता है कि उसकी इज्जत और चेतावनी कैसे परीक्षण में डाली जाती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) सत्य-परीक्षित चरित्र बनाम अस्थायी परिस्थितियाँ: हर स्थिति में भी जो वास्तव में सही है, वही आंतरिक चरित्र है जो स्थिर रहता है। यूसुफ ने नहीं कहा कि वह निर्दोष है; फिर भी उसकी आस्था और परमेश्वर पर विश्वास उसे आगे बढ़ाता है।
2) भय और शक की राजनीति: घर के अंदर की राजनीति, दास-स्वामीनता, और मानवीय गलतफहमी व्यक्तिगत आस्तिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। परमेश्वर की ओर से विश्वास बना रहने पर ही मुक्ति मिलती है।
अन्य पवित्र ग्रंथों से तुलनात्मक विचार
- यूसुफ की आपबीती में, समान ढंग से पिता द्वारा दया और भाइयों की ईर्ष्या की भूमिका मिलती है; यह संकेत देता है कि परमेश्वर के उद्देश्य मानव अवरोधों के ऊपर उच्च रहते हैं।
- दूसरे पवित्र ग्रंथों में दासता, आरोप और विवेक के संघर्ष मिलते हैं; जैसे कहीं-कहीं सत्य को दबाने का प्रयास होता है, पर परमेश्वर की योजना आगे बढ़ती है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप) और संपर्क
- उत्पत्ति 37–39: प्रेरक पात्रता और परीक्षण का क्रम, जो यूसुफ की विनम्रता और ईमानदारी को उजागर करता है।
- प्रेरितों के काम 5: दिखाता है कि क्यों सत्य के प्रेम में आशीष मिलती है जब लोग गलतफहमी से बाहर निकलते हैं।
- यशायाह 30:21: जब आप दायरे में गुम हों, तो एक धीमी, पर निश्चित मार्ग दिखता है।
सारांश
यह वाक्य दर्शाता है कि यूसुफ के समक्ष जो आरोप लगे, वे परिस्थिति के कारण थे, परन्तु उसका आन्तरिक धैर्य और परमेश्वर की योजना अंततः सत्य को बनाए रखते हैं। यह पाठ हमें सिखाता है कि अस्थायी बहानों के भीतर भी निष्कलंक चित्त बनाए रखें और परमेश्वर की कृपा पर भरोसा रखें।
नोट: इस लेख में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो शॉर्ट-quote के रूप में उल्लेखित होंगे।