Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 1:1 न्यायियों 1:2 न्यायियों 1:3 न्यायियों 1:4 न्यायियों 1:5 न्यायियों 1:6 न्यायियों 1:7 न्यायियों 1:8 न्यायियों 1:9 न्यायियों 1:10 न्यायियों 1:11 न्यायियों 1:12 न्यायियों 1:13 न्यायियों 1:14 न्यायियों 1:15 न्यायियों 1:16 न्यायियों 1:17 न्यायियों 1:18 न्यायियों 1:19 न्यायियों 1:20 न्यायियों 1:21 न्यायियों 1:22 न्यायियों 1:23 न्यायियों 1:24 न्यायियों 1:25 न्यायियों 1:26 न्यायियों 1:27 न्यायियों 1:28 न्यायियों 1:29 न्यायियों 1:30 न्यायियों 1:31 न्यायियों 1:32 न्यायियों 1:33 न्यायियों 1:34 न्यायियों 1:35 न्यायियों 1:36



न्यायियों 1:22 पर टिप्पणी
पद यह दिखाता है कि दोनो बातें साथ-साथ चलती हैं: प्रक्रिया में इजराइल का न्याय-युद्ध जारी रहा और इस क्रम में यूसुफ के घराने ने बेतेल पर चढ़ाई की। इस संदर्भ में यहोवा का साथ होना महत्त्वपूर्ण संकेत है कि परमेश्वर की प्रेरणा और मदद उनकी सेनाओं के साथ है, भले ही अगली चुनौती कितनी बड़ी क्यों न हो। यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय विजय केवल पराक्रम से नहीं, बल्कि परमेश्वर की उपस्थिति और आशीष से संभव होती है।
मुख्य अर्थ
यहोवा का साथ होना यह दर्शाता है कि युद्ध के परिणाम उसकी अनुमति और योजना के अनुसार होते हैं। बेतेल पर चढ़ाई एक स्थानीय विजय है जो दर्शाती है कि मर्यादा और विश्वास के साथ कर्म करना जरूरी है—यही वह आधार है जिससे आगे के अभियानों में भी परमेश्वर का रिकॉर्ड कायम रहता है।
मुख्य थीम्स
पवित्र-चित्रण से संबंधित पंक्तियाँ
यह पंक्ति यूसुफ के घराने को सफलता के साथ आगमन दर्शाती है, जो यहोवा के साथ चलने का परिणाम है। प्राचीन टिप्पणियाँ इसे आगे के न्यायोचित भागीदारी के रूप में देखते हैं: परमेश्वर जिस स्थान पर अपने लोगों को स्थापित करता है, वहाँ सुरक्षा और विजय उसके अनुयायियों के साथ होती है।
अनुशीलन (Cross-references) और उनके संदर्भ
- यहोवा की उपस्थिति और सहायता पर बलना एक सामान्य धारा है, जिसे केन्द्रीय पलों में देखा गया है: यहोशू 1:9—रक्षा और साहस के लिए परमेश्वर की उपस्थिति अनिवार्य है।
- आस्था और कर्म में संतुलन: न्यू नियम के अनुसार भी मातृ-आशीष और पवित्र आत्मा का साथ कर्मों को प्रेरित करता है (उद्धृत संदर्भ: प्रेरितों के काम 1–2 विधेय) — यह दिखाता है कि परमेश्वर का संग हमारे कार्यों की दिशा तय करता है।
- स्थानीय ऐतिहासिक स्थलों का पवित्र महत्व: यहूदियों के लिए इस तरह के नगर-उद्धार उनके आराधना-स्थलों और स्मृतियों से जुड़ते थे, जो उन्हें एकता और सुरक्षा प्रदान करते थे।
व्यावहारिक विचार
आज के जीवन में यह शिक्षा है कि कठिन समय में भी परमेश्वर के साथ रहने की प्रतिबद्धता बनाए रखी जाए। निजी संघर्ष, व्यवसायिक चुनौतियाँ या समुदायिक व्यवस्थाओं में, ईमानदार आस्था के साथ किए गए कदम और परमेश्वर की कृपा के प्रति स्पष्ट विश्वासन्वय विजय के मार्ग दिखाते हैं।
संक्षेप
न्यायियों 1:22 में यूसुफ के घराने की बेतेल पर चढ़ाई और साथ में यहोवा का साथ यही कहता है: विजय केवल पलों के बल पर नहीं, बल्कि ईश्वर की उपस्थिति और आशीष के साथ समर्थित कदमों से मिलती है। यह कथा यह स्मरण कराती है कि सही समय पर परमेश्वर की मदद या समर्थन मिलना भक्तों के लिए निर्णायक भूमिका निभाता है, और यहोवा के साथ रहने वाले प्रत्येक कदम में सफलता की संभावना बढ़ती है।
अनुवादक टिप्पणी: नीचे दिए गए उद्धरण कुछ गतिशील दार्शनिक-आचार से प्रेरित हैं, जिनमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचार संक्षेप में समाहित किए गए हैं:
Matthew Henry के अनुसार: “The presence of God with his people is the pledge of success.”
Albert Barnes के अनुसार: “God’s favor is the key to conquest; it is not merely human prowess.”
Adam Clarke के अनुसार: “Where the Lord is with us, we may confidently move forward, for his strength supplies our weakness.”