उत्पत्ति 7:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और क्या पक्षी, क्या घरेलू पशु, क्या जंगली पशु, और पृथ्वी पर सब चलनेवाले प्राणी, और जितने जन्तु पृथ्वी में बहुतायत से भर गए थे, वे सब, और सब मनुष्य मर गए।*

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उत्पत्ति 7:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 7:21 पर दृष्टिकोण

यात्रा आरम्भ करते हुए हम पाते हैं कि महापातक-जल प्रलय के समय पृथ्वी पर आये सभी जीव-जन्तुओं का समावेश एक कठोर लेकिन आवश्यक तथ्य के रूप में सामने आता है। यह वचन स्पष्ट करता है कि महान उद्धारक घटना के बाद पृथ्वी पर हर प्रकार के जीव-जन्तुओं के साथ सभी मनुष्यों का नाश हो गया। साथ ही यह परमेश्वर के न्याय और उसकी प्रतिरूपता के विषय में एक गहरी चेतावनी भी है—जल्दबाजी में किए गए गलत निर्णयों के परिणाम कितने व्यापक होते हैं।

पाठ का परिचय: chapter 7 का केंद्र

उत्पत्ति 7 अध्याय परमेश्वर के Noah के पात्र और जलप्रलय की तैयारी की कथा का हिस्सा है। इस verse में प्रलय की वास्तविकता और उसकी पूर्णता को चित्रित किया गया है—जो कि जलवृष्टि के साथ पृथ्वी के सभी जीव-जंतु और मानव जीवन को ढक देती है। यह न सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा है बल्कि परमेश्वर की प्रजा पर उसकी गंभीर दया-न्याय का एक दृश्य है: पृथ्वी पर घृणा, उन्नति के अभाव और पाप की गहराई तक पहुँच।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

यह आयत दो समझों को मजबूत बनाती है: एक, प्रकृति पर परमेश्वर का नियंत्रण और उसे चलाने का अधिकार; दूसरे, कड़ी चेतावनी कि पाप के परिणाम सामूहिक होते हैं। Noah के समय में भी पाप का फैलाव था, किंतु उसकी आस्था और धार्मिक दृढ़ता ने उसे परमेश्वर के संदेश के अनुसार जीवन बिताने की प्रेरणा दी। पूरा प्रकरण यह स्पष्ट करता है कि पृथ्वी पर हर जीवन की कीमत है और परमेश्वर के लक्ष्य में किसी भी प्राणी की कोई अयोग्यता नहीं है।

अनुसंधान-तुलना (Cross-references)

  • यहोशू 6:20–21: city के विनाश और उसकी सीमा के बारे में—यह दर्शाता है कि परमेश्वर के निर्णय कैसे स्पष्ट और निर्णायक होते हैं, विशेषकर व्यावहारिक रूप से सामाजिक-आचरण के अनुसार।
  • योहान्न 3:16-18: परमेश्वर की प्रेम और न्याय का संतुलन—न्याय के साथ प्रेम का भी स्वरूप हमें यत्नपूर्वक समझना चाहिए ताकि भय से नहीं, प्रेरणा से जीवन बदले।
  • यशायाह 55:8-9: परमेश्वर के मार्ग और हमारे विचारों के बीच अंतर—यह बताता है कि परमेश्वर की योजना मानव मति से परे है, परन्तु उसकी ओर प्रवृत्ति बनाकर ही सही मार्ग मिलता है।

धार्मिक सम्बद्ध विचार

यहाँ मॉडरेटर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की परम्परा से सम्मिलित समझ मिलती है कि प्रलय का नज़रिया एक चेतावनी है कि पाप के फैलाव पर कठोरतम दंड संभव है, तो भी परमेश्वर का उद्धारकर्ता-पथ Noah के जरिये प्रस्तुत है। Clarke लिखते हैं कि यह घटना परमेश्वर की न्याय संहिता का स्पष्ट प्रदर्शन है, जहाँ हर रचना का जीवन उसकी योजना के अनुसार प्रभावी रहता है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • गहराई से सोचिए: क्या आप परमेश्वर के मार्ग पर चलने के लिए तैयार हैं? पाप के परिणाम हमेशा एक प्रकार की समष्टिगत लागत लाते हैं—परिवार, समुदाय और समाज सभी प्रभावित होते हैं।
  • विश्वास में दृढ़ता: Noah की तरह श्रद्धा और आज्ञाकारी जीवन एक सुरक्षित मार्ग की कुंजी है, विशेषकर कठिन समय में।

संक्षिप्त सार

उत्पत्ति 7:21 बताता है कि परमेश्वर ने मानवता और पृथ्वी के सभी जीव-जन्तुओं के साथ जलप्रलय के द्वारा उनकी बर्बादी को पूर्ण किया। यह दृश्य एक चेतावनी है कि पाप का परिणाम सामूहिक हो सकता है, परन्तु विश्वास और धार्मिक जिम्मेदारी से उद्धार का रास्ता भी खुले रहता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 7:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब परमेश्‍वर ने नूह से कहा, “सब प्राणियों के अन्त करने का प्रश्न मेरे सामने आ गया है; क्योंकि उनके कारण पृथ्वी उपद्रव से भर गई है, इसलिए मैं उनको पृथ्वी समेत नाश कर डालूँगा।

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उत्पत्ति 6:17 (HINIRV) »
और सुन, मैं आप पृथ्वी पर जल-प्रलय करके सब प्राणियों को, जिनमें जीवन का श्‍वास है, आकाश के नीचे से नाश करने पर हूँ; और सब जो पृथ्वी पर हैं मर जाएँगे।

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उत्पत्ति 7:4 (HINIRV) »
क्योंकि अब सात दिन और बीतने पर मैं पृथ्वी पर चालीस दिन और चालीस रात तक जल बरसाता रहूँगा; और जितने प्राणी मैंने बनाये हैं उन सबको भूमि के ऊपर से मिटा दूँगा।”

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