Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52



यिर्मयाह 28:2 पर आधारित टिप्पणी—सारांश एवं पाठ-संदेश
यह् पद यहोवा के दयालु मोड़ और चेतावनी के बीच की स्थिति को दर्शाता है। यिर्मयाह के समय बाबुल की सेनाओं का दबदबा है, और राजधर्म-नेतृत्व के भीतर कुछ लोग यह मान कर चल रहे थे कि परमेश्वर ने बाबुल के नियंत्रण को दूर कर बाबुल को भीतरी रूप से हार मान लिया है। किन्तु this Verse एक नयी स्थित्य स्थिती की बात खोलता है: परमेश्वर अपनी सच्ची सत्ता के साथ संवाद करते हैं, पर वे अपने प्रेरित ज्ञानी के साथ सत्य रखते हैं, कि उनका निर्णय और मंसूबा स्थिर हैं।
पंक्ति-दृष्टि: अध्याय के भीतर स्थिति
यिर्मयाह 28 चैप्टर में नेतृत्त्व-समन्वय और वास्तविकता के बीच टकराव दिखता है। परमेश्वर के दृष्य से, यहोवा का संदेश है कि जिस प्रकार उसने बाबुल की शक्ति को सौंपा है, वही नियंत्रण रखता है। इसVerse में यह स्पष्ट है कि परमेश्वर ने बाबेल के राजा के जूए को तोड़ डाला है—यह एक प्रतीकात्मक भाषा है, जो बताती है कि परमेश्वर के निर्णय से संसार की सत्ता-व्यवस्था स्थिर नहीं रहती; वह sovereignty दिखाते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अनुरूप बाइबल संदर्भों की तुलना
- यहोवा की सत्ता और नियंत्रण का सिद्धांत देखें: दाऊद के समय भी वह शक्ति-परकथाओं के बीच उद्धार और न्याय बनाये रखते हैं।
- यह भी स्पष्ट है कि परमेश्वर अपने प्रोफेटों के संदेश के अनुसार ही कार्य करते हैं, भले ही राजा या जनसामान्य उसे न समझे।
संक्षेप में, यह Verse दिखाता है कि यहोवा की योजना मानव दृष्टि से बड़े समय तक स्पष्ट नहीं होती, परन्तु उसका आधिकारिक निर्णय स्थिर रहता है।
लागू करने योग्य आध्यात्मिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षेप विश्लेषण
1) यिर्मयाह 27–28 में अति-तत्पश्चात्त्व से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने संदेशवाहकों के माध्यम से सत्ता-विश्वास और धर्म के पथ को दृढ़ करते हैं। यह Verse तब स्पष्ट करता है कि राजनीतिक शक्तियाँ कितनी भी प्रबल हों, परमेश्वर की योजना उनसे ऊपर है।
2) दानियेल 2 में सामूहिक शक्तियों के परिवर्तन भी वही दर्शाते हैं कि परमेश्वर ही सत्ता-परिवर्तन का अदृश्य कारण है।
3) भजं 46-47 में यह माना गया है कि परमेश्वर की सेनाओं का यहोवा कभी हार नहीं मानते—यह सिद्धांत यहाँ भी समाहित है, कि सत्ता चाहे कितनी भी बदल जाए, उसका नियंत्रण परमेश्वर के हाथ में है।
संक्षिप्त सार
यिर्मयाह 28:2 यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की सत्ता और निर्णय स्थिर रहते हैं, भले ही समय और परिस्थितियाँ कठिन क्यों न हों। यह संदेश विश्वासियों को आश्वस्त करता है कि उनका प्रभु नियंत्रण में है और उसकी योजनाएं विश्वसनीय हैं।
नोट: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं, पर उनके विचारों के सार अब नीचे एकीकृत हैं।