Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 1:1 न्यायियों 1:2 न्यायियों 1:3 न्यायियों 1:4 न्यायियों 1:5 न्यायियों 1:6 न्यायियों 1:7 न्यायियों 1:8 न्यायियों 1:9 न्यायियों 1:10 न्यायियों 1:11 न्यायियों 1:12 न्यायियों 1:13 न्यायियों 1:14 न्यायियों 1:15 न्यायियों 1:16 न्यायियों 1:17 न्यायियों 1:18 न्यायियों 1:19 न्यायियों 1:20 न्यायियों 1:21 न्यायियों 1:22 न्यायियों 1:23 न्यायियों 1:24 न्यायियों 1:25 न्यायियों 1:26 न्यायियों 1:27 न्यायियों 1:28 न्यायियों 1:29 न्यायियों 1:30 न्यायियों 1:31 न्यायियों 1:32 न्यायियों 1:33 न्यायियों 1:34 न्यायियों 1:35 न्यायियों 1:36



न्यायियों 1:16 पर टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ
इस पद में मूसा के साले केनी आत्मक (केनी) पुत्र का उल्लेख है, जो यहूदाओं के साथ मिलकर इज़राइल के बाड़े-रविशं के बाहर रहने वाले बस्तियों में रहने लगा। यहूदियों के संकल्प के बाद, संघर्षों के समय में विविध परिवारों और कुलों की एकता और स्थानांतरित समुदायों की स्थापित स्थिति की ओर संकेत करता है। इस पंक्ति में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार कुछ गैर-इज़रायली परिवार भी आकर युग के शुरुआती चरणों में इस्राएल के साथ मिलकर रहने लगे, जिससे सामाजिक और सामुदायिक गतिशीलता उजागर होती है।
केंद्रीय अर्थ
कनी मनुष्य की सन्तान के रूप में एक विशिष्ट व्यक्ति समूह का उल्लेख यहूदियों के साथ घुलकर रहने की दिशा में इंगित करता है। यह बताता है कि राजनीति-युद्ध के बावजूद, निवास स्थानों की क्रमबद्ध व्यवस्थितता और बाहरी समूहों के साथ सह-अस्तित्व को शुरुआती समय में कैसे स्वीकार किया गया था। साथ ही, यह संकेत देता है कि यहूदियों के विरुद्ध नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर रहने वाले परिवार एक दूसरे के लिये सहायता, संसाधन और सुरक्षा के स्रोत बनते थे।
मुख्य विषय
प्रासंगिक पार्श्व-पत्र (Cross-references)
1) यहूदियों के अन्य बाहरी समूहों के साथ संबंधों के उदाहरण देखने के लिए न्यायियों 1 के आसपास के संदर्भ देखें—जहाँ विभिन्न कुटुंबों का आना-जाना और उनके साथ बातचीत का वर्णन है।
2) उत्पत्ति - फसह के समय के क्रमिक निवास बदलों का संकेत: बाहरी लोगों का मिलना जिस प्रकार इस्राएल के समाज के गठन में योगदान देता है, उसका एक सामान्य मार्गदर्शक उदाहरण मिलता है।
3) यह समय के सामाजिक-विकास के संकेत: समुदाय के भीतर विविधता स्वीकारना और एकीकरण के प्रयास।
व्यावहारिक चिंतन
यह छोटा विवरण हमें सिखाता है कि एक समाज का स्थायित्व केवल युद्ध-जीत से नहीं होता, बल्कि विविध समुदायों के बीच साहचर्य और सम्मान से भी बनता है। भिन्न पृष्ठभूमि के लोग भी यदि संयुक्त रूप से सुरक्षा और संसाधन साझा करें तो समाज मजबूत बन सकता है। व्यक्तिगत स्तर पर भी यह विचार तब उपयोगी होता है जब हम विविधता के बीच स्थायी दोस्ती और सहभागिता की खोज करते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यद्यपि कथा में एक विशेष व्यक्ति के नाम का उल्लेख है, यह verse यह संकेत देता है कि यहूदियों और अन्य कुटुंबों के बीच रहने की प्रक्रिया समय-समय पर विकसित होती रही. यह एक साझा जीवन की शुरुआत है जिसमें बाहरी समुदाय भी इस्राएल के साथ मिलकर एक ग्रहणशील और सह-अस्तित्वपूर्ण समाज बनाने लगे।