Old Testament
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अर्थ का प्रत्यक्ष उल्लेख
उत्पत्ति 7:11 में कहा गया है कि नूह की आयु के छः सौवें वर्ष के दूसरे महीने का सत्रहवाँ दिन आया; उसी दिन बड़े गहरे समुद्र के सब सोते फूट निकले और आकाश के झरोखे खुल गए। इसका तात्पर्य यह है कि परमेश्वर की विनाशकारी वर्षा के कारण बर्ताव समाप्ति के समय अनेकों जलमार्ग खुल गए और पृथ्वी पर पानी का उद्गम एक साथ प्रकट हुआ।
पृष्ठभूमि और क्रमिक संदर्भ
यह घटना संसार के प्रारम्भिक इतिहास में पवित्र जलप्रलय की योजना को पूर्ण करने के क्षण से जुड़ी है। पूर्व में जल-संकट की चेतावनियाँ दी गई थीं; अब आकाश के झरोखे (आकाशद्वार) खुलना और समुद्रों की दोनों ओर से फटना—ये संकेत हैं कि परमेश्वर ने पृथ्वी की बिखरे परिस्थितियों को एक ही क्षण में समेटने का निर्णय लिया।
व्याख्यात्मक अवलोकन
उद्धृत लेखन से मिलते प्रमुख संकेत
इस पंक्ति में जल-विस्फोट की घटना समुद्रों और आकाश के साथ जुड़ी एक महत्वपूर्ण तिथि बन जाती है।
संकेत-आलेख (Cross-References) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
छोटा थीमैटिक सार
व्यावहारिक Takeaway
जब भी परमेश्वर अपने निर्णय से कुछ पुरानी चीज़ों को यथास्थित करता है, वह नयी आशा और आरम्भ का अवसर देता है। जीवन की आपातकालीन परिस्थितियों में भी परमेश्वर के नियंत्रण पर भरोसा रखें; भय के बजाय विश्वास द्वारा आगे बढ़ें।
संदर्भ-प्रेरणा
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायनामिक टिप्पणी-रायों से उपयुक्त अंश निम्न हैं:
Henry के शब्दों में सूचित किया गया है कि इस घटना के पीछे परमेश्वर की न्यायपूर्ण निर्णय-प्रक्रिया और क्रोध के साथ अन्याय-निवारण की नीति है।
Barnes ने इसे पृथ्वी पर जल-प्रलय के भाग के रूप में देखा और कहा कि आकाश और जल के खुलने से पुराने समय के मनुष्यों के लिए नया आरम्भ संभव हुआ।
Clarke ने इसे समय-काल के संकेतक के रूप में प्रस्तुत किया है, जो परमेश्वर के समरूपी योजनाओं को प्रमाणित करते हैं।
उक्त उद्धरण पूर्ण-रूप से नहीं हैं; इनके सार-तत्व का प्रतीकात्मक नमूना ऊपर सुरक्षित रूप से प्रस्तुत किया गया है।