Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 13:1 यहोशू 13:2 यहोशू 13:3 यहोशू 13:4 यहोशू 13:5 यहोशू 13:6 यहोशू 13:7 यहोशू 13:8 यहोशू 13:9 यहोशू 13:10 यहोशू 13:11 यहोशू 13:12 यहोशू 13:13 यहोशू 13:14 यहोशू 13:15 यहोशू 13:16 यहोशू 13:17 यहोशू 13:18 यहोशू 13:19 यहोशू 13:20 यहोशू 13:21 यहोशू 13:22 यहोशू 13:23 यहोशू 13:24 यहोशू 13:25 यहोशू 13:26 यहोशू 13:27 यहोशू 13:28 यहोशू 13:29 यहोशू 13:30 यहोशू 13:31 यहोशू 13:32 यहोशू 13:33



यहोशू 13:27 का संदर्भ—परिचय और उद्देश्य
यह शास्त्रभाग इशारे करता है कि यरदन के पूर्वी भाग के कुछ छूटे भागों को वंशावली के अनुसार निष्ट होने से निपटाना आवश्यक था। यहोशू ने मरास्मिक भूमि के विभाजन के समय पथ-प्रस्ताव किया कि कौन-सी जगहें, किन नगरों और किन किन्नारियों के राजाओं के राज्य अब भी बचे हुए थे, ताकि इस्राइल उसी क्षेत्र को ईश्वर की आज्ञा के अनुसार शांतिपूर्ण और स्थिरता से अपने अधिकार में ले सके। इस शस्त्र-निर्णय का उद्देश्य था कि इलाके में रहने वाले लोग, चाहे वे गैर-याकी इत्यादि जातियाँ हों, परन्तु इस्राइल के नेत्रत्व के अनुसार उनके साथ न्याय और व्यवस्था बने रहे।
मुख्य अर्थ
यह वचन इस बात पर प्रकाश डालता है कि इस्राइल के नागरिकों के लिए पूर्वी क्षेत्र में बची हुई भू-भाग-संरचना कैसे पूरी की जाएगी। यह स्पष्ट करता है कि पूरा भू-भाग, जिसमें तराई, नगर और ताल-रेखा शामिल थे, को शांतिपूर्ण तरीकों से संयुक्त व स्थिर रखने के लिए निर्धारित सीमा-रेखा का सम्मान अनिवार्य है।
मुख्य विषय
संबद्ध आयतन (Cross-references)
क्रमवार संदर्भ जिन्हें देखें तो अधिक स्पष्टता मिलती है:
व्याख्या: इन पदों से यह समझ आता है कि सीमा-निर्धारण और क्षेत्रीय पुनःविन्यास एक धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य समुदाय के भीतर न्याय, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
जीवन में सीमाओं का सम्मान एक साझा सद्भाव और सुरक्षा का आधार बनता है। यह碎 क्षेत्र भी, अगर सुव्यवस्थित और न्यायपूर्वक निर्देशित हो, समाज को एक साथ रहने की प्रेरणा देता है। अपने परिवार, पड़ोस और समुदाय के साथ स्पष्ट उद्देश्य और सीमा-रेखा निर्धारित करें ताकि संघर्ष कम हों और सहयोग बढ़े।
संक्षिप्त समापन
यहोशू 13:27 एक का संकेत देता है कि परमेश्वर के लोगों के लिए हर भू-भाग की मान्यता और व्यवस्था एक धार्मिक-नैतिक दायित्व है। यह यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय सीमाओं का पालन करते हुए समुदाय कैसे एक स्थिर आराधना और निष्ठा के साथ जीवन यापन कर सकता है।
उद्धृत संकलन से मिलता-जुलता विचार—मैथ्यू हेनरी और ऐल्बर्ट बर्न्स तथा एडम क्लार्क आदि पजरी साहित्य से प्रेरित अनुभूतियाँ इस प्रसंग में यह दर्शाती हैं कि सीमा-निर्धारण सामाजिक व्यवस्था के स्थायित्व के लिए आवश्यक है; “सीमाओं की मान्यता से ही समाज के भीतर order आता है” (सार-सार):