Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 20:1 न्यायियों 20:2 न्यायियों 20:3 न्यायियों 20:4 न्यायियों 20:5 न्यायियों 20:6 न्यायियों 20:7 न्यायियों 20:8 न्यायियों 20:9 न्यायियों 20:10 न्यायियों 20:11 न्यायियों 20:12 न्यायियों 20:13 न्यायियों 20:14 न्यायियों 20:15 न्यायियों 20:16 न्यायियों 20:17 न्यायियों 20:18 न्यायियों 20:19 न्यायियों 20:20 न्यायियों 20:21 न्यायियों 20:22 न्यायियों 20:23 न्यायियों 20:24 न्यायियों 20:25 न्यायियों 20:26 न्यायियों 20:27 न्यायियों 20:28 न्यायियों 20:29 न्यायियों 20:30 न्यायियों 20:31 न्यायियों 20:32 न्यायियों 20:33 न्यायियों 20:34 न्यायियों 20:35 न्यायियों 20:36 न्यायियों 20:37 न्यायियों 20:38 न्यायियों 20:39 न्यायियों 20:40 न्यायियों 20:41 न्यायियों 20:42 न्यायियों 20:43 न्यायियों 20:44 न्यायियों 20:45 न्यायियों 20:46 न्यायियों 20:47 न्यायियों 20:48



न्यायियों 20:35 पर समझ और महत्व
यह पद यह बताता है कि इस्राएलियों ने बेन्यामीन युद्ध में शत्रु के साथ उठी भीषण लड़ाई में महान हानी झेली। यह अध्याय एक चरम स्थिति का चित्रण है जहाँ भीषण नैतिक और सामाजिक परीक्षण सामने आते हैं, और किस प्रकार परमेश्वर की सहायता के बगैर भीड़-भाड़ पर विजय पाना असंभव है। verse में कहा गया है कि यहोवा ने बिन्यामीनियों को इस्राएल से हरवा दिया; यह एक कठिन परिणाम है जो यह दिखाता है कि पाप और अशांति के कारण समुदाय का नाश भी संभव होता है जब वे परमेश्वर की आशीर्वाद-निर्णय से दूर जाते हैं।
प्रमुख संदर्भ: मूल संदर्भ और संदर्भित संदेश
यर्तम से यहूदी सेना ने यह निर्णय लिया कि बिन्यामीनियों के विरुद्ध लड़ाई लड़नी है क्योंकि उनके भीतर कुछ बुरे आचरणों के कारण समाज पर खतरा मंडराता था। उस समय का मूल संदेश यह है कि परमेश्वर के आदेश और समाजिक व्यवस्था के विरुद्ध पूर्ण स्वतंत्रता से उठना、हानि दे सकता है। पराक्रम के बजाय पवित्र विधान और न्याय की पालना ही असल सुरक्षा है। यह सुनिश्चित करने के लिए यह पंक्तियाँ संघर्ष के भीतर भी परमेश्वर के निर्भर रहने की अनिवार्यता को रेखांकित करती हैं।
पवित्रत्रुटि से पहले की नीतियाँ: थीम्स एवं अनुशासन
cross-references (संक्रमण-परिचय)
संवेदना बढ़ाने के लिए नीचे दिए गए पाठ केवल संकेत देते हैं; पूर्ण पद नहीं उद्धृत किए जाते:
इन संदर्भों के कारण यह समझ आता है कि न्याय और ध्यातव्य नागरिकता में सामंजस्य बनाये रखना परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप है।
आध्यात्मिक व्याख्या: स्पष्ट संदेश
इस verse के पीछे का गहरा संदेश यह है कि परमेश्वर की योजना के बिना हमने कितनी भी रणनीतियाँ क्यों न बना ली हों, परिणाम उसी के अधीन होते हैं। यह एक चेतावनी है कि समुदाय के हर सदस्य की निष्ठा और नैतिकता परमेश्वर के राज्य के अनुरूप होनी चाहिए। तब ही संघर्षों के बीच भी आशा बनी रहती है।
छोटे-से उत्तरदायी पंक्तियाँ (कथन-उद्धरण के रूप में)
यदि किसी परिस्थिती में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलन के ठोस वाक्य चाहिए हों, तो नीचे के उद्धरणों की याद दिलाई जाती है (जो सार्वजनिक डोमेन commentary में मिलते हैं):
— Matthew Henry: स्पष्ट नहीं।
— Albert Barnes: स्पष्ट नहीं।
— Adam Clarke: स्पष्ट नहीं।
इनमें से हर उद्धरण एक विशिष्ट टिप्पणीकार के शब्दों के अनुरूप मिल सकता है, पर यहाँ सीधे उद्धरण नहीं दिए जा रहे हैं ताकि मूल पाठ-संदर्भ सुरक्षित बना रहे।
उपसंहार: व्यावहारिक devotional विचार
इस verset से सीख मिलती है कि जब हम अपने-अपने निर्णयों में प्रभु की दिशा का सम्मान करें, तब भी चुनौतियाँ और कठिनाई आ सकती हैं। परन्तु परमेश्वर के मार्गदर्शन और समुदाय की एकता के साथ, हम कठिनाइयों से उभर सकते हैं। अपना उत्तरदायित्व समझकर, अपने जीवन में पवित्र नैतिक मानदंडों को बनाए रखना, और एक दूसरे के लिए सहयोगी बनना, यह सबसे बड़ी रक्षा है।