Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 15:1 यहोशू 15:2 यहोशू 15:3 यहोशू 15:4 यहोशू 15:5 यहोशू 15:6 यहोशू 15:7 यहोशू 15:8 यहोशू 15:9 यहोशू 15:10 यहोशू 15:11 यहोशू 15:12 यहोशू 15:13 यहोशू 15:14 यहोशू 15:15 यहोशू 15:16 यहोशू 15:17 यहोशू 15:18 यहोशू 15:19 यहोशू 15:20 यहोशू 15:21 यहोशू 15:22 यहोशू 15:23 यहोशू 15:24 यहोशू 15:25 यहोशू 15:26 यहोशू 15:27 यहोशू 15:28 यहोशू 15:29 यहोशू 15:30 यहोशू 15:31 यहोशू 15:32 यहोशू 15:33 यहोशू 15:34 यहोशू 15:35 यहोशू 15:36 यहोशू 15:37 यहोशू 15:38 यहोशू 15:39 यहोशू 15:40 यहोशू 15:41 यहोशू 15:42 यहोशू 15:43 यहोशू 15:44 यहोशू 15:45 यहोशू 15:46 यहोशू 15:47 यहोशू 15:48 यहोशू 15:49 यहोशू 15:50 यहोशू 15:51 यहोशू 15:52 यहोशू 15:53 यहोशू 15:54 यहोशू 15:55 यहोशू 15:56 यहोशू 15:57 यहोशू 15:58 यहोशू 15:59 यहोशू 15:60 यहोशू 15:61 यहोशू 15:62 यहोशू 15:63
यहोशू 15:37 का स्थानी संदर्भ और स्वर
यहहूदा-भगदाद के क्षेत्र की सूची में यह शब्द आता है: फिर सनान, हदाशा, मिगदलगाद। यहूदा के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र की विभाजन-योजना में यह गावँ-घरों के नाम हैं, जो व्रजभूमि के सीमांत तक फैले हुए थे। ग्रहण-सीमा के भीतर ये गाँव दयालु रीति से विरासत का भाग माने जाते थे, और प्रत्यक्ष रूप से यहोशू के शासन-युग की संपत्तियों की मान्यता को दर्शाते हैं।
पद से दिखती बात और विश्वास का संकेत
यह संदर्भ दर्शाता है कि ईश्वर ने इस परिवार-समुदाय को उनके आगे के अन्य भागों के साथ मिलकर एक पुनीत धरोहर के रूप में स्थापित किया। यहोशू के कार्यकाल में, भूमियाँ बाँटना एक धार्मिक-नैतिक दायित्व था—उचित सीमाओं के भीतर विश्वास और प्रतीक्षा के साथ दशाएं सुरक्षित होती हैं। परमेश्वर के विश्वास-योग्य निवासियों के लिये यह भागीदारी और सुरक्षित बस्तियाँ का संकेत है, जहाँ वे एक साथ जीवन यापन कर सकते हैं और ईश्वर की उपस्थिति में रहें।
दो-तीन की व्याख्या-शब्द
पढ़े जाने वाले संदर्भ (Cross-references) और उनका संक्षेप महत्व
1) प्रत्येक बंटे हुए क्षेत्र की सूची में अन्य आस-पास के नगरों के साथ विरासत-शीर्षक का मिलान: यह दर्शाता है कि परमेश्वर के लोगों के जीवन में भौगोलिक स्थितियाँ कितनी महत्त्वपूर्ण थीं, क्योंकि वे धार्मिक सभाओं और घर-परिवारों के रूप-रंग को भी प्रभावित करती थीं।
2) अन्य यहूदी ग्राम-नामों के साथ मिलकर यह स्पष्ट होता है कि कितनी बार रोम-कालीन प्रशासन या जातीय विभाजन के बाद भी धार्मिक-उत्सव और क़ायदों का अभ्यास चलता रहा।
3) क्षेत्र-निर्णय के साथ स्थानीय पूजा-अर्चना और पुराने कानूनों के अनुरूप आचार-व्यवस्था का संतुलन भी दृष्टिगोचर होता है।
ऐतिहासिक और विश्वासी दृष्टिकोण से एक संयुक्त चेतना
मत्ती-हेनरी, आलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की सार्वजनिक-डायरी में यह विचार उभरता है कि विरासत-भूमि दैवीय आशीर्वाद और समुदाय-केन्द्रित जीवन के प्रतीक हैं। उनकी विचारधारा से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों के समूह-जीवन को संरक्षित रखना चाहता है ताकि आस्था, नैतिकता और पारिवारिक धर्म-संयोजन मजबूत रहे। इन विचारों के बीच 2-3 छोटे उद्धरणों के बजाय, हम एक समन्वित सार बनाते हैं: विरासत के हिस्से मिलना सरल नहीं, पर यह विश्वास की परीक्षा और ईश्वर-विश्वास के कर्म का भाग है।
आज के पाठ में अनुप्रयोग
उद्धृत अनुभागों से निष्कर्ष: विरासत की सूची एक स्मरण-चिह्न है कि ईश्वर हमें भौगोलिक-समुदाय के साथ जोड़े रखना चाहता है—जहाँ विश्वास, कर्तव्य और प्रेम एक साथ बढ़ते हैं। यदि आप अपने स्थानीय समुदाय में ईश्वर की उपस्थिति को अधिक दृढ़ करना चाहें, तो अपने घर और पड़ोस के साथ मेल-बंधन और सेवाकार्य की शुरुआत करें, ताकि यह क्षेत्र ईश्वर की महिमा का साक्ष्य बना रहे।
नोट: इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विशिष्ट शाब्दिक उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि आवश्यक हो तो उनके सार्वजनिक-डायरी के सामान्य विचार-निर्देशों का संगत संक्षेप समाहित किया गया है।