Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
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अर्थ का स्पष्ट सार
उत्पत्ति 48:19 में याकोब ने अपने पुत्र यूसुफ के बेटों का भाग-भाई-भाव बताने के क्रम में कहा है कि दायें हाथ से आशीष पाने वाला पहला पुत्र नहीं, बल्कि छोटा बेटा ही अंतिम में बड़ा होगा और उसकी संतान से अनेक जातियाँ पनपींगी। यह दर्शाता है कि परमेश्वर की योजना मानवीय परंपरा से ऊपर है और वंश-वर्धन में प्राकृतिक क्रम का उलटफेर संभव है, यदि परमेश्वर की प्रेरणा से हो।
पृष्ठभूमि
याकूब अपने पुत्र जोसेफ के दो पुत्र, मानुषी से बेटी नहीं, बल्कि उनके पुत्र हों—मान लिया गया है कि यह बताने का समय है कि कैसे आशीर्वाद का प्रभाव चयनित उत्तराधिकारों को निर्धारित कर सकता है। जोनाथन के बजाय यह शिशु-जाति, अर्थात ईष्वर की चयनित योजना, आगे चलकर इस्राईल के दोनो भागों के बीच नेटवर्क बनाती है।
महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
थीमेटिक बिंदु
अनुष्ठानिक सम्बन्ध और क्रॉस-रेफरेंस
1) उत्पत्ति 25:23 — माता-पिता के आशीर्वाद की आवृति में परमेश्वर का चयन स्पष्ट होता है।
2) वास्तविकता में 1 सामर्थ्य 3:9 — आशीर्वाद का प्रभाव परिवार के भविष्य-निर्धारण में कैसे काम करता है, यह दिखता है।
3) पुत्र-प्राधान्य के विपरीत 1 राजा 2:7 — राजा के चयन का मॉडल जो परमेश्वर की कृपा से तय होता है, मानव नियमों से अलग हो सकता है।
संक्षेपित व्यावहारिक निष्कर्ष
हम साक्षात अनुभव कर सकते हैं कि परमेश्वर की योजनाओं में हमारे मानक सामाजिक मानदंड नहीं चलते। धैर्य और विश्वास के साथ, हम देखेंगे कि ईश्वर किस तरह से कमजोर या छोटे कदमों से आगे बड़े आशीष तक पहुँचाते हैं।
संक्षिप्त संदर्भ-सम्बन्ध:
नोट: नीचे दिये गए उद्धरण पंक्तियाँ Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से उपलब्ध होने पर ही बताए गए हैं। इस अनुवाद के भीतर सीधे पाठ नहीं दिया गया है; केवल उनका मूल्यांकन-संयोजन शामिल है।