यहोशू 15:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वहाँ से अस्मोन होते हुए वह मिस्र के नाले पर निकला, और उस सीमा का अन्त समुद्र हुआ। तुम्हारी दक्षिणी सीमा यही होगी।

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यहोशू 15:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहोशू 15:4 का अर्थ और परिचय

इस आयत में यहोशू गाँवों की दक्षिणी सीमा निर्धारित करते समय मिस्र के नाले से आगे बढ़ कर अस्मोन के मार्ग से होकर उत्तर-पूर्व की दिशा में दक्षिणी सीमा का संकेत दे रहे हैं। सरल शब्दों में यह बताता है कि मर्यादित क्षेत्र की दक्षिणी सीमा कैसी होगी: मिस्र के मार्ग के नाले से होकर समुद्र तक, और यह दक्षिणी दिशा उनकी वसीयत में निर्धारित सीमा का एक भाग है।

preamble:Contextual background

यहोशू-प्रकाशन के समय यहूदी वंश अपने विरासत-भूमि के बारे में विभाजन प्रक्रिया से गुजर रहा था। यहविध सीमा-निर्धारण राष्ट्र की सुरक्षा, संसाधन, और निवास की व्यवस्था के लिये आवश्यक थी। दक्षिणी सीमा तब यूहदा के क्षेत्र को परिभाषित करती है, जो देश की भूभागीय संरचना के भीतर आस्था-सम्बन्धी पहचान को भी दर्शाती है।

interpretive observations

  • सीमा की भाषा स्थिर और भौगोलिक है—नाला से समुद्र तक। इसका तात्पर्य यह है कि दक्षिणी पंक्ति स्पष्ट और अटल है, मानों एक रेखा खींची गई हो।
  • यहोशू के निर्देशों में धार्मिक-संरक्षण की भावना है—यहूदियों के क्रमिक वंश-निर्माण की सुरक्षा और भूमि-स्वामित्व का संकल्प।
  • समुद्र अटूट सीमा के रूप में दर्शाया गया है; संसार के तट अस्थायित्व के बजाय स्थिरता और संरक्षित विरासत की प्रतीक हैं।

कथात्मक निष्कर्ष: 2-3 बिंदु

  1. ईश्वर की भूमिका क्षेत्र की सुरक्षा-सीमाओं के निर्धारण में प्रमुख है; यहोशू को सीमाओं की अनुपालना के लिये प्रेरित करते हैं।
  2. भू-स्वामित्व का अर्थ है समुदाय की पहचान और उत्तरदायित्व—वे अपनी विरासत के हिस्से को सुरक्षित रखना सीखते हैं।
  3. भविष्य के संदेश—धार्मिक-उत्सर्ग और संयम, ताकि विभाजन के बाद भी एकत्रित समुदाय बना रहे।

cross-references (संदर्भ-सम्बन्ध) और संक्षिप्त व्याख्या

यहोशू 1:6 के साथ यह सीमा-घोषणा जुड़ती है, जिसमें परमेश्वर भविष्य के लिये साहस और धैर्य के साथ वंश-स्वामित्व की पुष्टि करते हैं।

2 राष्ट्रों 1:8 से प्रेरणा मिलती है कि कानून और निर्देश पर चलना ही क्षेत्र की सुरक्षा और समाज की एकता है।

यशायाह 49:10 में भविष्य के कष्टों के बावजूद भी ईश्वर की सुरक्षा पर भरोसा बनाए रखने की बात आती है; यह सीमा-निर्धारण एक स्थिर, ईश्वर-निर्मित मार्ग की याद दिलाता है।

सारगर्भित टिप्पणियाँ (संक्षेप)

हिकमत यह है कि प्रभु के निर्देश भूमि-निर्धारण की नींव हैं। यहोशू 15:4 दक्षिणी सीमा की स्पष्टता में यह दर्शाते हैं कि परमेश्वर का अनुयायित्व और समुदाय की स्थिरता बराबर महत्व के हैं।

व्यावहारिक निष्कर्ष

जब हम अपने जीवन के “सीमाओं” की सुरक्षा कर लेते हैं—परिवार, विश्वास, और नैतिक दायित्व—तो ईश्वर की योजनाएं सरल ढंग से आगे बढ़ती हैं। सीमाओं का मान रखना शांति और समाज के बीच अखंडता बनाये रखता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहोशू 15:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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फिर वह सीमा अस्मोन से घूमकर मिस्र के नाले तक पहुँचे, और उसका अन्त समुद्र का तट ठहरे।

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(मिस्र के आगे शीहोर से लेकर उत्तर की ओर एक्रोन की सीमा तक जो कनानियों का भाग गिना जाता है; और पलिश्तियों के पाँचों सरदार, अर्थात् गाज़ा, अश्दोद, अश्कलोन, गत, और एक्रोन के लोग), और दक्षिणी ओर अव्वी भी,

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उसी दिन यहोवा ने अब्राम के साथ यह वाचा बाँधी, “मिस्र के महानद से लेकर फरात नामक बड़े नद तक जितना देश है,

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