न्यायियों 1:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उस मनुष्य ने हित्तियों के देश में जाकर एक नगर बसाया, और उसका नाम लूज़ रखा; और आज के दिन तक उसका नाम वही है।

न्यायियों 1:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

न्यायियों 1:26 — संदर्भित कथा की पहली झलक

कथा का आरम्भ उस समय होता है जब यहूदी देश के भीतर स्थित जातीय बस्तियों के बारे में सूचित किया गया है। यहाँ एक ऐसे मनुष्य का उल्लेख है जिसने हित्तियों के देश में जाकर एक नगर बसाया और उसका नाम लूज़ रखा; यह नाम आज भी वही बना हुआ है। यह विवरण उस युग की विविधताओं को उजागर करता है जब धीरे-धीरे परमेश्वर का आदर्श नहीं था, और उसकी योजनाओं के अनुसार ही नहीं, बल्कि मानवीय मार्गों से भी कदम उठते थे।

ईश्वर या विश्वास पर पाठ से उभरती बातें

इस Verse में ईश्वर की योजना के भीतर मानव स्वाधीनता और आसन्न प्रभाव दोनो एक साथ दिखाई देते हैं—याद दिलाता है कि परमेश्वर अपने लोक-प्रवास में भिन्न-भिन्न पथों पर चलने के बावजूद भी उसके उद्देश्य पूरे होते रहते हैं। यह दिखाता है कि प्रभु सत्ता के साथ मानवीय निर्णयों को भी सामंजस्यपूर्वक संचालित कर सकता है, भले ही वह मार्ग कितने अपरंपरागत या असंगत क्यों न प्रतीत हों।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट करणी

हित्तियों के देश— यह क्षेत्र पहले से ईश्वर के लोग नहीं थे, बल्कि राष्ट्रों के निवासी थे जिनके साथ इस्राएल के संघर्ष और समझौते आगे बढ़ते रहे। नगर बसाया— यहाँ एक स्थायित्व की आकांक्षा, सुरक्षा की खोज और नए जीवन की स्थापना का चित्र है। लूज़— नाम का चयन एक पहचान बनना और मार्गदर्शक संकेत होना दर्शाता है कि व्यक्ति ने अपने नए ठिकाने के साथ एक नया परिचय चुना।

Related Cross-References (संक्षिप्त व्याख्या)

  • यहोशू 17:18 — यह बताता है कि कैसे देश के भीतर के भागों के लिए स्थायी निवास और रक्षा की नीतियाँ बनती हैं; वर्तमान वाक्य में भी नगर-निर्माण का एक रूप है—स्थायित्व की दिशा।
  • उत्पत्ति 12:1-3 — परमेश्वर के आह्वान और चयन की शुरुआत जहाँ अब्राहम के साथ पहली बार “निकटतम प्रबंध” का संकेत मिलता है; यहां भी कहानी में नए केंद्र बनते हैं।
  • यहोशू 24:15 — आज की जीवन-नीति की चुनी हुई राह की बात करता है कि हम किसके साथ चलना चुनते हैं; लूज़ के चयन की तरह किसी स्थान को अपनाने का तात्पर्य निर्णय-निर्माण से है।

आज के जीवन पर अनुप्रयोग

1) निर्णयों में ईश्वर की प्रधानतम भूमिका का स्मरण रखें—कभी-कभी नए स्थान या स्थिति बनाते समय भी परमेश्वर की योजना हाथ पकड़ती है। 2) परिवर्तन की दिशा में धैर्य रखें—एक नगर का निर्माण अभी-अभी नहीं होता, समय और प्रयास से स्थायित्व आता है। 3) पहचान और स्थान के चयन में नीतिपरक सोच अपनाएं—क्या यह कदम आपके विश्वास के अनुसार है, या केवल आराम/उपयोगिता के कारण है?

समापन सार

यहशब्द बताता है कि परमेश्वर के लोग कभी-कभी अपरंपरागत मार्गों से यात्रा करते हैं, पर प्रभु की योजना साथ रहती है। लूज़ नामक नगर का चयन एक नई पहचान का आरम्भ है जो समय के साथ इतिहास बन गया।

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न्यायियों 1:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 राजाओं 7:6 (HINIRV) »
क्योंकि प्रभु ने अराम की सेना को रथों और घोड़ों की और भारी सेना की सी आहट सुनाई थी, और वे आपस में कहने लगे थे, “सुनो, इस्राएल के राजा ने हित्ती और मिस्री राजाओं को वेतन पर बुलवाया है कि हम पर चढ़ाई करें।”

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2 इतिहास 1:17 (HINIRV) »
एक रथ तो छः सौ शेकेल चाँदी पर, और एक घोड़ा डेढ़ सौ शेकेल पर मिस्र से आता था; और इसी दाम पर वे हित्तियों के सब राजाओं और अराम के राजाओं के लिये उन्हीं के द्वारा लाया करते थे।

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