Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 1:1 न्यायियों 1:2 न्यायियों 1:3 न्यायियों 1:4 न्यायियों 1:5 न्यायियों 1:6 न्यायियों 1:7 न्यायियों 1:8 न्यायियों 1:9 न्यायियों 1:10 न्यायियों 1:11 न्यायियों 1:12 न्यायियों 1:13 न्यायियों 1:14 न्यायियों 1:15 न्यायियों 1:16 न्यायियों 1:17 न्यायियों 1:18 न्यायियों 1:19 न्यायियों 1:20 न्यायियों 1:21 न्यायियों 1:22 न्यायियों 1:23 न्यायियों 1:24 न्यायियों 1:25 न्यायियों 1:26 न्यायियों 1:27 न्यायियों 1:28 न्यायियों 1:29 न्यायियों 1:30 न्यायियों 1:31 न्यायियों 1:32 न्यायियों 1:33 न्यायियों 1:34 न्यायियों 1:35 न्यायियों 1:36


न्यायियों 1:26 — संदर्भित कथा की पहली झलक
कथा का आरम्भ उस समय होता है जब यहूदी देश के भीतर स्थित जातीय बस्तियों के बारे में सूचित किया गया है। यहाँ एक ऐसे मनुष्य का उल्लेख है जिसने हित्तियों के देश में जाकर एक नगर बसाया और उसका नाम लूज़ रखा; यह नाम आज भी वही बना हुआ है। यह विवरण उस युग की विविधताओं को उजागर करता है जब धीरे-धीरे परमेश्वर का आदर्श नहीं था, और उसकी योजनाओं के अनुसार ही नहीं, बल्कि मानवीय मार्गों से भी कदम उठते थे।
ईश्वर या विश्वास पर पाठ से उभरती बातें
इस Verse में ईश्वर की योजना के भीतर मानव स्वाधीनता और आसन्न प्रभाव दोनो एक साथ दिखाई देते हैं—याद दिलाता है कि परमेश्वर अपने लोक-प्रवास में भिन्न-भिन्न पथों पर चलने के बावजूद भी उसके उद्देश्य पूरे होते रहते हैं। यह दिखाता है कि प्रभु सत्ता के साथ मानवीय निर्णयों को भी सामंजस्यपूर्वक संचालित कर सकता है, भले ही वह मार्ग कितने अपरंपरागत या असंगत क्यों न प्रतीत हों।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट करणी
हित्तियों के देश— यह क्षेत्र पहले से ईश्वर के लोग नहीं थे, बल्कि राष्ट्रों के निवासी थे जिनके साथ इस्राएल के संघर्ष और समझौते आगे बढ़ते रहे। नगर बसाया— यहाँ एक स्थायित्व की आकांक्षा, सुरक्षा की खोज और नए जीवन की स्थापना का चित्र है। लूज़— नाम का चयन एक पहचान बनना और मार्गदर्शक संकेत होना दर्शाता है कि व्यक्ति ने अपने नए ठिकाने के साथ एक नया परिचय चुना।
Related Cross-References (संक्षिप्त व्याख्या)
आज के जीवन पर अनुप्रयोग
1) निर्णयों में ईश्वर की प्रधानतम भूमिका का स्मरण रखें—कभी-कभी नए स्थान या स्थिति बनाते समय भी परमेश्वर की योजना हाथ पकड़ती है। 2) परिवर्तन की दिशा में धैर्य रखें—एक नगर का निर्माण अभी-अभी नहीं होता, समय और प्रयास से स्थायित्व आता है। 3) पहचान और स्थान के चयन में नीतिपरक सोच अपनाएं—क्या यह कदम आपके विश्वास के अनुसार है, या केवल आराम/उपयोगिता के कारण है?
समापन सार
यहशब्द बताता है कि परमेश्वर के लोग कभी-कभी अपरंपरागत मार्गों से यात्रा करते हैं, पर प्रभु की योजना साथ रहती है। लूज़ नामक नगर का चयन एक नई पहचान का आरम्भ है जो समय के साथ इतिहास बन गया।
हेडिंग उद्धरण (यदि साहित्यिक संदर्भ चाहिए): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से सम्बंधित सामान्य विचार आवश्यकतानुसार 2-3 छोटे संदर्भ रूप में उद्धृत किए जा सकते हैं, परन्तु पूरे पाठ का प्रत्यक्ष उद्धरण नहीं दिया गया है।