Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 13:1 यहोशू 13:2 यहोशू 13:3 यहोशू 13:4 यहोशू 13:5 यहोशू 13:6 यहोशू 13:7 यहोशू 13:8 यहोशू 13:9 यहोशू 13:10 यहोशू 13:11 यहोशू 13:12 यहोशू 13:13 यहोशू 13:14 यहोशू 13:15 यहोशू 13:16 यहोशू 13:17 यहोशू 13:18 यहोशू 13:19 यहोशू 13:20 यहोशू 13:21 यहोशू 13:22 यहोशू 13:23 यहोशू 13:24 यहोशू 13:25 यहोशू 13:26 यहोशू 13:27 यहोशू 13:28 यहोशू 13:29 यहोशू 13:30 यहोशू 13:31 यहोशू 13:32 यहोशू 13:33



पंक्तिभिन्न संदर्भ: यहोशू 13:2 का संदर्भ
तत्काल संदर्भ- स्थिति: यहोशू की पुस्तक में यहोशू ने इशारों-इशारों से यह कहा कि अब तक भूमि के विषय में आधी से अधिक मिल चुकी है और यहोशू के युग के अन्तिम भाग में उत्तर-पूर्व, उत्तर- पश्चिम और दक्षिणी भूभागों की मिलावट के बाद कुछ क्षेत्रों में शेष रहा था। यहोशू 13:2-3 में पलिश्तियों सहित अन्य समूहों के उन भागों का उल्लेख है जो अभी भी देश में बसे थे। यहाँ 13:2 विशेष रूप से पलिश्तियों के područ में बाकी राज्यों को दर्शाता है: “ये देश रह गए हैं, अर्थात् पलिश्तियों का सारा प्रान्त, और सारे गशूरी”।
ईश्वर की प्रेरणा में यह पाठ क्या दर्शाता है
यह पाठ पूरी तरह से प्रभु की योजना और उसकी कड़ी न्याय-गति का संकेत देता है। यहोशू उन क्षेत्रों के बारे में बताता है जिन्हें अभी तक दमनकारी आबादी से पवित्र देश नहीं मिला था, ताकि इस्लाह, प्रतिबद्धता और राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया जारी रहे। पलिश्तियों के क्षेत्र का उल्लेख यह बताता है कि ईश्वर ने नव-निर्माण के क्रम में कुछ सुरक्षा-चेक बना रखे थे और तब भी उनके लिए विकल्प खुला था जब यहूदा और अन्य जातियाँ परम-विश्वासपूर्ण आचरण में आगे बढ़तीं।
महत्वपूर्ण शब्दों व इमेजों की स्पष्टता
संबद्ध बाइबिल संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
1) पवित्रता और इकाई के लिए लक्ष्य: यहोशू 11:21–23 और 18:1-10 यह दिखाते हैं कि वाचा-भूमि का पूरा भाग कब तक पूर्ण किया गया था और कब नये निवासियों के साथ समझौते बनते रहे।
2) ईश्वर की दिशा-निर्देश और उसका विश्वासघात: यह अन्य पंक्तियाँ दिखाती हैं कि अधिपत्य के बावजूद, परमेश्वर ने क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमाओं की व्यवस्था बनाई, ताकि लोक एक समृद्ध और सुव्यवस्थित समाज बना सकें।
3) राज्यों के इतिहास में निर्गमन धारा: पलिश्ती आदि के क्षेत्र का उल्लेख यह भी संकेत करता है कि ईश्वर के लोग धीरे-धीरे अपने स्वर्गीय विरासत के लिए तैयारी कर रहे थे, और क्षेत्र का क्रमबद्ध हिस्सा-हिस्सा भविष्य में पूर्णत्व तक पहुँचेगा।
समकालीन अनुप्रयोग
- विश्वास-यात्रा में हर जगह पूर्ण नहीं मिलती; कुछ क्षेत्र अभी भी “रह गए” होते हैं, पर यह चुनौती ईश्वर के नियोजन के साथ जुड़ी रहती है। हमारे भीतर के संघर्षों, नैतिक सीमाओं या रिश्तों में जहाँ अभी-तक पूर्ण बदलाव नहीं आया है, वहाँ भी ईश्वर की योजना सक्रिय है।
- समुदाय-निर्माण में क्रमबद्धता आवश्यक है। यहोशू 13:2 की स्मृति हमें याद दिलाती है कि लक्ष्य-निर्माण में हल्के-फुल्के कदम नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित योजनाओं के साथ आगे बढ़ना पड़ता है।
- प्रभु के देश-निर्माण के उद्देश्यों में धैर्य और विश्वास जरूरी है। प्रत्यक्ष बड़े बदलाव समय लेते हैं—पर उनकी दिशा में प्रतिबद्धता रखना wisest होता है, ताकि हम जिसे एकत्रित करना चाहते हैं वह स्रोत-आदि के साथ सही समय पर पूरा हो सके।
सूक्ष्म लेकिन उपयोगी मार्गदर्शन
- यदि आप अपने जीवन के “बचे क्षेत्रों” को पहचानते हैं, तो prarthana और मार्गदर्शक शिक्षाओं के साथ उन्हें समेटना शुरू करें।
- समुदाय और परिवार के भीतर स्थिरता बनाए रखें; छोटे-छोटे कदम भी बड़े परिवर्तन लाते हैं।
यह commentary नीतिगत नहीं है, पर यह बताता है कि बाइबल की रहन-सहन-योजना में हर क्षेत्र का अपना स्थान है, और ईश्वर की योजनाओं के अनुसार हर हिस्से को एक दिन पूर्णता मिलती है।
टिप्पणी-उद्धरण (प्रमुख टिप्पणियाँ): यह पाठ हल्के-फुल्के क्रोम-उद्धरण नहीं है; पर नीचे प्रमुख आध्यात्मिक दृष्टिकोण दिए जाते हैं:
यह भाग निहित है: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसी मौजूदा सार्वजनिक-डोमेन टीका से प्राप्त संकल्पनाओं को प्राकृतिक रूप से समाहित कर एक संयुक्त व्याख्या प्रस्तुत की गई है।