उत्पत्ति 7:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पृथ्वी पर चालीस दिन तक जल-प्रलय होता रहा; और पानी बहुत बढ़ता ही गया, जिससे जहाज ऊपर को उठने लगा, और वह पृथ्वी पर से ऊँचा उठ गया।

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उत्पत्ति 7:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 7:17 पर दृष्टिकोण

इस आयत में प्रलय के तीसरे चरण का दृश्य आता है: चालीस दिन पृथ्वी पर जल का वर्षण रहता है, पानी बढ़ता जाता है और जहाज ऊपर उठने लगता है। यह घटना Noah के समय परमेश्वर के न्याय और क्रिपा दोनों का मिलन दर्शाती है। जल-प्रलय के पूरे प्रवाह में एक ठोस संकेत है कि पृथ्वी पर पाप के परिणाम कितने गहन होते हैं, परन्तु ईश्वर का भविष्य-निर्देशक हाथ विपरीत परिस्थितियों में भी उद्धार का मार्ग खोलता है।

प्यार और न्याय का संयोजन

यह वाक्या यह समझाता है कि परमेश्वर अपने लोगों को खतरे से निकालने के लिये एक सुरक्षित मार्ग बनाते हैं, जबकि बुराई पर कठोर दंड भी देतें हैं। चालीस दिन का जल-प्रलय एक प्रतीक है कि संकट कितने बड़े हों, पर परमेश्वर का विश्वासयोग्य हाथ स्थिर रहता है। इतिहास के इस भाग में Noah की आस्था और आज्ञापालन का केंद्र है: परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार नाव बनना और सुरक्षित बचना—यह विश्वास की पराकाष्ठा है।

मुख्यांश: verse के भीतर की अनुभूति

पृथ्वी पर जल का बढ़ना और नाव का ऊँचा उठना एक क्रमबद्ध, वात्सल्य-युक्त नियंत्रण दर्शाते हैं। परमेश्वर ने Noah के भरोसे को परिणाम तक पहुँचाने के लिये समय-जाल बनाया; नाव पृथ्वी की गिरफ्त से मुक्त होकर सुरक्षित उच्चतम पंक्ति तक जाती है। यह दर्शाता है कि ईश्वर अपने लोगों के लिए रास्ते बनाते हैं, भले ही परिस्थितियाँ अत्यंत विकट हों।

आध्यात्मिक शिक्षा: मुख्य पाठ

  • विश्वास की जोरदार परीक्षा में भी ईश्वर सहायता करते हैं; साहसपूर्वक आज्ञा मानना उद्धार का आधार बनता है।
  • निर्णय-निर्भर जीवन में परमेश्वर की योजना पर भरोसा रखना आवश्यक है, भले ही उपाए अदृश्य लगें।

अन्य बाइबिल संदर्भों से तुलना

- यिर्मयाह 29:11 की आशा-संवेदना से तुलना: किस प्रकार परमेश्वर अपने निवासियों की भलाई का चेष्टा करते हैं।

- मरकुस 4:35-41 में यीशु की नाव-परिक्रमा का चमत्कार: संकट के क्षणों में ईश्वर की सत्ता स्पष्ट होती है।

- 2 पतरस 3:10-13 में नये आकाश और नयी पृथ्वी का भविष्यसूचक संकेत: पृथ्वी के विनाश के बाद सुरक्षित उद्धार का केंद्रीय विचार।

व्यावहारिक आध्यात्मिक अनुप्रयोग

- कठिन समय में भी परमेश्वर के निर्देशों पर टिके रहें; यह विश्वास-यात्रा आपको सुरक्षित मार्ग देती है।

- विपत्ति के बीच आशा बनाए रखें कि परमेश्वर उद्धार का मार्ग खोलते हैं, चाहे रास्ते अस्पष्ट क्यों न लगें।

छोटे-से-छोटे क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप

- निर्माण-आयत: Noah ने परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार नाव बनाई; यह आज्ञाकारी जीवन का सार है।

- चमत्कार-समझ: प्रकृति-परिवर्तन के साथ परमेश्वर की सत्ता सामने आती है।

संक्षेप निष्कर्ष

उत्पत्ति 7:17 वह अवस्था है जहाँ प्रकृति के इस प्रकोप में भी विश्वास की कृपा से उद्धार का मार्ग खुलता है। Noah का निष्ठावान पालन और परमेश्वर की योजना का सामंजस्य हमें सिखाता है कि संकट में भी ईश्वर के निर्देशों को मानना और भरोसा रखना ही जीवन का सबसे सुरक्षित मार्ग है।

नोट: इस पंक्ति से Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षेप उद्धरण उपलब्ध होने पर उद्धृत हैं; पूर्ण वाक्यों के बजाय संदर्भ-आधे भाग उल्लेखित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 7:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि अब सात दिन और बीतने पर मैं पृथ्वी पर चालीस दिन और चालीस रात तक जल बरसाता रहूँगा; और जितने प्राणी मैंने बनाये हैं उन सबको भूमि के ऊपर से मिटा दूँगा।”

उत्पत्ति 7:12 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 7:12 (HINIRV) »
और वर्षा चालीस दिन और चालीस रात निरन्तर पृथ्वी पर होती रही।

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