Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 1:1 न्यायियों 1:2 न्यायियों 1:3 न्यायियों 1:4 न्यायियों 1:5 न्यायियों 1:6 न्यायियों 1:7 न्यायियों 1:8 न्यायियों 1:9 न्यायियों 1:10 न्यायियों 1:11 न्यायियों 1:12 न्यायियों 1:13 न्यायियों 1:14 न्यायियों 1:15 न्यायियों 1:16 न्यायियों 1:17 न्यायियों 1:18 न्यायियों 1:19 न्यायियों 1:20 न्यायियों 1:21 न्यायियों 1:22 न्यायियों 1:23 न्यायियों 1:24 न्यायियों 1:25 न्यायियों 1:26 न्यायियों 1:27 न्यायियों 1:28 न्यायियों 1:29 न्यायियों 1:30 न्यायियों 1:31 न्यायियों 1:32 न्यायियों 1:33 न्यायियों 1:34 न्यायियों 1:35 न्यायियों 1:36

न्यायियों 1:31 का संदर्भ और अर्थ
इस पंक्ति में लेखक गिल्गाल के आरम्भिक संघर्ष के पृष्ठभूमि का भाग बताते हैं: कबीलाई नेताओं में से कुछ ने ऐसे निवासियों को नहीं निकाला जो परमेश्वर की निर्धारित मंजूरी के विरुद्ध थे। आशेर के साथ, अन्य जनजातियाँ भी आक्रमणों के समय कमजोर पड़ गईं और उनका निवास स्थान बच गया। यह वादा-उल्लंघन की और सैनिक नीति में एक धक्का-सी बात को उजागर करता है—यदि ईश्वर के लोगों के लिए यह खतरे का समय है, तो शत्रुओं के बीच सुरक्षा पाने के लिए कौन-सी प्राथमिकताएं अपनाईं गईं।
मूल संदेश का सार
यह आयत न्याय के पाठ और कर्तव्य के दायरे में एक स्प्ष्ट चेतावनी देती है: जब राष्ट्र ईश्वर की आज्ञाओं के अनुरूप न चले, तो उनके पड़ोसी और उनके निवास स्थान खतरे में पड़ जाते हैं। इशारे के तौर पर, यह बताता है कि भरोसे के लायक निर्णय—जिनमें निर्णायक संकल्प, संस्थागत अनुशासन और सामाजिक न्याय शामिल है—के अभाव में नुकसान संभव है।
तीन प्रमुख विषय
अनुसंधान-युक्त क्रॉस-रेफरेंस
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के लोग अपने शत्रुओं के बीच सुरक्षित रहने के बजाय नीतिगत दृढ़ता और सत्य पालन पर निर्भर रहते हैं, ताकि भविष्य में उसकी आशीष बनी रहे।
व्यावहारिक चिंतन
आज के पाठ से एक सरल पाठ यह निकलता है: संगठित समाज में सही निर्णय वह है जो न केवल सुरक्षा, बल्कि नैतिकता और आस्तित्व के लिए परमेश्वर की इच्छा की पूर्ति करे। यदि हम अपने जीवन के क्षेत्रों—परिवार, समुदाय, कार्यस्थल—में निष्कपट ईमानदारी और साहस के साथ सत्य का पालन करें, तो दुष्ट प्रभाव स्वतः पीछे हटते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
न्यायियों 1:31 हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर के लोगों के लिए नीतिगत अनुशासन और आवाज उठाते हुए भाईचारे के साथ चलना आवश्यक है। अवहेलना या स्वार्थ की नीति शत्रुओं को आसान संदेश देती है।
उद्धृत टिप्पणीकारों से संक्षेप उद्धरण
डायजेस्टेड स्मरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के सार का एक समेकित रूप इस सारांश में समाहित है।