उत्पत्ति 48:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और याकूब ने यूसुफ से कहा, “सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ने कनान देश के लूज़ नगर के पास मुझे दर्शन देकर आशीष दी,

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उत्पत्ति 48:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 48:3— Immediate Setting

यह पद यह दर्शाता है कि याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ से अपनी दिव्यदृष्टि का स्मरण कराया: परमेश्वर ने कनान देश के लूज़ नगर के पास मुझे दर्शन देकर आशीष दी। यह क्रम याकूब के बुजुर्गावस्था में परमदेव के साथ-संबंध के नये प्रमाण का संकेत करता है, जब दिव्य स्मारक अचानक आशीष बनकर आता है और पितृत्व के आशीर्वचन को पुष्ट करता है।

ईश्वर और विश्वास के बारे में यह पाठ क्या बतलाता है

इस टेक्स्ट से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने वचन और आशीष के प्रचारक हैं, भले ही परिस्थितियाँ कठिन दिखें। याकूब का स्मरण—“सर्वशक्तिमान परमेश्वर”—यह बताता है कि परमेश्वर सब कुछ कर डालने वाला है और वह अपने चयनित व्यक्तियों के जीवन में दिव्य भागीदारी बनाये रखता है। आशीष का संदर्भ संकेत देता है कि परमेश्वर का वचन व्यक्तिगत और विरासत-सम्बन्धी उद्देश्यों के साथ जुड़ा हुआ है; वह अपने निवासियों के अन्दर की सम्भावनाओं को पहचानता और उन्हें पुष्ट करता है।

महत्वपूर्ण शब्द एवं चित्र स्पष्ट करना

  • —हे परमेश्वर जो सब कुछ कर सकता है; यह याकूब की आस्था के उच्चतम स्वाद को व्यक्त करता है।
  • —यhaka के समय की भौगोलिक-प्रतीक, भरोसे और आशीष के उद्देश्य को दर्शाता है; परमेश्वर जो सीमाओं को पार कर सकता है।
  • —परमेश्वर की व्यक्तिगत क्रिया और उसका आदेश-प्रेषण; यह आशीष याकूब के पितृत्व-स्तर से आगे बढ़कर भविष्य के इब्राहीमीय वंश के लिए प्रतीक बन जाती है।

संबद्ध पाठ और उनके संकेत

– प्रेरितों के आशीष का महत्व दिखाने वाले अन्य स्थान: परमेश्वर के वचन के वितरण और आशीष की प्रबलता—याकूब के प्रेरक शब्दों के पीछे एक ऐसा दर्शन है जो आगे की पीढ़ियों को ढाल देता है।

– पवित्र शास्त्र में आशीष का स्थान उन वचनों के साथ है जो पिता अपने बच्चों को देते हैं; यह पारिवारिक-संरचना में परमेश्वर की सहभागिता को दर्शाता है।

cross-reference (संक्षिप्त परिचय)

- जेन 28:15: परमेश्वर का वादा और मार्गदर्शन; पिता-पुत्र सम्बन्धों में आशीष का महत्व चलता है।

- उत्पत्ति 12:2-3: अब्राहम के आशीष के साथ विश्व-यात्रा का आरम्भ; परिवारों के लिए परमेश्वर का उद्देश्य स्पष्ट होता है।

- याकूब 1:18: परमेश्वर की आध्यात्मिक और बहुप्रयोजन आशीष की उत्पत्ति परमेश्वर के वरदान के अनुसार होती है।

आध्यात्मिक-आज की व्यावहारिक शिक्षा

- कठिन परिस्थिति में भी परमेश्वर की दिशा और आशीष की आशा बना रहनी चाहिए; वह हमारे अन्दर के अवसरों को पहचानता है।

- परिवार और समुदाय में पूज्य-पितृक भूमिका को सम्मान दें; आशीष एक-दूसरे के लिए प्रोत्साहन और धैर्य का स्रोत बन सकता है।

संक्षेप निष्कर्ष

उत्पत्ति 48:3 में याकूब का स्मरण कि परमेश्वर ने उन्हें दर्शन देकर आशीष दी, यह दिखाता है कि ईश्वर का निवास और वचन समय-समय पर व्यक्तियों के जीवन में क्रिया करता है। आशीष और आस्था, दोनों मिलकर भविष्य की पीढ़ियों के लिए भरोसे और अनुशासन का सूत्र बनते हैं।

नोट: इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes तथा Adam Clarke के समान विचारों से प्रेरित संकलित सार समाहित किया गया है; यदि किसी स्थान पर उनके स्पष्ट उद्धरण मिलते हैं, वे नीचे उद्धृत हैं:

– “...सर्वशक्तिमान परमेश्वर”—Henry/Clarke/Barnes के संदर्भ में किंचित शब्द-चयन के रूप में इस्तेमाल हुआ है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 48:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उत्पत्ति 17:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 17:1 (HINIRV) »
जब अब्राम निन्यानवे वर्ष का हो गया, तब यहोवा ने उसको दर्शन देकर कहा, “मैं सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर हूँ; मेरी उपस्थिति में चल और सिद्ध होता जा।

उत्पत्ति 35:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 35:9 (HINIRV) »
फिर याकूब के पद्दनराम से आने के पश्चात् परमेश्‍वर ने दूसरी बार उसको दर्शन देकर आशीष दी।

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उत्पत्ति 28:3 (HINIRV) »
सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर तुझे आशीष दे, और फलवन्त कर के बढ़ाए, और तू राज्य-राज्य की मण्डली का मूल हो।

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