उत्पत्ति 39:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब से उसने उसको अपने घर का और अपनी सारी सम्पत्ति का अधिकारी बनाया, तब से यहोवा यूसुफ के कारण उस मिस्री के घर पर आशीष देने लगा; और क्या घर में, क्या मैदान में, उसका जो कुछ था, सब पर यहोवा की आशीष होने लगी।

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उत्पत्ति 39:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

Immediate Setting: यूसुफ के प्रभुत्व के साथ मिस्री घर में आशीष

उत्पत्ति 39:5 में यह दर्ज है कि जब Potiphar ने यूसुफ को अपने घर का और अपनी सारी संपत्ति का अधिकारी बना दिया, तब से परमेश्वर यहोवा यूसुफ के कारण मिस्री के घर में आशीष देने लगा। चाहे घर हो या खेत, हर इक चीज पर यहोवा की आशीष बढ़ती चली गई। इस संदर्भ में यूसुफ का व्यक्तित्व और उसका ईश्वर-विश्वास संदेश संदेष्ट बनता है कि दृढ़ समर्पण और नैतिकता से क्यों नयी परिस्थितियाँ भी संभाली जा सकती हैं और ईश्वर की कृपा कैसे बाँटना प्रारम्भ होता है।

पाठ से प्रभुवादी आशीष और विश्वास की शिक्षा

यहाँ दिखता है कि एक व्यक्ति की निष्ठा, ईमानदारी और परमेश्वर के प्रति वफादारी कैसे दायरे के बाहर भी प्रभाव डालती है। Potiphar के घर में यूसुफ की प्रामाणिक आचरण और कार्य-निष्ठा ने भाग्य को मोड़ दिया: “यूसुफ के कारण” घर की सारी संपत्ति, खेत-खलिहान, हर वस्तु पर ईश्वर की आशीष फैल गई। यह बतलाता है कि ईश्वर उन लोगों के साथ रहता है जो उनके नाम पर जीते हैं और उनके उद्देश्य के अनुरूप कार्य करते हैं। यहोवा की आशीष मानवीय प्रयास के बिना नहीं, बल्कि उनके विश्वास और नैतिकता के साथ जुड़कर फैलती है।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों का स्पष्टीकरण

  • ": यह एक ऐसी कृपा है जो काम, परिवार और संपत्ति में समृद्धि के रूप में प्रकट होती है, और यह परमेश्वर के चित्त की दिशा को दर्शाती है—जो विश्वासियों के जीवन के हर क्षेत्र को अनुपम बनाती है।
  • (household and estate): यूसुफ के प्रभावशाली चरित्र के कारण मिस्री घर के प्रशासनिक प्रभारी बनना, यह बतलाता है कि ईश्वर कर्म-स्वभाव के साथ-साथ मानवीय व्यवस्था में भी भूमिका निभाते हैं।

अनुशासन से जुड़ी क्रॉस-रेफरैंसेस

यह कथा नीचे दी गई अन्य संदर्भों से संबंध रखती है:

  • उत्पत्ति 39:2-3— यूसुफ का परमेश्वर के साथ रहते हुए सफलता पाना, और धीरे-धीरे घर के मालिक Potiphar का विश्वास बढ़ना। यह दिखाता है कि ईश्वर की उपस्थिति किस तरह जीवन के हर पहलु में वास्तविक प्रभाव डालती है।
  • उत्पत्ति 39:21-23— जेल की अवस्था में भी ईश्वर का साथ बना रहने से यूसुफ की प्रतिष्ठा और प्रभाव बढ़ता है; यह यह दर्शाता है कि आशीष विपरीत परिस्थितियों में भी बनी रहती है।
  • उत्पत्ति 50:20— पचाने योग्य पाठ: बुराई फिर भी भयभीत नहीं, क़दम-क़दम पर ईश्वर की योजना पूरी होती है; प्रसंगगत प्रेरणा देती है कि विपदा कैसे भी हो, ईश्वर का उद्देश्य पूरा होता है।

आज के जीवन के लिए अनुप्रयोग

  • ईश्वर पर पूर्ण भरोसा और ईमानदार जीवन—यूसुफ की तरह: असफलताओं में भी सत्य और चरित्र बनाए रखें; परिणाम चाहे जो हों, ईश्वर आपके कर्मों से जुड़े रहते हैं।
  • कार्य-स्थल में नैतिकता का प्रभाव: कठोर परिस्थितियों में भी सच बोलना, परिश्रम करना और विश्वस्ताना बनना सबसे बड़ा आशीष बनता है।
  • परमेश्वर की कृपा का दायरा: आशीष परिवार, संपत्ति और समुदाय के माध्यम से फैली, अगर हम ईश्वरीय मार्ग पर चलें।

Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की संवाद-युक्त प्रेरणा

इस पाठ पर विचार करते समय इन पूर्व-जीवनी टिप्पणियों से प्रेरणा मिलती है:

Matthew Henry टिप्पणी में यीशु द्वारा दिखाए गए चरित्र की दृढ़ता को मानती है—सत्यनिष्ठा और पवित्र जीवन से ईश्वर अपनी कृपा खोलते हैं, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

Albert Barnes ने यह स्पष्ट किया है कि यूसुफ की प्रबल विश्वासगति और नैतिकता ने उसके चारों तरफ की परिस्थिति को दिशा दी; यह आशीर्वाद सीधे उसके पवित्र कर्मों से जुड़ा है।

Adam Clarke ने नोट किया कि ईश्वर की आशीष तब खुलती है जब व्यक्ति अपने उद्देश्य के अनुरूप जीवन व्यतीत करता है, और यह घर-परिवार के वातावरण को भी चिंतनशील बनाती है।

नोट: नीचे दी गई संक्षिप्त उद्धरण केवल संदर्भ हेतु हैं:

“यहोवा यूसुफ के कारण मिस्री के घर पर आशीष देता रहा” — यह एक सामान्य सार है जो इन टिप्पणीकारों के समेकित विचारों के आधार पर प्रस्तुत है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 39:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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लाबान ने उससे कहा, “यदि तेरी दृष्टि में मैंने अनुग्रह पाया है, तो यहीं रह जा; क्योंकि मैंने अनुभव से जान लिया है कि यहोवा ने तेरे कारण से मुझे आशीष दी है।”

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यहोवा का सन्दूक गतवासी ओबेदेदोम के घर में तीन महीने रहा; और यहोवा ने ओबेदेदोम और उसके समस्त घराने को आशीष दी।

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‘हे पौलुस, मत डर! तुझे कैसर के सामने खड़ा होना अवश्य है। और देख, परमेश्‍वर ने सब को जो तेरे साथ यात्रा करते हैं, तुझे दिया है।’

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