Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
उत्पत्ति 48:1 उत्पत्ति 48:2 उत्पत्ति 48:3 उत्पत्ति 48:4 उत्पत्ति 48:5 उत्पत्ति 48:6 उत्पत्ति 48:7 उत्पत्ति 48:8 उत्पत्ति 48:9 उत्पत्ति 48:10 उत्पत्ति 48:11 उत्पत्ति 48:12 उत्पत्ति 48:13 उत्पत्ति 48:14 उत्पत्ति 48:15 उत्पत्ति 48:16 उत्पत्ति 48:17 उत्पत्ति 48:18 उत्पत्ति 48:19 उत्पत्ति 48:20 उत्पत्ति 48:21 उत्पत्ति 48:22



उत्पत्ति 48:21 पर निहित प्रमुख विवेचना
यूसुफ के साथ इस्राएल की यह दृढ़ वाणी कि, “देख, मैं मरने पर हूँ परन्तु परमेश्वर तुम लोगों के संग रहेगा,” बिडंुत रूप से मरजी नहीं टूटती एक दृढ़ भक्ति और विश्वास का संकेत है। कुलगामी परिप्रेक्ष्य में यह पंक्ति यह दिखाती है कि पृथक-पृथक पीढ़ियाँ भी परमेश्वर की योजना के अंतर्गत एकता में बँधती हैं; यह एक भविष्यदर्शी अस्पष्टता से भरी हुई आशा नहीं, बल्कि सच्चे बंधन और वचन-विश्वास का प्रमाण है कि वही परमेश्वर अपने वंशजों के साथ है और उन्हें उनके पितरों के देश तक पहुँचाएगा।
काव्यात्मक और ग्रन्थ-संबद्ध संदर्भ
यह वाक्य उत्पत्ति के पुरुषोत्तरी कथा-रेखा में इस्राएल के जीवन-सार का एक निर्णायक क्षण है। जब यूसुफ अपने बेटों से यह कहता है कि उनके साथ रहते हुए पिता-पौरुष का आशीर्वाद और भविष्य की आशा बनी रहेगी, वह न केवल एक व्यक्तिगत इच्छा है, बल्कि परमेश्वर की वायदियों के साथ एक स्थिर विश्वास का उद्घोष है।
थियोलॉजिकल महत्व
यह वाक्य धार्मिक दृढ़ता की पुष्टि करता है कि मरने के बाद भी परमेश्वर अपने लोगों के साथ है और उनकी सुरक्षा व मार्गदर्शन के लिए सक्रिय रहता है। पिता की ठोस श्रद्धा की यह अभिव्यक्ति यह भी दर्शाती है कि सन्तानें विरासत के साथ-साथ दावेदारी और प्रेरणा पातीं हैं: परमेश्वर के साथ रिश्ते में एक परिवार की स्थिरता और नियत-रचना का सूत्र।
पवित्र शास्त्र के भीतर कनेक्शन
आत्म-संवाद के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
उत्पत्ति 48:21 में इस्राएल की दृढ़ आशा यह स्पष्ट करती है कि मृत्यु के भरम में भी परमेश्वर की सदा-सच्ची उपस्थिति और वचन-साहायता बनी रहती है। यह न केवल यूसुफ के समय की बात है, बल्कि प्रत्येक पीढ़ी के लिए है—परमेश्वर अब भी अपने लोगों के साथ है और उनके प्रवास को देश-देशांतर तक सँवारता है।
माउंट-हाथ के उद्धरण (पूर्व-शैलीCommentary सेordat)
मैथ्यू हेनरी से उपयोगी एक सामान्य विचार: परमेश्वर का साथ होना विश्वसनीयता और सुरक्षा का आधार है; यह जीवन के हर मोड़ पर आशा बनकर आता है।
एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के संकलन से पंक्तियाँ यह संकेत देती हैं कि मृत्यु के समय भी पिता-हृदय का आशीर्वाद और परमेश्वर की धर्म-निर्णय निर्मल रहते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए संरचना बनाते हैं।
उद्धृत स्वरों का उल्लेख
यदि आवश्यक हो, तो यह भाग केवल सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों के समान्य निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत किया गया है; प्रमुख सन्दर्भ-उद्धरण के लिए नीचे दी गई टिप्पणी-रेखा: “परमेश्वर तुम लोगों के संग रहेगा।”